कोरोना वायरस से लड़ाई में हाउसिंग सोसाइटीज को याद रखनी चाहिए ये 10 बातें

कोविड-19 या कोरोना वायरस के खतरे के कारण दुनिया की रफ्तार थम सी गई है. आज हम आरडब्ल्यूए हाउसिंग सोसाइटीज के अधिकार, जिम्मेदारियों और क्या करें, क्या न करें पर बात करेंगे.

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कोरोना वायरस का खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. इसके कारण दुनिया में डर का माहौल है लेकिन साथ ही निपटने के लिए कदम भी उठाए जा रहे हैं. पूरी दुनिया में दो लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और हजारों लोगों की जान जा चुकी है. पूरी दुनिया में स्कूलों के दरवाजे बंद हो गए हैं. साथ ही जिम, स्वीमिंग पूल, सिनेमा हॉल, पार्क और हर ऐसी जगह जहां भीड़ जुटती हो, उसे बंद कर दिया गया है. कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम का सिस्टम शुरू किया है और हाउसिंग सोसाइटीज में लोग घरों में कैद हो गए हैं. क्या इन सभी बातों से आपको चिंता हो रही है? हाउसिंग सोसाइटीज और अपार्टमेंट्स ऐसे नियम ला रहे हैं, ताकि हर परिवार सुरक्षित रहे. बेंगलुरु के प्रेस्टिज सेंट जोंसवुड का उदाहरण लेते हैं. सोसाइटी ने नियम बनाए हैं, जिसमें हर शख्स से यह बताने को कहा है कि क्या वह संक्रमित है या कोविड-19 पॉजिटिव है. सिर्फ सरकार या स्वास्थ्य अधिकारी ही नहीं, हाउसिंग सोसाइटीज भी कड़े कदम उठा रही हैं. आइए आपको बताते हैं कि ऐसे मुश्किल वक्त में क्या करें.

1. अगर आप कोरोना वायरस संदिग्ध हैं तो इन नियमों को फॉलो करें:

हाउसिंग डॉट कॉम ने सीनियर मेडिकल ऑफिसर, सेंट्रल हॉस्पिटल, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड व एक्स-रेजीडेंट, एम्स भुवनेश्वर डॉ गौरव सिंह से बात की ताकि हमारे पाठकों की समस्याओं को दूर किया जा सके. उन्होंने बताया, ‘जिन लोगों में इसके लक्षण नहीं हैं लेकिन वे संक्रमित शख्स के संपर्क में आए हैं, उन्हें क्वारेंटाइन में जाना चाहिए. यह सेल्फ आइसोलेशन से अलग है. यह उन लोगों के लिए है, जो पहले से ही बीमार हैं. आप खुद को आइसोलेट इसलिए करते हैं ताकि इन्फेक्शन दूसरे शख्स में न फैले. ऐसा करने की हिदायत 14 दिनों के लिए दी जाती है ताकि बीमार शख्स घर से बाहर या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा न करे. अगर आपको दवाइयां चाहिए तो उन्हें घर पर ही मंगवा लें और बेकार के कामों के लिए न भागें.’ सेल्फ आइसोलेशन का वक्त यह देखकर बढ़ाया जाता है कि शख्स में कितने वक्त तक लक्षण दिखते हैं.

2. कोरोना संक्रमित शख्स के परिवार वालों को किन नियमों को पालन करना चाहिए

छपरा सदर बाजार के कम्युनिकेबल डिसिज ऑफिसर डॉ रतनेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा, कम से कम संपर्क अहम है लेकिन अगर आप परिवार के साथ रह रहे हैं तो यह पूरी तरह मुमकिन नहीं है. डॉ रतनेश्वर प्रसाद सिंह ने परिवार के लिए कुछ सलाह दी हैं:

  • अगर संक्रमित शख्स को जरूरत है तो सिर्फ परिवार का एक ही शख्स उसकी मदद करे.
  • मरीज के कपड़ों को सीधे हाथ न लगाएं. उन्हें अन्य परिवार वालों के कपड़ों के साथ वॉशिंग मशीन में भी न धोएं.
    संक्रमित शख्स से मिलने के बाद सैनिटाइजर से हाथ धोएं. अगर उन्होंने गलती से आपको हाथ लगाया है तो कपड़े बदल लें.
  • अगर परिवार का कोई शख्स कोविड-19 से पीड़ित है तो परिवार के बाकी लोगों को खुद को 14 दिनों के लिए खुद को क्वारेंटाइन करना चाहिए, भले ही लक्षण हों या नहीं हों. अगर लक्षण हैं तो तुरंत टेस्ट कराना चाहिए.
    जिन भी चीजों को संक्रमित शख्स ने छुआ है, उन्हें कीटाणुनाशक से साफ करना चाहिए. इसमें टेबल, चेयर, शेल्फ, टॉयलेट, कपड़े और अन्य चीजें शामिल हैं.
  • संक्रमित शख्स के लिए अलग साबुन, शैंपू और तौलिया होना चाहिए.  अगर मुमकिन हो तो वही बाथरूम इस्तेमाल न करें.
  • अपनी हाउसिंग सोसाइटी में इस बारे में बताएं ताकि आपके पड़ोसी या कोई और ऐसे वक्त में आपके घर में न आएं.

    इसके अलावा, आपके घर में एक आइसोलेशन रूम होना चाहिए, जिसमें ग्लव्ज, हेयर कवर, मास्क, गाउन, हैंड रिब्स, लिक्विड सोप, तौलिया, कीटाणुनाशक, सरफेस क्लीनर और बड़े डिस्पोजेबल बैग्स हों, जिस पर लिखे निर्देशों का ठीक तरह से पालन करना चाहिए. इमरजेंसी के हालात में अपने राज्य के कोरोना वायरस हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें.

3. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए हाउसिंग सोसाइटी के लोगों को क्या करना चाहिए

डॉ गौरव कहते हैं, ‘सबसे पहले तो, घबराने की जरूरत नहीं है. अगर आप सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखेंगे तो इन्फेक्शन के चांस कम होंगे.’ जो लोग हाउसिंग सोसाइटीज में रहते हैं और किसी संक्रमित या संदिग्ध शख्स को जानते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें.

  • ऐसे शख्स के साथ संपर्क में न आएं, जिसकी ट्रैवल हिस्ट्री कोरोना प्रभावित इलाके से लौटने की हो.
  • अगर आपने गलती से उस शख्स के संपर्क में आ गए हैं और लक्षण भी दिख रहे हैं तो खुद को ठीक महसूस करने या टेस्ट के रिजल्ट नेगेटिव निकलने तक क्वारेंटाइन कर लें.
  • भीड़ में शामिल होने से बचें और अन्य लोगों से दूरी बनाकर रखें.
  • अगर आपकी कॉलोनी, शहर या अन्य जगह पर कोविड 19 के केस मिलते हैं तो जिला प्रशासन आपका इलाका सील कर सकता है और आने-जाने पर पाबंदी भी लगाई जा सकती है. अगर आपको लगता है कि ऐसा होना चाहिए तो प्रशासन को खबर करने में देर न करें.

    4. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में हाउसिंग सोसाइटीज के लोगों से क्या उम्मीद होनी चाहिए?

केरल के मंजेरी के सरकारी मेडिकल कॉलेज की अडिशनल प्रोफेसर डॉ निलिना कोशी ने कहा, ‘एक स्टैंड मुमकिन नहीं है लेकिन जितना हो सके इसका पालन करना चाहिए.’ चूंकि हाउसिंग सोसाइटीज के लोग पड़ोस में आपस में मिलते हैं तो ऐसे में यह सुनिश्चित करें कि आप पीड़ित परिवार को किसी तरीके से परेशान न करें. आइए आपको कुछ टिप्स बताते हैं.

  • पीड़ित परिवार को बहिष्कृत न करें. यह एक तरह का उत्पीड़न है, जिससे परिवार के हर शख्स को सदमा लग सकता है.
  • आप उस परिवार की मदद या उन्हें दवाई पहुंचा सकते हैं. यह उनके घर के बाहर ही छोड़ दें, अंदर न जाएं.
  • क्वारेंटाइन सिर्फ शारीरिक एकांत होता है. व्हाट्सऐप या फोन कॉल्स के जरिए परिवार के लोगों से जुड़े रहें.
    उनकी प्राइवेसी की जरूरत का सम्मान करें.

    डॉ कोशी के मुताबिक, ‘ऐसी सभ्यताएं, जहां सोशल डिस्टेंसिंग आम बात है, जैसे सिंगापुर, वहां कोरोना वायरस को चेक किया जा सकता है. लेकिन यह भारत जैसे देश में मुश्किल है, जहां लोग करीब से आकर एक-दूसरे से मिलते हैं. लिहाजा क्वारेंटाइन या सेल्फ आइसोलेशन मुश्किल हो सकता है लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.’

    5. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आम सुविधाओं का कैसे करें इस्तेमाल?

दिल्ली के मयूर विहार 1 पॉकेट 1 के रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट मन मोहन सिंह ने कहा कि उनका स्टाफ सभी लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली जगहों और सुविधाओं को मॉनिटर कर रहा है. ऐसे में यह सलाह है कि:

  • जिन पार्कों में झूले हैं, उन्हें अस्थायी तौर पर बंद रखा जाएगा, ताकि जो बच्चे इन दिनों घर पर हैं, वे इसका इस्तेमाल न करें.
  • इनडोर स्पोर्ट्स एरिया, जिम, कॉमन योगा या मेडिटेशन रूम का अब इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.
  • अगर आपकी सोसाइटी में क्लब हाउस है तो वहां जाने से बचें.
  • सभी के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टंकी, पब्लिक वॉशरूम और टॉयलेट्स को यूज न करें.
  • अगर आपकी बिल्डिंग या अपार्टमेंट में लिफ्ट है तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें. अगर यह मुमकिन नहीं है तो हैंड सैनिटाइजर का तुरंत इस्तेमाल करें.
  • यह सुनिश्चित करें कि सोसाइटीज में रिसेप्शन एरिया या लाउंस का इस्तेमाल तभी करें, जब बहुत जरूरी हो. साथ ही हाउसकीपिंग स्टाफ उन जगहों को अच्छे से साफ करे.
  • संक्रमित व्यक्ति का मेडिकल कचरा खुले में नहीं फेंकना चाहिए. सैनिटेशन वर्कर्स को सूचित कर दें और वेस्ट को अलग-अलग बैग्स में भर दें ताकि वर्कर्स उनकी चपेट में न आएं. दुर्भाग्यवश कुछ सोसाइटीज बायो-डिग्रेडेबल, नॉन-डिग्रेडेबल और मेडिकल वेस्ट को अलग करने पर जोर देते हैं, कुछ अन्य नहीं. यह संक्रामक कचरे के ट्रीटमेंट को रोकता है.
  • दूध के बैग, लिफ्ट के बटन, डोर बेल, न्यूजपेपर्स, कार के दरवाजे, दुकानों के काउंटर्स, कुरियर, शेयर्ड कैब्स, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, जूते, गार्डन सीट, ग्रोसरी आइटम्स, एटीएम और करेंसी नोट्स इत्यादि को छूते वक्त सावधानी बरतें. यह अनुमान है कि कोरोना वायरस इन चीजों की सतह पर 3 दिनों तक जिंदा रहता है इसलिए कोई रिस्क न लें.

6. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोसाइटी में आचार संहिता का पालन होना चाहिए

 

  • झुंड में जमा न हों. अगर हाउसिंग सोसाइटीज में कोई जश्न है तो उसे स्थगित कर दें.
  • बच्चों को साफ-सफाई के बारे में बताया जाना चाहिए. घर में उन्हें खेलने के लिए अन्य विकल्प दें या फिर उनका ध्यान क्रिएटिव और एंटरटेनिंग चीजों में लगाएं.
  • घरेलू सहायकों और विजिटर्स को हैंड वॉश और मास्क उपलब्ध कराएं.
  • अपने निकाय प्रशासन से परिसर को शुद्ध और कीटाणुरहित करने के लिए कहें. सुनिश्चित करें कि जो वर्कर्स इस काम में जुटे हों, वे खुद सुरक्षित रहें.
  • लोगों और विजिटर्स को जागरुक करने के लिए आप बैनर्स या पैम्फलेट भी लगा सकते हैं कि ऐसी महामारी की स्थिति में क्या करें और क्या न करें.
  • हेल्थ कंडीशन को लेकर लोग पारदर्शी रहें. अगर कोई संदिग्ध या कोरोना वायरस का पुष्ट केस आता है तो उस शख्स को क्वारेंटाइन किया जाना चाहिए और बाहरी लोग जैसे ड्राइवर्स, मेड, डिलिवरी पर्सन या विजिटर्स को उससे दूरी बना लेनी चाहिए.
  • हर जगह आपकी प्लेट, ग्लास, चम्मच और बोतल साथ रखें. यह बात अपनी सोसाइटी के हाउसकीपिंग और मेंटेनेंस स्टाफ को भी बता दें. अगर वे एक ही बर्तन को शेयर करते हैं तो ऐसा करने का यह सही वक्त नहीं है.
  • अपने पड़ोसियों के साथ दयालु रहें. पारदर्शिता की उम्मीद सिर्फ दूसरों से ही न रखें. अगर आपको लगता है कि आप कोरोना वायरस से पीड़ित हैं तो खुद को क्वारेंटाइन कर लें और दो सप्ताह तक घर में ही रहें. आप सोसाइटी में दूसरों को भी अलर्ट कर सकते हैं ताकि वे आपके पास न आएं.

7. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ सामान्य सुझाव

ज्यादा बातचीत से बचें: आप इस समय दूसरों के पास जाने से खुद को प्रतिबंधित कर सकते हैं क्योंकि न केवल आप बल्कि अन्य परिवार भी सोशल डिस्टेंसिंग चाहते हैं. अधिकारियों ने बताया है कि सोशल डिस्टेंसिंग समय की जरूरत है और यह हर किसी के फायदे में है कि आपके घर/अपार्टमेंट परिसर में सभी इस एडवाइजरी का पालन करते हुए स्वस्थ रहें.

  • घर में बुजुर्गों को सुरक्षित रखें: अगर आपके घर में बड़े-बुजुर्ग हैं, जो मॉर्निंग या इवनिंग वॉक के लिए जाते हैं तो उनके लिए अलग से एक्सरसाइज करने के लिए घर में व्यवस्था करें ताकि उनका बाहरियों के साथ कम संपर्क हो.
  • वंचितों को शिक्षित करें: घरेलू सहायकों, सिक्योरिटी गार्ड्स, ग्रोसरी वेंडर, न्यूजपेपर वेंडर, डिलिवरी ब्वॉयज इत्यादि को निजी स्वच्छता की जरूरत के बारे में बताना जरूरी है. आमतौर पर बड़े अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में एक ही घरेलू सहायिका तीन-चार घरों में काम करती है. ऐसे मामलों में भले ही आपने निजी स्वच्छता सुनिश्चित की हो लेकिन घरेलू सहायिका में यह बीमारी कहीं और से हो सकती है, अगर अन्य परिवार आप जैसे सतर्क नहीं हुए तो.

    8. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आरडब्ल्यूए उपाय कर सकते हैं, लोगों की निंदा नहीं

    दिल्ली के मयूर विहार 1, पॉकेट 1 के रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट मन मोहन सिंह ने कहा कि आरडब्ल्यूए ऐसे कदम उठा रही है, जिससे जोखिम कम हों. उदाहरण के तौर पर, सिक्योरिटी गार्ड्स, मेंटेनेंस स्टाफ असोसिएशन के पे-रोल पर हैं और उन्हें स्वच्छता के बारे में बता दिया गया है. उन्होने कहा, ‘अब परिसर के अंदर हम बाहरियों को आने नहीं दे रहे हैं. पूरा स्टाफ अब हमारा है और हम लोगों से यह गुजारिश कर रहे हैं कि वे सोसाइटी के भीतर की सुविधा का ही इस्तेमाल करें. ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने साफ-सफाई के लिए प्राइवेट कर्मचारियों को रखा हुआ है. इससे बाहरी लोग परिसर के अंदर आते हैं.

इससे रिस्क बढ़ जाता है. हमने लोगों से पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) की सुविधाएं इस्तेमाल करने को कहा है. ईडीएमसी की कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां हर दिन सभी लाइनों में आती हैं.’ अगर कोई संक्रमित शख्स या उसका परिवार क्वारेंटाइन के नियम मानने से इनकार कर दे तो? सिंह ने कहा, ‘सौभाग्य से, अब तक हमारे सामने ऐसी स्थिति नहीं आई है. लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो हम उस खास घर की सुविधाएं काट सकते हैं. ऐसे परिवार दूसरों के लिए भी खतरा हैं.’ बंबई हाई कोर्ट के एडवोकेट आदित्य प्रताप की राय जुदा है. वे कहते हैं कि लोगों को सार्वजनिक साफ-सफाई की गाइडलाइंस फॉलो करनी चाहिए लेकिन लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने की स्वतंत्रता केवल वैधानिक अधिकारियों के पास है. यह एक महामारी है और इसके लिए तत्काल उपायों की जरूरत होती है लेकिन RWA को कानून के साथ मिलकर शक्ति का प्रयोग करना चाहिए. वे लोग पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. लेकिन खुद से आरडब्ल्यूए किसी शख्स या परिवार के खिलाफ एक्शन नहीं ले सकता. वे उपाय कर सकते हैं लेकिन लोगों की निंदा नहीं.

9. COVID-19  की रोकथाम के लिए कानून आपकी मदद कैसे कर सकता है?

एडवोकेट प्रताप ये सलाह देते हैं:

  • अगर आपको शक है कि आपकी सोसाइटी में कोई कोविड-19 पॉजिटिव है तो आप पुलिस या स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित कर सकते हैं. लेकिन यह बात अगर सच नहीं हुई तो इसे कोई अपराध नहीं माना जाएगा क्योंकि आपका इरादा कुछ सही करने का था. लेकिन यह जरूर बता दें कि जो आप कर रहे हैं, उसका आपको सिर्फ शक है. बाकी अगला कदम प्रशासन को लेने दें.
  • कोई अगर संदिग्ध या कन्फर्म मामले में किसी शख्स की पहचान गलत इरादे से उजागर करता है तो यह न सिर्फ निजता का उल्लंघन है बल्कि मानहानि का मामला भी है. सिर्फ वैधानिक अधिकारियों को ही ये जानकारियां सामने लाने का अधिकार है. इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के सेक्शन 72 के मुताबिक गोपनीयता या निजता भंग होने पर दो साल तक की कैद या 1 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. अगर आपकी किसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, रजिस्टर, रिकॉर्ड, दस्तावेज, सूचना इत्यादि तक पहुंच है और आप बिना उस शख्स की मंजूरी लिए इसे लीक करते हैं तो यह अपराध माना जाएगा.

10. महामारी रोग अधिनियम, 1897

कोविड-19 से निपटने के लिए महामारी रोग अधिनियम, 1897 को कई राज्यों में लागू किया गया है. इस प्रावधान से अधिकारी जोखिम को कम करने के लिए आपातकालीन कदम उठा सकते हैं. इन स्टेप्स के अलावा प्रशासन को यह कानून इन मामलों में कदम उठाने का अधिकार भी देता है:

1. अगर कोई शख्स नियमों या आदेशों का उल्लंघन करता है तो भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 188 के तहत उसे सजा दी जा सकती है. अगर आप किसी ऐसे शख्स को जानते हैं तो प्रशासन को सूचित कीजिए.

2. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत किसी भी कार्रवाई के लिए किसी भी शख्स के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी. हालांकि, सुनिश्चित करें कि आप इस विशेषाधिकार का दुरुपयोग नहीं कर रहे हैं.

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (महामारी के प्रकोप की जांच के लिए तुरंत कदम उठाने के लिए) और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (जमाखोरी व मास्क और सैनिटाइटर जैसी आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी को रोकने के लिए) को भी लागू किया गया है.

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