रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डिवेलपमेंट एक्ट के तहत एेसे दर्ज कराएं शिकायत

क्या रियल एस्टेट अधिनियम परेशान घर ग्राहकों के काम आसान करके मनमाना रवैया अपना चुके बिल्डरों पर एक्शन लेगा? आज हम आपको बता रहे हैं कि रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डिवेलपमेंट एक्ट (RERA) में शिकायत दर्ज कराने की क्या प्रक्रिया है और RERA अन्य उपभोक्ता संरक्षण कानूनों की तुलना में अलग कैसे है।
रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डिवेलपमेंट एक्ट (RERA) के लागू होने के बाद घर खरीददारों को उम्मीद है कि नया कानून उनके हितों की रक्षा करेगा। लेकिन सवाल यह है, क्या लोग जानते हैं कि नए RERA कानूनों के तहत शिकायत दर्ज कराने की क्या प्रक्रिया है।
आरआईसीएस के पॉलिसी हेड दिग्बिजॉय भौमिक ने कहा, रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट 2016 के सेक्शन 31 के तहत रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी या निर्णायक अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऐसी शिकायतें प्रमोटरों, आवंटियों या रियल एस्टेट एजेंटों के खिलाफ हो सकती हैं। ज्यादातर राज्यों के नियमों में RERA को अपरिवर्तनीय बनाया गया है, जिसमें फॉर्म और प्रक्रिया है। इसके तहत आवेदन किया जा सकता है। चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश या उत्तर प्रदेश के मामले में इन्हें फॉर्म एम या फॉर्म एन कहा गया है। (ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मामलों में भी एेसा ही है)

राज्यों के RERA के तहत शिकायतें तय फॉर्म के रूप में होनी चाहिए। RERA के तहत पंजीकृत प्रोजेक्ट अगर नियमों का उल्लंघन करते हैं तो तय समय सीमा के भीतर उनके खिलाफ इस कानून के प्रावधानों के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

RERA के तहत एेसे कराएं शिकायत दर्ज:

हरियानी एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर अमीत हरियानी ने कहा, जहां तक महाराष्ट्र का सवाल है तो RERA प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज कराने के नियमों को नोटिफाई कर दिया गया है। अगर किसी शख्स का किसी प्रोजेक्ट में हित है तो वह RERA अथॉरिटी के पास आवेदन दर्ज करा सकता है। वह शख्स उपलब्ध फॉर्मेट में आवेदन दाखिल कर सकता है। शिकायतकर्ता को ये चीजें देनी होंगी-
  • आवेदक और प्रतिवादी का विवरण।
  • प्रोजेक्ट का पता और रजिस्ट्रेशन नंबर।
  • तथ्यों और दावों के आधार पर एक संक्षिप्त विवरण।
  • राहत और अंतरिम राहत, अगर है तो…
RERA के तहत निर्णायक अधिकारी के सामने मुआवजे की शुरुआती सुनवाई होने से पहले शिकायतकर्ता को इसी तरह की एप्लिकेशन फाइल करनी पड़ेगी। हरियानी ने कहा कि आवेदन निर्धारित प्रारूप में होना चाहिए, साथ ही इसमें वह सभी विवरण होने चाहिए जो RERA प्राधिकरण चाहता है।

NCDRC के तहत लंबित मामलों का क्या होगा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NDRC) में अंतिम निर्णय आने में काफी वक्त लग जाता है, क्योंकि कमिशन के पास मामलों की लंबी फेहरिस्त है। रियल एस्टेट एक्ट जल्द मामलों का निपटारा कर एनसीडीआरसी से ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। RERA में सेक्शन 12, 14, 18 और 19 के तहत मुआवजे पर आदेश दिया जाता है।
एसएनजी एंड पार्टनर्स लॉ फर्म में पार्टनर अजय मोंगा ने कहा, ”जिन लोगों ने एनसीडीआरसी में शिकायतें दर्ज कराई हैं, वह उन्हें वापस लेकर RERA में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अन्य अपराध (धारा 12, 14, 18 और 19 के तहत शिकायतें छोड़कर) RERA प्राधिकरण के सामने दायर की जा सकती हैं”।

RERA में इतने समय में निपटेगा मामला:

रियल एस्टेट कानून में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई समयावधि नहीं है। लेकिन एक शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं होना चाहिए। हरियानी ने कहा, RERA के तहत शिकायतकर्ताओं को सीमा अधिनियम, 1963 में निर्धारित कार्यवाही की शुरुआत के लिए समय अवधि का पालन करना पड़ेगा। इस कानून के तहत समयावधि खास दावों पर निर्भर करेगी। तुरंत अंतरिम राहत पाने के लिए शिकायत के कारण होने वाली कार्रवाई के बाद RERA अथॉरिटी से गुहार लगाने को कहा जाता है।

RERA के तहत शिकायत दर्ज कराने के फायदे:

  • मामलों का जल्दी निपटारा हो सकता है।
  • प्रमोटरों द्वारा वित्तीय अनुशासन की जरूरत।
  • पारदर्शिता।
  • देरी होने पर प्रोमोटरों को मुआवजा देना होगा।
  • अपील करने की एक जगह है।
Was this article useful?
  • 😃 (1)
  • 😐 (0)
  • 😔 (1)

Comments

comments