नीलाम होने वाली संपत्ति खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान, वरना पछताते रह जाएंगे


नीलाम होने वाली/हो चुकी संपत्ति में निवेश करना थोड़ा जोखिम भरा है, जिसे खरीदने से पहले बारीकी से जांच कर लेनी चाहिए। यह फैसला लेते वक्त इन बातों का ध्यान जरूर रखें।
अगर घर का मालिक होम लोन नहीं चुका पाता तो कर्जदाता को कानूनी तौर पर संपत्ति को जब्त करने का अधिकार है। एेसी संपत्तियों को नीलाम कर दिया जाता है। इससे पहले कि आप नीलाम हो चुकी संपत्ति खरीदने का फैसला करें, इन सावधानियों को बरतना बेहद जरूरी है।

बकाया सोसाइटी और म्युनिसिपल टैक्स:

आमतौर पर होम लोन की ईएमआई के भुगतान में चूक होना किसी शख्स के पास आखिरी अॉप्शन होता है। इसलिए हो सकता है कि घर के मालिक ने स्थानीय टैक्स और सोसाइटी चार्ज भी न चुकाया हो। प्रॉपर्टी ‘जैसी है जहां है’ के आधार पर बेची जाती है, इसलिए यह संभावित खऱीददार की जिम्मेदारी है कि वह बकाया राशि का भुगतान करे। सोसाइटी चार्जेज और म्युनिसिपल टैक्स की बकाया राशि का पता जरूर करें, क्योंकि यह प्रॉपर्टी के मालिक द्वारा चुकाई जाती है। अगर आपको बकाया राशि की जानकारी नहीं है तो आपकी लागत बढ़ सकती है।

शीर्षक हासिल जरूर कर लें:

अगर नीलामी बैंक कर रहा है तो कानूनी शीर्षक बैंक के पास नहीं होगा। साथ ही शीर्षक की जिम्मेदारी बैंक नहीं लेगा, क्योंकि प्रॉपर्टी का पोजेशन लेने से वह उसका मालिक नहीं बन जाएगा। इसलिए अगर आप नीलामी वाली संपत्ति खरीद रहे हैं तो वकील की जांच-पड़ताल के बाद प्रॉपर्टी के शीर्षक का स्वामित्व हासिल करें। इससे आपका थोड़ा खर्चा होगा, लेकिन बाद की मुश्किलों से बचने के लिए पहले थोड़ा पैसा खर्च करना सही है।

फंड्स का इंतजाम:

अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी या रेडी टू मूव फ्लैट में पेमेंट शेड्यूल सुविधाजनक होता है और यह आपसी बातचीत के आधार पर तय होता है। लेकिन नीलामी के दौरान अगर प्रॉपर्टी के लिेए आपकी बोली कामयाबी हो जाती है तो बेहद कम समय में आपको पैसों का इंतजाम करना होगा। अगर आप नाकामयाब रहे तो जमा बकाया राशि खो सकते हैं। इसलिए एेसी खरीद से पहले फंड्स की प्लानिंग करना जरूरी है, जिसमें इमरजेंसी प्लान भी शामिल हो। एेसी प्रॉपर्टी के लिए आपको होम लोन भी मिल जाएगा, लेकिन आपको पहले नीलामी का पूरा पैसा अपने स्रोतों से अरेंज करना होगा। इसके बाद कर्जदाता आपको चेक जारी करेगा। अगर एेसी प्रॉपर्टी के लिए आपका होम लोन लेने का इरादा है तो अपनी आय के आधार पर आपको लोन की राशि के लिए एक अनुमोदन हासिल करना होगा।

खरीद विचार पर टीडीएस:

इनकम टैक्स के प्रावधानों के मुताबिक अगर प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 लाख को पार कर जाती है तो घर खरीददार को स्रोत पर 1 प्रतिशत टैक्स कटौती करनी होगी। यह उन संपत्तियों पर भी लागू होती है, जो नीलामी के जरिए खरीदी जाती हैं। भले ही आप बैंक से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं (जो संपत्ति का मालिक नहीं है), लेकिन टीडीएस कटेगा और असली मालिक के अकाउंट में क्रेडिट हो जाएगा। इसलिए आपको प्रॉपर्टी के असली मालिक की पैन डिेटेल्स हासिल करनी होगी, ताकि टीडीएस को पैन में क्रेडिट किया जा सके। अगर आपको मालिक की पैन डिटेल्स न मिले तो आपको 1% की निर्धारित दर के बजाय 20% पर टैक्स घटाना होगा। टीडीएस की राशि को बिक्री विचार का हिस्सा मानने के लिए आपको बैंक के साथ एक अग्रीमेंट करना होगा। अगर नीलामी करने वाला बैंक राजी नहीं होता तो आपकी खरीद की लागत इस 1 प्रतिशत से बढ़ जाएगी, जिसे आपको घटाना था। इस कारण प्रॉपर्टी के असली मालिक से टीडीएस की राशि रिकवर करना लगभग असंभव हो जाएगा। इस मामूली सावधानी से आप न सिर्फ आराम से नीलाम होने वाली संपत्ति खरीद सकते हैं, बल्कि सस्ती भी ले सकते हैं।
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