दिल्ली के एल-जोन में निवेश करने के ये हैं फायदे और जोखिम


दिल्ली का अपकमिंग एल जोन लुभावनी कीमतों के जरिए अहम रिहायशी इलाके के तौर पर उभर सकता है, लेकिन इसके साथ आने वाले रिस्क आपके निवेश प्लान पर पानी फेर सकते हैं
इस वक्त मार्केट में बिन बिके फ्लैट्स की भरमार है. एेसे में नए इलाके में निवेश करने के अपने ही जोखिम हैं, जैसे प्रोजेक्ट्स का पूरा न हो पाना, डिलीवरी में देरी और बुनियादी सामाजिक ढांचे का आभाव। दिल्ली का एल-जोन एेसा ही इलाका है। लेकिन इतनी परेशानियों के बावजूद यह निवेशकों और खरीददारों को लुभा रहा है.
ग्लोबल प्रॉपर्टी कंसलटिंग फर्म के सीईओ अॉपरेशंस एंड इंटरनेशनल डायरेक्टर संतोष कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एेसी कई जगह हैं, जिनका रुख करने से ग्राहकों को बचना चाहिए. उन्होंने कहा, डिलीवरी में देरी, ओवरसप्लाई, अटकलें और ढांचे में कमी इस मार्केट को खोखला कर रही हैं. पहली बार घर लेने वालों के लिए यह सही नहीं है. उन्होंने कहा, एल-जोन का पेरिफेरल इलाके को लेकर कई अटकलें हैं और ग्राहकों को इससे बचना चाहिए। यहां भूमि आरक्षण और सीमाओं को लेकर भी काफी असमंजस है।
पड़ोस के द्वारका एक्सप्रेस वे में औसत कीमत 4600 प्रति स्क्वेयर फुट और द्वारका में 8,600 प्रति स्क्वेयर फुट है. एल-जोन के कुछ प्रोजेक्ट्स में कीमतों की तुलना द्वारका से हो रही है, जबकि अन्यों की गुड़गांव के आसपास हैं. बिल्डरों का मानना है कि मार्केट फर्श पर होने के बावजूद कीमतें और बढ़ेंगी। अंतरिक्ष ग्रुप के डायरेक्टर अभिषेक सिंह गोयत ने अनुमान लगाते हुए कहा कि रेट्स और बढ़ेंगे और जल्द ही यह जगह एनसीआर के अहम रिहायशी इलाकों में से एक होगी।

लोकेशन और कनेक्टिविटी है एल-जोन का प्लस पॉइंट:

यह जगह साउथ-वेस्ट दिल्ली में है और करीब 22,840 हेक्टेयर में फैली हुई है। एल-जोन दिल्ली के 15 जोन्स में सबसे बड़ा है। इसके बनने से क्षेत्र में रिहायशी घरों की बड़ी मांग पूरी होने की उम्मीद है। यह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास है और द्वारका उपनगर और गुड़गांव द्वारका एक्सप्रेसवे के बीच में स्थित है।

जोखिम क्या हैं:

दिल्ली सरकार ने अब तक लैंड पूलिंग पॉलिसी को लागू नहीं किया है, जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी और नोटिफाई कर दिया है। लागू होने के बाद एल-जोन के जमीन मालिक अपनी भूमि डीडीए को दे सकते हैं। प्रशासन कुल भूमि क्षेत्र का 40 प्रतिशत बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, ड्रेनेज और अन्य सामाजिक सुविधाओं के लिए रख लेगा। गोयत ने कहा, सरकार दिल्ली में फ्लोर एरिया रेश्यो (अनुपात जो एक अनुमोदित भूमि के निश्चित प्रतिशत को आवास में विकसित करने की अनुमति देता है) में इजाफा कर सकती है।
पूरे होने चुके अपार्टमेंट्स की डिलीवरी 2019 में शुरू हो सकती है। नाम न छापने की शर्त पर क्षेत्र में काम कर रहे एक ब्रोकर ने बताया, ”जो बिल्डर प्रोजेक्ट्स का एेलान कर रहे हैं, उनका वादा पूरा होने में वक्त लगेगा”। अगर वक्त पर प्रोजेक्ट्स पूरे हो गए तो जरूरी बुनियादी ढांचा न होने के कारण क्षेत्र में ग्राहकों को सेटल होने में मुश्किल होगी। ब्रोकर ने कहा, प्रोजेक्ट्स से जुड़े रिस्क भी रहेंगे।
गुड़गांव के ब्रोकर प्रदीप मिश्रा ने कहा, ”क्षेत्र में कोई भूमि अधिग्रहण की स्थिति के बारे में नहीं जानता। बिल्डरों का दावा है कि उन्होंने भूखंड हासिल कर लिया है। सरकार को इन दावों की जांच करनी चाहिए और ग्राहकों को भी इन प्रोजेक्ट्स में निवेश करने से पहले सब बातें मालूम करनी चाहिए।”
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