क्या खराब वास्तु के कारण अच्छी प्रॉपर्टी छोड़ देनी चाहिए? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अगर प्रॉपर्टी घर खरीदने वाले की जरूरत पूरी करती है तो किस हद तक वास्तु जरूरी होता है. आज हम वास्तु के सिद्धांतों और उपायों के बारे में बताएंगे ताकि घर ग्राहक सही नतीजे पर पहुंच सकें.
फर्ज कीजिए. लंबी तलाश के बाद आपको किसी प्रॉपर्टी पर शानदार ऑफर मिलता है. लेकिन प्रॉपर्टी वास्तु के सिद्धांतों के मुताबिक नहीं है. तो क्या आपको उस ऑफर को अस्वीकार कर देना चाहिए? यह ऐसी स्थिति होती है, जिससे कई घर ग्राहकों को जूझना पड़ता है. ऐसे में कुछ ग्राहक खराब वास्तु के बावजूद प्रॉपर्टी खरीद लेते हैं जबकि कुछ ऑफर रिजेक्ट कर देते हैं. तो सवाल उठता है कि किस हद तक वास्तु शास्त्र जरूरी है?

वास्तु शास्त्र को वास्तुकला का विज्ञान कहा जाता है. इसके सिद्धांतों का पालन भारत में सदियों से हो रहा है. इसमें कई हिंदू मान्यताएं शामिल हैं. साथ ही डिजाइन का मकसद स्ट्रक्चर्स और जियोमेट्रिक पैटर्न्स के कार्यात्मक पहलुओं को एकीकृत करना है, जिसमें प्रकृति के अलावा सूर्य और हवा जैसी ताकतें शामिल हैं.
एआरडी स्टूडियो के फाउंडर रिकी दोषी ने कहा, ”हमारी संस्कृति में वास्तु का बहुत महत्व है. घर या प्रॉपर्टी खरीदते वक्त बुनियादी वास्तु जरूर चेक कर लेना चाहिए. यह भी समझना जरूरी है कि वास्तु के सभी सिद्धांत प्रॉपर्टी में नहीं हो सकते. लेकिन इस विज्ञान में कुछ ऐसे तरीके और उपाय हैं, जो ज्यादातर समस्याओं को हल कर सकते हैं.”

किन वास्तु दोषों से मकानमालिकों को बचना चाहिए:

एक्सपर्ट्स के मुताबिक वास्तु दोष हर प्रॉपर्टी या घर में मौजूद हैं. ध्यान देने वाली जरूरी बात है कि क्या वास्तु-संगत पहलू खामियों को दूर करते हैं. लिहाजा अगर आपको अच्छा ऑफर मिला है तो उसे स्वीकार करें क्योंकि वास्तु दोषों को ठीक किया जा सकता है. वास्तु शास्त्र हमेशा इस्तेमाल करने वाले को फायदा पहुंचाने के लिए है. इसे प्रगति और विफलता के लिए निर्णय प्रक्रिया नहीं बनाना चाहिए.
दूसरी ओर, किसी प्रॉपर्टी पर ऑफर या छूट इतनी आकर्षक हो सकती है यह शॉर्ट टर्म में वास्तु दोषों के प्रभाव को कम कर दे. लेकिन लॉन्ग टर्म में दोषों के कारण नकारात्मकता और असामंजस्य पैदा हो सकता है. लेकिन कुछ बुनियादी दोष होते हैं, जिससे घर खरीदने वालों को बचना चाहिए. ये हैं:
  • प्रॉपर्टी का मुंह साउथ-वेस्ट दिशा में नहीं होना चाहिए.
  • कंस्ट्रक्शन में कोई कट नहीं होना चाहिए खासकर नॉर्थ-ईस्ट या साउथ-वेस्ट दिशा में. जिस जमीन पर प्रॉपर्टी हो, वह चौकोर आकार में होना चाहिए.
  • बाथरूम और किचन नॉर्थ-ईस्ट दिशा में नहीं होने चाहिए.

आम वास्तु दोषों के लिए सुधार:

वास्तु शास्त्र का इस्तेमाल रहन-सहन सुधारने के लिए किया जाता है. लेकिन निजी जिंदगी में नाकाम होने के लिए वास्तु दोषों को जिम्मेदार ठहराना बेतुका है. ऐसी कोई प्रॉपर्टी नहीं, जो 100 प्रतिशत वास्तु शास्त्र के मुताबिक हो.  A2ZVastu.com के सीईओ और फाउंडर विकास सेठी ने कहा, अगर किसी वास्तु दोष के साथ आप कोई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो फिर संपत्ति पर छूट के खिलाफ सुधार लागत का मूल्यांकन करें, यह तय करने के लिए कि आपको इसे खरीदना चाहिए या नहीं. अंतिम समीक्षा के लिए प्रॉपर्टी किसी नामी वास्तु एक्सपर्ट से चेक करवा लें.
एआरडी स्टूडियो के फाउंडर रिकी दोषी ने कहा, ”अगर किसी प्रॉपर्टी पर अच्छा ऑफर हो और उसमें वास्तु दोष हों तो सर्वश्रेष्ठ उपाय से ही खामियों से निपटना चाहिए.”
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