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अपनी भारतीय किचन में चिमनी लगवाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

आजकल लोग घर बनवाते समय घर के हर हिस्से पर अच्छी तरह से ध्यान देते हैं. अब पहले जैसा जमाना नहीं रहा जब लोग बिना सोचे समझे घर का इंटीरियर बनवा लेते थे. आजकल अच्छी तरह से इंटीरियर डिज़ाइनर की मदद से घर का कोना-कोना डिजाइन किया जाता है. भारतीय घरों में एक हिस्सा जो सबसे अहम माना जाता है वह है घर का किचन.

जी हां! किचन जहां पर पूरे घर वालों के लिए खाना बनाया जाता है, घर का एक ऐसा हिस्सा है जिसमें काफी ज्यादा समय बिताया जाता है. ऐसे में किचन का कंफर्टेबल होना तो महत्वपूर्ण है ही साथ ही किचन का इंटीरियर भी घर की तरह ही खूबसूरत होना बेहद जरूरी है.

पहले बनाए जाने वाले किचन में खाने से निकलने वाले धुएं के लिए निकासी के उतने तरीके नहीं होते थे और ज्यादातर इसके लिए किचन में एक एग्जॉस्ट फैन लगा दिया जाता था. लेकिन यह इतनी अच्छी तरह से काम नहीं कर पाता है और आप देखते हैं कि पुराने बने हुए किचन में कहीं-कहीं दीवारों पर लंबे समय में खाने से निकलने वाले धुएं से गंदगी जमा हो जाती थी. इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए आजकल किचन में चिमनी का इस्तेमाल किया जाता है.

चिमनी अच्छी तरह से किचन का सारा धुआं बाहर निकाल देती है. किचन में आप इंटीरियर और सुविधा के हिसाब से अलग-अलग तरह की चिमनियां लगवा सकते हैं. आज हम आपको भारतीय किचन के हिसाब से चिमनियों के कुछ डिजाइन बताने वाले हैं.

 

किचन चिमनी कैसे काम करती हैं?

किचन चिमनी के काम करने का तरीका बेहद सिंपल है.खाना बनाते समय स्मोक, तेल, या अन्य कई तरह की सुगंध पैदा हो जाती है. आपके किचन में लगी हुई चिमनी यह सारी तरह की गंध सोख लेती है और उसे किचन से बाहर निकाल देती है. इसके अलावा खाना बनाते समय जो भी ग्रीस बनता है वह चिमनी के फिल्टर में जमा हो जाता है. चिमनी, डक्ट या डक्टलेस हो सकती है. यह दोनों तरह की चिमनी अलग तरह से काम करती है.

 

डक्ट वाली चिमनी

जिस चिमनी में डक्ट होता है उसमें से धुआं और गैस पीवीसी पाइप्स की मदद से बाहर निकलता है. इन चिमनियों की खास बात यह है कि इन में मैश और बाफल फिल्टर लगा होता है, जो खाना पकाते समय धुएं के साथ उड़ने वाली चिकनाहट को भी सोख लेता है.

लेकिन यह चिमनी ज्यादातर बड़े किचन में ही लगाई जाती हैं क्योंकि इनमें लगने वाली पाइप की सेटिंग के लिए किचन में ज्यादा जगह की जरूरत पड़ती है. अगर आपका किचन बड़ा है और इसमें इस तरह की चिमनी को इंस्टॉल करने की पर्याप्त जगह है तभी आप इस चिमनी को खरीदे. वैसे बाजार में फ्लैक्सिबल डक्ट वाली चिमनियां भी उपलब्ध हैं, जिन के डक्ट को जरूरत के हिसाब से लगाया और निकाला जा सकता है. ऐसी चिमनियां छोटे किचन में भी लगाई जा सकती हैं।

 

डक्टलैस चिमनी

फैन और मोटर वाली चिमनी में ग्रीस फिल्टर लगे होते हैं, जिन से धुआं निकल कर चारकोल फिल्टर में जाता है। जहां ग्रीस फिल्टर चिकनाहट सोखने की क्षमता रखता है, वहीं चारकोल फिल्टर मसालों की महक को सोख कर रसोई को फ्रैश बनाए रखता है। लेकिन यह चिमनी रसोई की गरमाहट को खत्म नहीं कर पाती है और फिर इसमें लगे चारकोल फिल्टर को भी समय समय पर बदलवाना पड़ता है.

 

चिमनी के प्रकार

आप घर में अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से अलग अलग तरह की चिमनी लगा सकते हैं, इनमें से कुछ हैं;

 

 

बिल्ड इन चिमनी(Build in chimney)

 

अगर आप एक छोटे घर में रह रहे हैं या फिर आपके अपार्टमेंट्स में किचन का स्पेस ज्यादा बड़ा नहीं है तो आप बिल्ड इन चिमनी का इस्तेमाल कर सकते हैं.यह चिमनी दीवार में ही बनाई जाती है और आपके किचन में बहुत ज्यादा जगह नहीं लेती है. 

 

वाल माउंटेड चिमनी

 

यह एक तरह की इलेक्ट्रिकल चिमनी होती है और इसे दीवार पर ही लगाया जाता है. इस चिमनी की एक अच्छी बात यह है कि इसे आप अपनी गैस की लोकेशन के हिसाब से कहीं पर भी माउंट करवा सकते हैं. इसमें आपको गैस की लोकेशन बदलने की जरूरत नहीं होती है. अगर इसके प्राइस की बात की जाए तो यह 6000 की रेंज से लेकर 36000 की रेंज तक में आती है और आपके किचन को बेहद स्टाइलिश लुक देती है.

 

किनारे में लगाई जाने वाली चिमनी

 

 जैसा कि नाम से ही समझ में आ रहा है यह चिमनी किचन में एक कोने में लगाई जाती है. इसे ज्यादातर कॉर्नर चिमनी के नाम से जाना जाता है. अगर आपका किचन स्टोव कोने में है तो आप इस चिमनी को लगवा सकते हैं. इस तरह की चिमनी ज्यादातर बाहरी देशों में लगवाई जाती है और भारत में यह ज्यादा लोकप्रिय नहीं है.

 

आईलैंड चिमनी

 

सुनने में यह नाम आपको जरा अटपटा लग सकता है लेकिन यह चिमनी आईलैंड के डिजाइन पर ही बनाई गई है. जैसे आईलैंड समुद्र में बीचों-बीच होता है वैसे ही यह चिमनी किचन में छत पर बीचों-बीच लगाई जाती है. यह चिमनी छत से कनेक्ट होती है इसलिए यह किचन में किसी भी दीवार पर जगह नहीं लेती है और दिखने में भी बेहद आकर्षक लगती है. इस चिमनी की शुरुआती रेंज ₹30000 हैं. बाकी चिमनी के मुकाबले यह थोड़ी महंगी है. अगर आपका किचन स्पेस बड़ा है और आप 4 से 6 बर्नर की गैस इस्तेमाल करने वाले हैं तो यह चिमनी आपके किचन के लिए एकदम परफेक्ट है.

 

किचन चिमनी में फिल्टर क्या होता है?

जैसा कि बताया गया है चिमनी के फिल्टर में ग्रीस जमा हो जाता है इसलिए इसे समय-समय पर साफ करना जरूरी होता है. किचन की चिमनी में सामान्यत तीन तरह के फिल्टर लगाए जाते हैं.

 

  1. मैश फिल्टर 

एलुमिनियम लेयर से बने हुए यह फिल्टर किचन में बनने वाले स्मोक से ग्रीस और तेल को अलग करता है. इस फिल्टर को आप को 7 से 10 दिन में साफ करना जरूरी है. अगर भारतीय किचन की बात की जाए तो यहां पर यह फिल्टर उतने कारगर साबित नहीं होते हैं. इसके अलावा इस फिल्टर से बाकी फिल्टर के मुकाबले आवाज ज्यादा आती है.यह फिल्टर सस्ता तो है लेकिन भारतीय कुकिंग के लिए टिकाऊ नहीं माना जाता है.

 

  1. बाफल फिल्टर 

बाफल फिल्टर टेलर स्टील से बना होता है और इसका काम लगभग मैश फिल्टर से ही मिलता जुलता है. एक चीज जो इसे मैश फ़िल्टर से अलग करती है वह है कि इसे आपको हर हफ्ते साफ करने की जरूरत नहीं है. आप इस्पेक्टर को 1 महीने में एक बार साफ कर सकते हैं. भारतीय कुकिंग के लिए भी यह एक अच्छा ऑप्शन है. इसमें आवाज कम आती है और यह भारतीय कुकिंग के लिए टिकाऊ है.

 

  1. कोयले का फिल्टर 

चारकोल से बने इस फिल्टर में छोटे-छोटे छेद होते हैं जो धुएं को सोख लेते हैं. यह फिल्टर भारतीय किचन के लिए सबसे बेहतरीन माना गया है. इस फिल्टर को साफ नहीं किया जा सकता है और इसे हर तीन चार महीने में बदलवा ना पड़ता है. यह बाकी फ़िल्टर के मुकाबले एक महंगा विकल्प है लेकिन यह भारतीय किचन के लिए सही तरह से काम करता है.

 

भारतीय किचन के लिए कुछ अच्छी किचन चिमनी

आइए जानते हैं कि अगर आप अपने किचन के लिए चिमनी लेना चाहते हैं तो बाजार में कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं;

 

भारतीय रसोई के हिसाब से यह चिमनी बहुत अच्छी तरह से काम करती है. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय रसोई में इस तरह का खाना बनाया जाता है जिसमें तेल का इस्तेमाल थोड़ा ज्यादा रहता है और मसालों आदि की गंध  भी रहती है. इस चिमनी में एक शक्तिशाली मोटर लगी  है जिसमें 1100 m3 / hr की सक्शन क्षमता है. इसका डिजाइन भी बेहद आकर्षक बनाया गया है और साथ ही इसमें एलईडी लाइट्स देख लगी होती है जिसकी मदद से आप कम लाइट में भी काम कर सकते हैं. 

इस चिमनी को दीवार पर भी लगाया जा सकता है और इस तरह से यह छोटे किचन में भी कारगर रहती है. इसके अलावा यह बहुत ज्यादा आवाज भी नहीं करती हैं जो इसे लोगों के बीच में लोकप्रिय बनाता है.

 

फैबर कंपनी का यह मॉडल 1200m3 / hr की सक्शन पावर के साथ आता है जो तेल, ग्रीस, धुआं और अन्य गैसों को किचन चिमनी के द्वारा बाहर निकालता है.इसकी मोटर की शिक्षण पावर ज्यादा होती है इसलिए यह बहुत ज्यादा शोर भी नहीं करता है. इस चिमनी की एक खास बात यह है कि इसमें ऑटोक्लीन की सुविधा दी गई है. इसमें आपको बार-बार चिमनी की सफाई नहीं करनी पड़ती है. आप केवल एक बार क्लिक करते हुए चिमनी को ऑटो क्लीन कर सकते हैं. ऑटो-क्लीन सुविधा के द्वारा  एक कलेक्टर कैन में तेल, ग्रीस और अन्य अवशेषों को इकठ्ठा कर देता है. 

 

यह चिमनी खासतौर पर भारतीय किचन के लिए बहुत ज्यादा सुविधाजनक है. अगर आप सिर्फ दो बर्नर वाली गैस इस्तेमाल कर रहे हैं तो भी यह चिमनी बहुत कारगर रहती है. इस चिमनी में भी एलिका चिमनी की तरह एलईडी लाइट्स दी गई है जो इस पर काम करना बेहद सुविधाजनक बना देता है.इसके अलावा इस चिमनी में आपको लगभग 1 साल की गारंटी भी दी जाती है.

 

चिमनी की देखभाल कैसे करें

इस तरह से आप अपने किचन में चिमनी की देखरेख कर सकते हैं और अपने किचन को एकदम साफ सुथरा रख सकते हैं.

 

FAQs

चिमनी में मिलने वाले अलग-अलग फिल्टर कौन से हैं?

चिमनी में मैश, बाफल और कोयला फ़िल्टर मिलते हैं.

क्या चिमनी के फिल्टर को हर रोज साफ करना पड़ता है?

चिमनी के फिल्टर को हर रोज साफ करने की जरूरत नहीं है. इसे 7 से 10 दिन में साफ किया जाता है या फिर कुछ ऐसी चिमनी भी आती हैं जिनके फिल्टर को साफ करना संभव नहीं है और उन्हें तीन से चार महीने के अंतराल में बदलवाना पड़ता है.

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