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विभिन्न प्रकार के असमिया घर

Types of assamese homes-विभिन्न प्रकार के असमिया घर

ट्रेडिशनल असमिया प्रकार के घरों की डिज़ाइन, 1897 के भ्यावा भूकंप के बाद, असम में ब्रिटिश प्रशासन द्वारा बनाई गई डिज़ाइन है। यह डिज़ाइन बनाने के लिए कई ख़ास चीज़ों और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि किसी भी तरह की तबाही या घटना से बचाने में मदद मिल सके। हल्के वज़न की वस्तुएं – जैसे बांस, लकड़ी और इकरा आदि से असमिया घरों को बनाया जाता है। ऐसे क्षेत्रों में घर बनाने के लिए लोगों को होम लोन सब्सिडी योजना के तहत आसानी से मिलने वाली होम लोन सुविधा भी दी गई है।

आमतौर पर ऐसे क्षेत्र में पाए जाने वाले घर असमिया डिज़ाइन के होते हैं। इन घरों को बनने के लिए हल्के रॉ मटेरियल का इस्तेमाल होता हैं। जैसे कि- इकरा, बांस, लकड़ी और इसी तरह की अन्य हल्की चीज़ें, जिससे क्षेत्र में भूकंप जैसी घटनाओं का सामना करने में मदद मिल सके। लेकिन इस बदलते हुए दौर और नई टेक्नोलॉजी के कारण, कई मंज़िलों वाली इमारतें और स्टील से बने शहरी ढांचों की मांग बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से ट्रेडिशनल असमिया घरों के डिज़ाइन अब धीरे-धीरे ख़त्म होते नज़र आ रहे हैं।

 

असम में कितने प्रकार के घर होते हैं?

बांस से बने घर की डिज़ाइन

भारत के पूर्व-उत्तर राज्यों में बांस से बने घर आमतौर पर पाए जाते हैं। इस तरह के घर भारी मानसून और लगातार भूकंप से निपटने की क्षमता रखते हैं। घर को बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक ईंट की दीवार, प्लिंथ और बांस से अच्छी तरह से जोड़ी जाती है। दीवारों को बांस की पट्टियों से बनाया जाता है और फिर मिट्टी से प्लास्टर कर दिया जाता है।

बांस के घरों की छत को बनाने के लिए घांस का इस्तेमाल किया जाता है।इस तरह की छतें 10 साल तक बिना बदले चल सकती है ,जो की इकरा या दूसरे प्रकार के घरों में नहीं चल सकती है। इन छतों को थोड़ा झुका हुआ बनाया जाता है, ताकि हल्की बाढ़ या बारिश से बचा जा सके।

 

 

इकरा से बने घर की डिज़ाइन

इकरा से बने घर भारत के पूर्व-उत्तर क्षेत्र में सबसे ज़्यादा पाए जाने वाले घर हैं। यह घर सिर्फ असम में ही नहीं बल्कि भारत के लगभग पूरे नार्थ-ईस्ट में पाए जाते हैं। इकरा डिज़ाइन के घर बनाने के लिए छप्पर, बांस, और लकड़ी आदि जैसी चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है। इकरा के  घर लकड़ी के बीम या बांस से बनाए जाते हैं। इस प्रकार के घर भूकंप से सुरक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम होते हैं।

इकरा घर प्लिंथ से 1 मीटर ऊपर तक बनी ईंट या पत्थर की दीवारों की साधारण एक मंजिला होती है, दीवारें लकड़ी के तख़्ते में बुने हुए बांस को सपोर्ट देती है और फिर सीमेंट या मिट्टी से प्लास्टर की जाती हैं। इकरा घरों की छत आमतौर पर जीआई शीट से बनाई जाती है जबकि बांस या लकड़ी के ट्रस ( ढांचा ) उन्हें सहारा देने का काम करता है।

 

मिट्टी से बने घर की डिज़ाइन

मिट्टी के बने घर भी असम में काफी पाए जाते हैं। यह घर मिट्टी में पानी, क्ले और सीमेंट की सामान मात्रा के मिश्रण से बनता है। मिट्टी का घर या मडहाउस एक अन्य प्रकार का असमिया घर का डिज़ाइन है। जिसे कुछ योजनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया था। एक मिट्टी के घर की लंबाई 5 से 10 मीटर के बीच की होती है और चौड़ाई 3 से 5 मीटर तक होती है। इस प्रकार के घर आमतौर पर 1 या 2 मंजिला हो सकते हैं। छत और फर्श 5 मीटर से ज़्यादा लम्बा नहीं होनी चाहिए। दूसरे प्रकार के असमिया घरों की तरह यह मिट्टी के घर, जिन्हे कच्चा घर भी कहा जाता है, भारत के विभिन्न हिस्सों में भी पाए जाते हैं, खासकर के ग्रामीण इलाकों में।

 

चांग डिज़ाइन के घर

चांग डिज़ाइन के घर को करे ओकुम भी कहते है। मूल रूप से देखा जाए तो असम का मिशिंग समुदाय स्टिल्ट हाउस में रहता था। इस तरह के घरों में रहने वाले लोग आमतौर पर जंगलों, पहाड़ों या फिर नदी के किनारे रहते हैं। इस तरह के घर की डिज़ाइन को बाढ़ के पानी में ठीके रहने में सक्षम होते हैं। इन्हें कम से कम 10 फीट के ऊंचे बांस के स्टिल्ट्स की मदद से बनाया जाता है। इस तरह के घरों में घर में आसानी से प्रवेश करने के लिए मुख्या द्वार पर 5-6 सीढ़ियां बनाई जाती है।

चांग घरों में भी दूसरे घरों की तरह रसोई घर के साथ हॉल भी होते है, जो बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है। लोग इस तरह के  घरों में सिर्फ बारिश या बाढ़ से बचने के लिए ही नहीं रहते, बल्कि कुछ धार्मिक मान्यताओं के कारण भी लोग ऐसे घरों में रहना पसंद करते हैं।

 

असमिया डिज़ाइन के घर को बनाना क्यों ज़रूरी है?

ट्रेडिशनल असमिया घरों का निर्माण आर्थिक, भौतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक जैसे कई चीज़ों को ध्यान में रखकर किया गया था। आज के दौर में लोग फैशन और मॉडर्न चीज़ों पर भी ध्यान देते है, पर पहले के लोग घरों को बनाने के लिए फैशन और चलन की परवाह नहीं करते थे।

पहले के दिनों में लोग अपने घर की सीमाओं के अंदर एक आरामदायक और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने में विश्वास रखते थे।

यह डिज़ाइन असम में पाए जाने वाले सदियों पुराने और पारंपरिक घर के डिजाइन हैं, जो हमें लोगों उनके मूल्यों और शैली के बारे में बहुत कुछ बताते हैं। यह डिज़ाइन लोगों में पसंदीदा होने कारण ही आज तक सफल है, और आधुनिक तकनीक के उपयोग के बिना परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए सही भी माना जाता है।

18 सितंबर 2011 को असम में आए भूकंप में कंक्रीट के निर्माण वाले घरों को गंभीर नुक्सान उठाना पड़ा था। ऐसे में इकरा की हल्की दीवारों के गिरने से किसी को चोट लगने की सूचना सामने नहीं आई। हल्के कच्चे माल जो पारंपरिक असमिया घरों के डिज़ाइन को बनाने में लगाए जाते हैं, लचीलेपन और मज़बूती के कारण, वे घरों के टूटने या कोई नुकसान होने की संभावनाओं को कम कर देते हैं।

 

असमिया घरों के लाभ क्याक्या हैं?

बढ़ते समय के साथ उत्तर-पूर्व में भी ऊँची इमारतें, बंगले और कई मंज़िले वाले बंगले बनाए जा रहे हैं। हालांकि,भूकंप जैसी घटनाओं का सामना करने के लिए ट्रेडिशनल असमिया घरों के डिजाइन बनाए गए थे, क्यूंकि यह भूकंप या बाढ़ जैसे समय में सुरक्षा प्रदान करने और उसे झेलने में सक्षम होते हैं ।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

असमिया घरों में कौन सी डिज़ाइन सबसे ज़्यादा आम है ?

असम में इकरा, मिट्टी के घर, चांग और बांस से बने घर काफी ज़्यादा पसंद किए जाते हैं।

असम घर के डिजाइन की विशेषताएं क्या है?

असमिया घर आमतौर पर एक से दो मंजिला होते हैं और भूकंप के साथ-साथ बाढ़ जैसी अन्य प्राकृतिक घटनाओं से बचने के लिए बनाए जाते हैं , जो भारत के पूर्व-उत्तर हिस्से में काफी आम है। घर को और भी मज़बूत बनाने के लिए सीमेंट के साथ लकड़ी, बांस और मिट्टी का भी इस्तेमाल किया जाता है।

गुवाहाटी में असमिया घर बनाने के लिए किस प्रकार की छत बनाई जाती है?

असम और भारत के दूसरे पूर्व-उत्तर राज्यों में घर की छत थोड़ी तिरछी बनाई जाती है । यह बारिश के पानी को छत पर जमा होने से रोकती है।

असमिया घरों के डिजाइन स्टिल्ट से क्यों बनाए जाते हैं?

मानसून के मौसम में भारी बारिश के कारण असम जैसे राज्य बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। स्टिल्ट्स घरों को जमीन से ऊपर उठाने में मदद करते हैं।

क्या कच्चे घर और मिट्टी के घर एक जैसे होते हैं?

इन दोनों प्रकार के मकानों को बनाने में एक ही तरह का रॉ मटेरियल इस्तेमाल किया जाता है। कच्चे का अर्थ अस्थायी होता है, और इससे बनाने में मिट्टी, पुआल और बांस का उपयोग किया जाता है। जो की मिट्टी के घरों को बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता है। मिट्टी के घर असम में काफी आम हैं।

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