रिहायशी संपत्ति पर जीएसटी: जानिए नए टैक्स सिस्टम का प्रॉपर्टी खरीदने और उसे किराये पर देने का क्या असर होगा?


जीएसटी लागू होने के बाद राज्य और केंद्र सरकार में विभिन्न टैक्स हट गए हैं. इससे विभिन्न चरणों पर प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर भी असर पड़ेगा. आज हम बात करेंगे कि जीएसटी का संपत्तियों के मालिक और किराए पर देने पर क्या असर पड़ेगा.
गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी को लेकर मार्केट में हर कोई बात कर रहा है. ज्यादातर लोग इस बात को लेकर उधेड़बुन में हैं कि अलग-अलग बिजनेस पर यह किस तरह का असर डालेगा. रियल एस्टेट सेक्टर में लोगों को उम्मीद है कि इससे प्रॉपर्टी की कीमतों में कुछ राहत मिलेगी. उनका मानना है कि बिल्डर्स इनपुट कॉस्ट घटाकर इसका फायदा घर ग्राहकों को देंगे. इसके अलावा विभिन्न टैक्स भी हट जाएंगे और यह भविष्य में इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद रहेगा.
बीएमआर एंड असोसिएट्स एलएलपी, इनडायरेक्ट टैक्स, पार्टनर प्रशांत भट्ट ने कहा, ”घर खरीददारों पर बिल्डर्स प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले वैट और सर्विस टैक्स लगाते हैं. ये टैक्स अग्रीमेंट में लिखे होते हैं और ग्राहकों को इसके बारे में पता भी होता है. इसके अलावा गैर विश्वसनीय टैक्स जैसे सीवीडी, एसएडी, एक्साइज ड्यूटी, सीएसटी और एंट्री टैक्स भी यूनिट्स की बेस प्राइस में शामिल होते हैं. लेकिन ये टैक्स ग्राहकों को नजर नहीं आते. ऊपर बताए गए सभी टैक्स, चाहे वो प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष, उनका जीएसटी में समावेश हो जाएगा. लिहाजा घर खरीददारों को सिर्फ जीएसटी का ही भुगतान करना होगा”.
इसके बावजूद स्टैंप ड्यूटी लागू होगी, चाहे प्रॉपर्टी अंडर कंस्ट्रक्शन हो या बन चुकी हो. स्टैंप ड्यूटी जीएसटी से पहले भी लगती थी और उसके बाद भी लगेगी.
जीएसटी का किराए पर प्रभाव: बीडीओ इंडिया, इनडायरेक्ट टैक्स के पार्टनर और हेड अमित सरकार ने बताया कि बिक्री कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल करने या फर्स्ट ऑक्युपेंसी से पहले की गई है तो बिल्डर के पास इनपुट का सेट ऑफ/केडिट उपलब्ध होगा. लेकिन अगर बिल्डर ने प्रॉपर्टी को किराये पर देने का मन बनाया है तो क्रेडिट नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा, हमें कमर्शियल किराए में इजाफा देखने को मिल सकता है.
जिस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल रहने के लिए हो रहा है, उसके किराये पर जीएसटी लगाया जाएगा. इसी तरह किरायेदारों को भी जीएसटी सिस्टम के तहत ज्यादा किराया चुकाना होगा क्योंकि मौजूदा सिस्टम में रिहायशी प्रॉपर्टीज पर कोई सर्विस टैक्स लागू नहीं होगा.

प्रॉपर्टीज पर लगाए जाने वाले टैक्स पर जीएसटी कैसा असर डालेगा?

आवासीय निर्माण सेवाओं पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा. यह उस वक्त लागू होगा, जब बिल्डर्स खरीददारों को कंस्ट्रक्शन पूरा होने से पहले मकान बेच देंगे. जब कोई आज कीमतों में लागू टैक्स की लागत को कैलकुलेट करता है (दोनों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स) तो कुल मिलाकर टैक्स का असर आज की तुलना में कम हो सकता है. लिहाजा, अगर बिल्डर क्रेडिट का पूरा फायदा देकर बेस प्राइज को कम करते हैं तो घर खरीददारों को जीएसटी सिस्टम के तहत को आंशिक फायदा मिल सकता है.
होम लोन पर जीएसटी का प्रभाव: होम लोन पर जीएसटी के प्रभाव बताते हुए एक्सपर्ट कहते हैं कि फाइनेंशियल सर्विसेज पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा. लिहाजा लोन प्रोसेसिंग चार्ज जीएसटी में बढ़ सकता है. मौजूदा सिस्टम की तरह जीएसटी का शुल्क हमेशा खरीदार के हाथ में रहता है.
किफायती आवास पर जीएसटी की प्रयोज्यता: यह भी समझना बेहद जरूरी है कि अगर किफायती आवास प्रोजेक्ट्स तक जीएसटी का विस्तार किया गया (किफायती आवास फिलहाल सर्विस टैक्स के बाहर हैं और यह जीएसटी के दायरे से बाहर हैं या नहीं, इस पर सरकार की सफाई आनी बाकी है) तो मकान सस्ते हो सकते हैं.
Was this article useful?
  • 😃 (0)
  • 😐 (0)
  • 😔 (0)

Comments

comments