संपत्ति से होने वाली इनकम को ऐसे करें कैलकुलेट


टैक्सपेयर की संपत्तियों की संख्या के आधार पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भुगतानकर्ता पर कई तरह के टैक्स लगाता है, जिसे टैक्स छूट पाने के लिेए चुकाना जरूरी है।
टैक्सपेयर को अपने स्वामित्व वाली संपत्तियों से मिली आय पर ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ के तहत टैक्स चुकाना पड़ता है, चाहे वह कमर्शियल प्रॉपर्टी हो या रिहायशी।

काराधान के फायदे:

अगर आपके पास कोई घर है तो आपको मिला हुआ किराया या जो मिलने की संभावना है पर टैक्स लगाया जाता है। इस वास्तविक किराये या काल्पनिक किराये को इनकम टैक्स की भाषा में ‘वार्षिक मूल्य’ (एनुअल वैल्यू) के रूप में जाना जाता है। हालांकि जो संपत्ति आप अपने बिजनेस या प्रोफेशन के लिए इस्तेमाल करते हैं उस पर ‘घर से आय’ के रूप में टैक्स नहीं लगाया जाता।
अगर घर किराये पर नहीं दिया जाता और वह आपके खुद के रहने के लिेए इस्तेमाल हो रहा है या दूसरे घर में आपके निवास के कारण खाली रहता है जिस पर आपका स्वामित्व नहीं है तो एेसे में जो घर टैक्स पेयर के स्वामित्व वाले हैं, उनमें से कानून एक घर को उसके कब्जे वाला मानता है। सिंगल प्रॉपर्टी की सालाना वैल्यू को शून्य माना जाता है। अगर प्रॉपर्टी किराये पर दी गई है तो उससे मिले किराए पर टैक्स लगेगा। अगर एक से ज्यादा घर खुद के कब्जे वाले हैं तो आपको एक घर को खुद के रहने वाला और काराधान के लिए अन्य प्रॉपर्टीज पर काल्पनिक किराया अॉफर करना होगा।

उपलब्ध कटौतियां:

आवासीय संपत्ति पर टैक्सेबल इनकम की गणना करते वक्त दो तरह की कटौतियां उपलब्ध हैं। पहला है स्टैंडर्ड डि़डक्शन, जिसका संबंध रिपेयरिंग से है, जो सालाना 30% की फ्लैट दर पर किया जाता है। अगर मरम्मत इत्यादि पर कोई खर्च न भी किया गया हो तब भी यह कटौती उपलब्ध है। खुद के कब्जे वाली प्रॉपर्टी में रिपेयरिंग इत्यादि पर कोई कटौती उपलब्ध नहीं है, क्योंकि एेसी संपत्ति की सालाना वैल्यू शून्य है। दूसरी कटौती किसी से पैसे उधार लेने, घर खरीदने, बनाने या अपनी मौजूदा संपत्ति की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए ब्याज से संबंधित है। यही फायदा कमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी उपलब्ध है। इसके अलावा होम लोन पर प्रोसेसिंग फीस या प्रीपेमेंट फीस भी डिडक्शन के तौर पर क्लेम किया जा सकता है। पैसा भी किसी से उधार लिया जा सकता है, चाहे वह आपके रिश्तेदार हों, या दोस्त। जरूरी नहीं कि बैंक से लिया जाए।
खुद के कब्जे वाली संपत्ति के लिए उपलब्ध डिडक्शन पर सालाना 2 लाख रुपये का कैप है। लेकिन जो संपत्ति किराये पर दी गई है या किसी अतिरिक्त आत्म कब्जे वाली संपत्ति को किराये पर दिया हुआ माना जाता है। एेसे लोन पर पूरा ब्याज क्लेम किया जा सकता है। अगर आपकी एक से ज्यादा कब्जे वाली दो प्रॉपर्टीज हैं और एेसी प्रॉपर्टीज पर देय ब्याज 2 लाख को पार कर जाता है तो कम या शून्य ब्याज वाली आत्म संपत्ति को रखना चाहिए।
अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए उस साल से ब्याज क्लेम किया जा सकता है, जिसमें कंस्ट्रक्शन पूरी हो गई और पोजेशन मिल गया। कंस्ट्रक्शन वर्ष में आप पूरे साल का ब्याज क्लेम कर सकते हैं, भले ही पोजेशन साल के आखिरी दिन मिला हो। पोजेशन लेने से पहले के वर्षों में भुगतान किए गए ब्याज की कुल राशि उस वर्ष की शुरुआत में पांच समान किश्तों में क्लेम की जा सकती है, जिसमें कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका हो और कब्जा मिल गया हो। खुद के कब्जे वाली प्रॉपर्टी के लिए वर्तमान ब्याज सहित कुल ब्याज का दावा अब भी 2 लाख तक सीमित होगा।
भले ही आपके स्वामित्व वाली कितनी ही संपत्तियां हों, यह किराये पर हों या खुद के कब्जे वाली, किसी भी नुकसान की गणना ‘घर से आय’ के तहत होगी और केवल दो लाख तक की आय के खिलाफ ही सेट ऑफ किया जा सकता है। जो नुकसान साल में सेट अॉफ नहीं हो पाया, उसे आगे बढ़ाया जा सकता है। आगे बढ़ाया गया लोन आय के खिलाफ सेट ऑफ किया जा सकता है। अगर कोई नुकसान हुआ है तो उसे ‘घर से आय’ के खिलाफ आठ वर्षों में ही सेट ऑफ किया जाना चाहिए उसके बाद नहीं। अगर नुकसान आठ वर्षों के भीतर सेट अॉफ नहीं किया गया तो वह खत्म हो जाएगा।
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