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प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के दौरान बचने योग्य सामान्य गलतियाँ

Common mistakes to avoid during property registration

किसी संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण के बाद मालिक के लिए एक कानूनी दायित्व पूरा करना आवश्यक होता है — संपत्ति का रजिस्ट्रेशन। रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 17 के अनुसार, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें बिक्री विलेख (Sale Deed) जैसे संपत्ति दस्तावेजों को स्थानीय सरकारी प्राधिकरण के पास पंजीकृत कराया जाता है। इससे लेनदेन को कानूनी मान्यता मिलती है और पंजीकृत दस्तावेज स्वामित्व के प्रमाण के रूप में कार्य करते हैं, जिससे संपत्ति विवादों से बचाव होता है।

खरीदारों को प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बहुत सावधानी से पूरा करना चाहिए। खरीदार की किसी गलती या अधिकारियों द्वारा दर्ज जानकारी में त्रुटि के कारण स्वामित्व संबंधी समस्याएं, कानूनी जटिलताएं और जुर्माने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, सरकार ऐसी त्रुटियों को सुधारने की सुविधा भी प्रदान करती है। इस लेख में हम प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान होने वाली सामान्य गलतियों और उनसे बचने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं।

#1. टाइटल और स्वामित्व इतिहास की जांच न करना

किसी घर को खरीदने की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना सबसे शुरुआती कदमों में से एक है कि संपत्ति का टाइटल स्पष्ट हो। स्पष्ट टाइटल वाली संपत्ति पर कोई बंधक, दावा, ऋण या स्वामित्व विवाद नहीं होता। ऐसी संपत्ति का स्वामित्व बिक्री या किसी अन्य माध्यम से आसानी से हस्तांतरित किया जा सकता है।

कई खरीदार संपत्ति के टाइटल और स्वामित्व इतिहास की जांच को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण उन्हें कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संपत्ति के टाइटल की जांच न करने पर खरीदार को निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

खरीदारों को मदर डीड (Mother Deed) की जांच करनी चाहिए, जिसमें संपत्ति के पूरे स्वामित्व इतिहास का रिकॉर्ड होता है। इसके अलावा, एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate), मूल बिक्री विलेख, बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, प्रॉपर्टी टैक्स रसीद आदि दस्तावेज भी जांचने जरूरी हैं।

#2. कानूनी ड्यू डिलिजेंस को नजरअंदाज करना

प्रॉपर्टी खरीदते समय कानूनी ड्यू डिलिजेंस बेहद जरूरी होती है। इसमें सिर्फ टाइटल और स्वामित्व की जांच ही नहीं, बल्कि संपत्ति निरीक्षण, सरकारी नियमों के अनुपालन की जांच और RERA रजिस्ट्रेशन सत्यापन भी शामिल होते हैं।

अधिकांश खरीदार घर खरीदते समय वकील की आवश्यकता को नहीं समझते। एक अनुभवी प्रॉपर्टी वकील दस्तावेजों की जांच से लेकर भुगतान और बिक्री के बाद की प्रक्रियाओं तक हर चरण में खरीदार की सहायता कर सकता है।

सभी आवश्यक अनुमोदन और संबंधित प्राधिकरणों से एनओसी (NOC) सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। स्वीकृत भवन योजना, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज सरकारी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हैं।

वकील संपत्ति दस्तावेजों की जांच कर संभावित धोखाधड़ी से बचाने में मदद कर सकते हैं। वे विक्रेता की पहचान सत्यापित करने में भी सहायता करते हैं। यदि विक्रेता ने लेनदेन के लिए किसी अन्य व्यक्ति को अधिकृत किया है, तो वकील पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) की जांच करेंगे। वहीं, विरासत में मिली संपत्तियों में कानूनी जोखिम अधिक होते हैं, इसलिए कानूनी सहायता लेना समझदारी है।

#3. कानूनी समस्याओं और संपत्ति विवादों के लिए तैयार न रहना

प्रॉपर्टी खरीदते समय, विशेषकर रीसेल प्रॉपर्टी के मामले में, खरीदारों को यह जांचना चाहिए कि कहीं सह-मालिकों के बीच कोई विवाद या दावे की संभावना तो नहीं है। ऐसी स्थिति विरासत में मिली संपत्ति, तलाक या पारिवारिक बंटवारे वाली संपत्ति में उत्पन्न हो सकती है।

यदि कानूनी उत्तराधिकारियों या सह-मालिकों ने संपत्ति हस्तांतरण के लिए सहमति नहीं दी है, तो भविष्य में विवाद हो सकते हैं। इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी हो सकती है। इसलिए खरीदारों को उत्तराधिकार संबंधी विवरण और संपत्ति पर अधिकार रखने वाले नाबालिगों की जानकारी भी जांचनी चाहिए।

#4. अधूरे या गलत दस्तावेज

जरूरी दस्तावेजों की कमी से प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी या समस्या हो सकती है। खरीदारों को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में निम्न दस्तावेज साथ ले जाने चाहिए:

खरीदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी जानकारी सही हो। दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग अलग होना, हस्ताक्षर संबंधी त्रुटियां या प्लॉट नंबर जैसी गलत जानकारी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। ऐसी त्रुटियों को सुधारने के लिए रेक्टिफिकेशन डीड (Rectification Deed) की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

विरासत में मिली संपत्ति के मामले में वसीयत (Will) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। बिना रजिस्टर्ड वसीयत कानूनी रूप से मान्य हो सकती है, लेकिन इसे कानूनी उत्तराधिकारी चुनौती दे सकते हैं। इसलिए खरीदारों को अदालत द्वारा जारी प्रोबेट (Probate) पर जोर देना चाहिए।

#5. सर्वे और सीमा सत्यापन को नजरअंदाज करना

संपत्ति विवादों का एक सामान्य कारण सीमाओं की स्पष्ट जानकारी का अभाव है। प्रॉपर्टी सर्वे के जरिए संपत्ति की सीमाओं का निर्धारण किया जाता है, जिसमें ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी किया जाता है।

अधिकांश खरीदार आधिकारिक भूमि सर्वे रिकॉर्ड के साथ संपत्ति की वास्तविक सीमाओं का मिलान नहीं करते, जिससे स्वामित्व विवाद और कानूनी परेशानियां हो सकती हैं।

इसका समाधान आसान है। खरीदार सरकारी भूमि सर्वेक्षक से प्लॉट या संपत्ति का निरीक्षण करवा सकते हैं और सर्वे नंबर के अनुसार विवरण सत्यापित कर सकते हैं। इससे अतिक्रमण, क्षेत्रफल या नक्शे में अंतर जैसी समस्याओं की पहचान हो जाती है।

#6. प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन लागत का अनुमान न लगाना

प्रॉपर्टी खरीदते समय खरीदार को कई प्रकार की लागत वहन करनी पड़ती है। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क कुल खरीद लागत का बड़ा हिस्सा होते हैं। ये शुल्क राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकते हैं।

ये शुल्क संपत्ति के मूल्य, यानी सर्कल रेट/रेडी रेकनर रेट या बिक्री मूल्य पर आधारित होते हैं। इसलिए खरीदार द्वारा वहन की जाने वाली लागत संपत्ति की कीमत पर निर्भर करती है। इन लागतों का सही अनुमान न लगाने से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

समझदार खरीदार को उस क्षेत्र के नवीनतम सर्कल रेट या रेडी रेकनर रेट की जानकारी होनी चाहिए जहां वह संपत्ति खरीदना चाहता है। साथ ही, पहले से ही रजिस्ट्रेशन लागत का अनुमान लगाना जरूरी है।

#7. प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से बचना या उसमें देरी करना

अधिकांश सरकारी प्रक्रियाओं की तरह प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की भी एक निश्चित समय सीमा होती है। सामान्यतः बिक्री विलेख निष्पादित होने की तारीख से चार महीने के भीतर संपत्ति का रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेना चाहिए।

रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अनुसार खरीदार को निर्धारित समय सीमा के भीतर संपत्ति का पंजीकरण कराना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद ही खरीदार को कानूनी मालिक माना जाता है। यदि खरीदार इस कानूनी आवश्यकता का पालन नहीं करता, तो उसे कानूनी स्वामित्व खोने, होम लोन अस्वीकृत होने और जुर्माने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के तहत खरीदार को विक्रेता और गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ता है। वहां बायोमेट्रिक सत्यापन सहित कई प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इसलिए अंतिम समय की परेशानी से बचने के लिए पूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है।

निष्कर्ष

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन किसी संपत्ति लेनदेन को कानूनी मान्यता देता है और खरीदार को संपत्ति पर कानूनी स्वामित्व प्रदान करता है। बड़ी गलतियों से लेकर छोटी चूकों तक, खरीदारों को उन सभी बातों के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहिए जिनसे बचना जरूरी है।

सिर्फ रियल एस्टेट एजेंट्स पर पूरी तरह निर्भर रहना उचित नहीं है। दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताओं में खरीदार की व्यक्तिगत भागीदारी जरूरी है। इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद खरीदारों को पंजीकृत दस्तावेजों की फिजिकल और डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखनी चाहिए, जिसमें सभी रसीदें भी शामिल हों। ये रिकॉर्ड भविष्य में लोन आवेदन और संपत्ति बेचने जैसी प्रक्रियाओं में काम आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के दौरान खरीदारों को किन सामान्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के दौरान खरीदारों को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी का अभाव, अधूरे दस्तावेज और गलत जानकारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे अक्सर देरी होती है।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सुचारु और त्रुटिरहित कैसे बनाया जा सकता है?

संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करें, वकील की सहायता से कानूनी ड्यू डिलिजेंस कराएं और पहले से रजिस्ट्रेशन लागत का अनुमान लगाएं।

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