वो 7 तरीके, जिनके जरिए आप घर को बारिश में नुकसान से बचा सकते हैं


आज हम आपको उन आम समस्याओं के बारे में बताएंगे, जो मॉनसून के दौरान मकानमालिकों को सहनी पड़ती हैं. बेहद आसान तरीकों से आप इन समस्याओं से निपटकर घर की खूबसूरती बरकरार रख सकते हैं.

भारत में मॉनसून का मौसम लोगों को भीषण गर्मी से राहत दिलाता है. लाखों लोगों के चेहरे खिल उठते हैं. खेतों में अपनी फसलों का इंतजार कर रहे किसानों से लेकर बच्चों तक हर कोई खुश हो जाता है. लेकिन मकानमालिकों के लिए यही वक्त सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है. आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे, जिनके जरिए आप मकान, जिसे घर कहा जाता है, वह अनपेक्षित स्थिति से निपटने लायक हो जाए.

घर की दीवारों की सुरक्षा

मॉनसून फफूंदी की बदबू का पर्यायवाची है. इस मौसम में दीवारों में फफूंदी लग जाती है, जिससे बदबू फैलने लगती है. ऐसे मामलों में, फफूंदी से बचने के लिए दीवारों को ब्लीच और पानी के मिश्रण से साफ करें. ब्लीच न सिर्फ क्लीनिंग एजेंट का काम करता है बल्कि ये कीटाणुनाशक भी है, जो फिर से फफूंदी लगने से रोकता है.

तालों की देखभाल

दुर्भाग्यवश, आपको तालों की जरूरत के बारे में भी सोचना पड़ता है. क्योंकि ये उस तरह से काम नहीं करते, जैसा इन्हें करना चाहिए. तालों का सही तरह से काम नहीं कर पाने का मुख्य कारण बदलता मौसम भी होता है. लिहाजा, सुनिश्चित करें कि तालों को हर महीने चेक किया जाए. अगर ताले सही तरह से काम नहीं कर रहे हैं तो WD40 स्प्रे का इस्तेमाल करें, जो तालों के अंदरूनी हिस्से से धूल और गंदगी हटाता है. तालों की सतह को साफ करने के लिए नरम कपड़ा इस्तेमाल करें. तालों को साफ करने के लिए ऑयल, लुब्रिकेंट या कोई अन्य तरह का जेल इस्तेमाल न करें.

फर्नीचर का बचाव करें

भारत के अधिकतर घरों में लकड़ी या चमड़े की सामग्री वाला फर्नीचर होता है. ये हवा में मौजूद नमी से खराब हो सकता है. फर्नीचर का बचाव करने के लिए, इसे दरवाजों और खिड़कियों से दूर रखें. मॉनसून के मौसम में घर में कोई री-डिजाइनिंग का काम न कराएं खासकर जिसमें लकड़ी का काम शामिल हो. नमी से सामानों को बचाने के लिए अलमारियों में कपूर की गोलियां, नीम की पत्तियां और लौंग रखें.

दरवाजों की रक्षा

लकड़ी के दरवाजे हवा में नमी की मात्रा बढ़ने के कारण फूल जाते हैं. इससे बचने के लिए आप दरवाजों के किनारों पर तेल लगा सकते हैं. एक अन्य विकल्प सैंडपेपर का उपयोग है, जिससे आप दरवाजे के उस हिस्से को साफ़ कर सकते हैं, जो बंद करते समय फंस जाता है. नमी के कारण धातु के फ्रेम वाले दरवाजे/ खिड़कियां आसानी से जंग खा सकते हैं. जंग को रोकने का एक आसान तरीका है, नियमित रूप से दरवाजों की रंगाई-पुताई.

खिड़कियों को चेक करें

घर की खिड़कियों पर ही सबसे ज्यादा बारिश की मार पड़ती है और अगर सही तरीके से मेंटेनेंस न की जाए तो पानी की लीकेज की समस्या भी हो सकती है. यूं तो खिड़कियों के फ्रेम्स को फिर से पेंट करना भी एक विकल्प है लेकिन आप यूपीवीसी (Unplasticised Polyvinyl Chloride)  के फ्रेम्स भी लगवा सकते हैं. यूपीवीसी विंडो फ्रेम्स पर नमी का कोई असर नहीं होता और ये खिड़कियों की अंदरूनी परत तक आने से बारिश के पानी और हवा को रोक देते हैं. खिड़कियों के कब्जों को सबसे अधिक दरकिनार किया जाता है. सुनिश्चित करें कि कब्जे सही तरह से फिक्स्ड रहें क्योंकि बारिश के पानी को घर में आने से रोकने में ये अहम भूमिका निभाते हैं.

अंदरूनी वातावरण

नम हवा और प्राकृतिक रोशनी की कमी एक उदास वातावरण घर के अंदर पैदा कर देती है. रिसाव भी घर की खूबसूरती को बर्बाद कर देता है. घर ताजा और स्वागत योग्य लगे इसके लिए घर में हवा आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. खिड़कियां कुछ वक्त के लिए खोल दें ताकि ताजी हवा और प्राकृतिक रोशनी कमरे में आ जाए. फर्नीचर में गहरे रंग जैसे पीला, संतरी और लाल का इस्तेमाल करें. घर को ताजा और खुशनुमा बनाने के लिए आर्टिफिशियल लाइट्स का इस्तेमाल करें.

लीकेज को रोकें

वक्त पर लीकेज को रोक लेना जरूरी है. ताकि घर की छतों और दीवारों को बारिश नुकसान न पहुंचा सके. दरारों की वजह से लीकेज होती है, जो दीवारों को कमजोर और फफूंदी लगने की वजह बन सकती है. ऐहतियातन कदम उठाते हुए अपने घर की दीवारों पर वाटर प्रूफ कोटिंग वाली पेंटिंग कराएं.

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