क्या मकानमालिक किरायेदारों के मेहमानों पर प्रतिबंध लगा सकता है? जानिए क्या कहता है कानून


किरायेदारों के मेहमान या दोस्त मकानमालिक के लिए कभी-कभी परेशानी का सबब बन जाते हैं. लेकिन मकान का किराया देने के बाद क्या मकानमालिक इसे कंट्रोल कर सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि मैत्रीपूर्ण तरीके से मेहमानों की समस्या का हल कैसे निकाला जा सकता है.
लीज, लीव या लाइसेंस अग्रीमेंट किरायेदार और मकानमालिक के रिश्ते को दर्शाता है. ज्यादातर किरायेदारी समझौतों में किरायेदारों के मेहमानों से जुड़ा क्लॉज नहीं होता, जो आगे चलकर दोनों के बीच विवाद का कारण बनता है. फ्लैटों में मेहमानों और आने-जाने वालों का कोई मुद्दा नहीं होता लेकिन जिन घरों में मकानमालिक खुद रहता है, वहां कुछ पाबंदियां हो सकती हैं.
बेंगलुरु के पीआर एग्जीक्युटिव ऐश्वर्या जयरमन ने कहा कि चूंकि प्रॉपर्टी मकानमालिक की होती है इसलिए उसे नियम तय करने का अधिकार होता है कि लंबे समय के लिए मेहमान रहेंगे या नहीं. उन्होंने कहा, ”मकानमालिक अकसर किरायेदारों के दोस्तों के ठहरने पर सवाल उठाते हैं और इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि मकानमालिक से बेहतर तालमेल हो और उनसे पहले ही इसकी इजाजत ले ली जाए. जब आप किराये के लिए घर ढूंढ रहे हों तो ऐसी जगह चुनें, जो आपके लाइफस्टाइल को सूट करे. लेकिन अगर आप गलत जगह पर आ गए हैं तो वहां के नियमों का पालन करें और अपनी जिंदगी इस तरह जिएं ताकि मकानमालिक और अन्य लोगों को परेशानी न हो.”
मेहमानों के प्रतिबंध पर कानूनी नजरिया: रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (REMI) की डायरेक्टर शुभिका बिल्खा ने कहा कि मेहमानों और विजिटर्स के मामले में कोई खास कानूनी प्रतिबंध लागू नहीं होते. बिल्खा ने कहा, ”हालांकि स्पेसिफिकेशंस किरायेदार और मकानमालिक के अग्रीमेंट के आधार पर बदल भी सकते हैं. विजिटर्स और लंबे समय तक रहने वाले रिश्तेदारों के मामले में हाउसिंग सोसाइटी की अपनी शर्तें व नियम हो सकते हैं, जिसका पालन सोसाइटी से सभी सदस्यों और किरायेदारों को करना चाहिए. अगर प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल या गैरकानूनी सौदेबाजी होती है तो मकानमालिक किरायेदार और उसके मेहमानों को निकाल सकता है.
साई एस्टेट कंसलटेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित बी वाधवानी ने माना कि मकानमालिकों के कई कानूनी हक होते हैं लेकिन इसमें मेहमानों, दोस्तों के लिए नियम शामिल नहीं होते क्योंकि किरायेदार ने घर किराये पर लिया है. वाधवानी ने कहा, ”कुछ सोसाइटीज में पाबंदियां होती हैं, जहां वे खुद नियम बनाती हैं. लेकिन किराये वाली जगह पर मेहमानों और दोस्तों के आने-जाने को लेकर सरकार ने कोई खास नियम नहीं बनाया है. मेहमानों के आने पर मकानमालिक ज्यादा पैसे नहीं वसूल सकता. लेकिन अगर मकानमालिक को तकलीफ है तो वह इस बारे में हाउसिंग सोसाइटी से बात कर ऐसा हल निकाल सकते हैं, जिससे दोनों को फायदा हो.”

कैसे किरायेदार और मकानमालिक के बीच बेहतर संबंध बन सकते हैं?

किरायेदार और मकानमालिक का रिश्ता पारदर्शी और आपसी सम्मान से भरा होना चाहिए. अगर कोई परेशानी है तो उसे समझौते से पहले ही निपटाना चाहिए. बिल्का ने कहा, ”मकानमालिक के लिए किसी भी महिला के रिश्तेदारों पर प्रतिबंध लगाना बेहद मुश्किल है. अगर उसके परिवारवाले या मेहमान लंबे समय तक रुकेंगे तो किरायेदार को अग्रीमेंट के नियमों का पालन करना होगा और इस बारे में मकानमालिक को पहले बताना होगा.” सलाह यह भी दी जाती है कि अपने पड़ोसी की इज्जत करें और मकानमालिक के साथ संबंध बेहतर बनाएं.
सभी व्यक्तियों की तरह, किरायेदारों के पास भी राइट टू प्रीवेसी है और वे अपने पति या पत्नी व करीबी परिवारवालों के साथ रह सकते हैं. इसका मतलब है कि हर बाद जब भी मेहमान आएं किरायेदारों को इस बारे में मकानमालिक को बताना जरूरी है. लेकिन यह रोज की चीज न बन जाए. किरायेदारों को मेहमानों को बुलाने का कानूनी हक है इसलिए कम वक्त के लिए आने वालों पर मकानमालिक को भी सवाल नहीं उठाना चाहिए. अगर किरायेदार के रिश्तेदार या दोस्त फ्लैट में लंबे समय तक रहने वाले हैं तो किरायेदार और मकानमालिक को लीज अग्रीमेंट में इसका क्लॉज जुड़वा लेना चाहिए.
साझा आवास में मेहमानों से कैसे डील करें: अगर कोई साझा आवास में रह रहा है तो किरायेदार हर वक्त अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को नहीं बुला सकता क्योंकि इससे उस घर में रहने वाले अन्य लोग डिस्टर्ब हो सकते हैं. जयरमन ने कहा, ”अगर आप मेहमानों को बुलाना चाहते हैं तो हमेशा अपने रूममेट्स की इज्जत करें. उन्हें इस बारे में बताएं और मंजूरी ले लें.”
किसी अनजान शख्स के साथ रहने से अजीबोगरीब स्थिति पैदा होती है और सह-किराएदार को भी परेशानी होती है.
मुंबई में अपना फ्लैट किराए पर देने वाले आकाश खुराना ने कहा, ”फैमिली को घर देने में कोई परेशानी नहीं है लेकिन जब आप युवाओं को घर देते हैं तो जरा सतर्क रहना पड़ता है. मैंने जिन लड़कियों को घर दिया, उन्हें साफ-साफ बता दिया कि उनकी फैमिली उनके साथ रह सकती है और कुछ दिनों के लिए दोस्त भी. लेकिन महीनों के लिए नहीं. यह आम है कि किसी भी शख्स का परिवार या दोस्त होंगे ही. जब तक किरायेदार कोई बखेड़ा न खड़ा करे तब तक मकानमालिक एक शख्स को सहनशील रहना ही पड़ता है.”
झगड़े से बचने के लिए मकानमालिक को किरायेदार को किरायेदारी समझौते के सारे नियम बता देने चाहिए. दोनों पार्टियों को इसे कानूनी तौर पर रजिस्टर कराना चाहिए. समझौते में किसी तरह के छिपे हुए क्लॉज नहीं होने चाहिए. अगर बेवजह मेहमानों के आने पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है तो किरायेदार को शिकायत दर्ज करानी चाहिए.

इन तरीकों से मेहमानों पर किरायेदार और मकानमालिक झगड़े से बच सकते हैं:

*हाउसिंग सोसाइटी द्वारा तय किए गए सभी क्लॉज और प्रतिबंधों के बारे में मकानमालिक को किरायेदार को बताना चाहिए.
*किरायेदार और उसके रिश्तेदार/मेहमानों को सोसाइटी की पॉलिसी और रेग्युलेशन का पालन करना चाहिए.
*कोई भी पार्टी अपनी मांग दूसरों पर नहीं थोप सकती. नियमों पर दोनों पक्षों की सहमति होनी चाहिए.
*किरायेदार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे या उनके मेहमान किसी पड़ोसी को परेशान न करें.
Was this article useful?
  • 😃 (0)
  • 😐 (1)
  • 😔 (0)

Comments

comments