विरासत में मिली संपत्ति की बिक्री पर एेसे लगेगा टैक्स


विरासत में मिली संपत्ति और पूंजीगत लाभ पर इनकम टैक्स के प्रावधान उस प्रॉपर्टी से अलग होंगे, जो अन्य तरीकों जैसे एकमुश्त खरीद से हासिल की गई है
विरासत में मिली संपत्ति की बिक्री पर लगने वाले टैक्स में काफी कन्फ्यूजन है। कुछ लोग सोचते हैं कि विरासत में मिली संपत्ति को बेचने से मिली राशि पूरी तरह से टैक्स फ्री है, जबकि अन्य मानते हैं कि इस पर टैक्स लगता है। असल में विरासत में मिली संपत्ति पर कोई टैक्स देयता नहीं है। हालांकि विरासत की संपत्ति को बेचने पर हुए फायदे कैपिटल गेन्स की तरह ही टैक्सेबल हैं।

पूंजीगत लाभ की गणना:

कैपिटल गेन्स शॉर्ट टर्म भी हो सकते हैं और लॉन्ग टर्म भी। यह निर्भर करता है कि संपत्ति कितने समय तक आपके पास थी। अगर विरासत में मिली संपत्ति 36 महीनों से ज्यादा तक आपके पास थी तो उसे दीर्घकालिक संपत्ति (लॉन्ग टर्म) माना जाएगा। 36 महीने की अवधि में सिर्फ यही देखा नहीं जाएगा कि संपत्ति आपके पास कितने वक्त तक थी बल्कि पुराने मालिक के पास भी यह कितने वक्त तक थी, यह भी देखा जाएगा।
36 महीने से कम की अवधि के लिए, अधिग्रहण की वास्तविक और सुधार की लागत को शॉर्ट टर्म फायदा माना जाएगा और आपके लिए लागू स्लैब दर लगाया जाएगा। अगर संयु्क्त धारण अवधि (Combined Holding Period) 36 महीने से ज्यादा है तो आपको अधिग्रहण और सुधार की लागत में कटौती करने का अधिकार मिलता है, जिसे कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स मल्टीप्लायर द्वारा बढ़ाया गया है। कॉस्ट इन्फ्लेशन मल्टीप्लायर की गणना, कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के खरीद और बिक्री के साल पर आधारित होती है।
अधिग्रहण की लागत वह राशि होगी जो घर की खरीद के लिए पिछले मालिकों ने चुकाई होगी। उदाहरण के लिए, फर्ज कीजिए आपको अपने पिता से संपत्ति मिली है और उन्हें अपने पिता से। अगर आपके दादाजी ने 50000 रुपये में घर खरीदा है तो पूंजीगत लाभ के लिए अधिग्रहण की आपकी लागत 50,000 रुपये होगी। अगर घर 1 अप्रैल,1981 से पहले विरासत में मिला है तो आप उचित बाजार मूल्य का विकल्प ले सकते हैं, जो अधिग्रहण की लागत के लिए 1 अप्रैल, 1981 को था। इसी वैल्यू पर आप कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्ट मल्टीप्लायर अप्लाई कर सकते हैं।
अगर संपत्ति आपको 1 अप्रैल, 1981 के बाद मिली है तो आपको अधिग्रहण की लागत के रूप में 50,000 रुपये पर विचार करना होगा। इनकम टैक्स के सख्त प्रावधानों के मुताबिक आप उस वर्ष के संदर्भ में इंडेक्शन का फायदा उठा सकते हैं, जिसमें  आपको संपत्ति को विरासत में मिली है, उससे पहले नहीं। हालांकि विरासत में मिली संपत्ति के संदर्भ में दिल्ली, मुंबई और गुजरात हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर 1 अप्रैल, 1981 के बाद संपत्ति अधिग्रहित की गई है तो टैक्सपेयर उस वर्ष से सूचीकरण फायदे ले सकता है, जिसमें पिछले मालिक ने भुगतान किया। अगर संपत्ति 1 अप्रैल, 1981 से पहले खरीदी गई है तो आप अधिग्रहण की लागत के लिए 1 अप्रैल, 1981 को बाजार मूल्य की जगह ले सकते हैं। और इसी तारीख से सूचीकण फायदे हासिल कर सकते हैं, भले ही आपको बाद में यह विरासत में मिला हो।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में कटौती:

दीर्घकालिक परिसंपत्तियों (Long Term Asset) में आपके पास टैक्स बचाने के दो विकल्प हैं। आप या तो कैपिटल गेन्स दो वर्षों के भीतर एक घर को खरीदने में निवेश कर सकते हैं या तीन वर्षों के भीतर एक घर का निर्माण करा सकते हैं। इसके अलावा आप इसके संचय के छह महीने 50 लाख रुपये तक के कैपिटल गेन्स NHAI या REC के बॉन्ड्स में निवेश कर सकते हैं।

2017 के बजट प्रस्तावों का प्रभाव:

रेडी हाउस की बिक्री के मामले में 2017 के बजट में लॉन्ग टर्म होल्डिंग पीरियड को मौजूदा 36 महीने से घटाकर 24 महीने करने का प्रस्ताव है। बजट में उचित बाजार मूल्य लेने के विकल्प को 1 अप्रैल, 1981 से 1 अप्रैल 2001 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। ये परिवर्तन किसी भी बदलाव के अधीन हैं, जो संसद में पारित होने से पहले प्रस्ताव में किए जा सकते हैं।
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