वास्तु शास्त्र के हिसाब से ऐसा होना चाहिए आपके घर का मेन गेट


खूबसूरती की दृष्टि से आकर्षक होने के अलावा, घर में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए, घर का मेन डोर भी वास्तु शास्त्र के अनुसार सही दिशा में होना चाहिए.

वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर का मुख्य द्वार (मेन गेट) सिर्फ अंदर आने की जगह ही नहीं बल्कि ऊर्जा का भी रास्ता भी है। मुंबई के वास्तु सलाहकार नितिन परमार के मुताबिक, ”घर का मेन गेट एक गुजरने वाली जगह है, जहां से हम बाहरी दुनिया से घर में आते हैं। यही वह स्थान है, जहां से गुड लक और खुशियां घर में आती हैं”। उनके मुताबिक, ”मेन गेट को ज्यादा अहमियत इसलिए दी गई है, क्योंकि यह स्वास्थ्य, धन और सद्भाव को बढ़ावा देने वाली कॉस्मिक ऊर्जा को अंदर या बाहर करता है। इसके अलावा, मेन गेट घर की पहली छाप भी तय करता है”।

 

घर के मेन गेन की दिशा

परमार के मुताबिक, ”घर का मुख्य द्वार हमेशा उत्तर, उत्तर-पूर्व या पश्चिम की ओर होना चाहिए, क्योंकि ये शुभ दिशाएं मानी गई हैं”। दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में मेन गेट नहीं होना चाहिए। दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में दरवाजा सीसा धातु पिरामिड और लीड हेलिक्स से ठीक किया जा सकता है। जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा में दरवाजा होने पर उसे कॉपर हेलिक्स से सुधारा जा सकता है।

 मुख्य द्वार घर के किसी अन्य दरवाजे से बड़ा होना चाहिए और यह क्लॉकवाइज तरीके से खुलना चाहिए। एक लाइन में तीन दरवाजे नहीं होने चाहिए, न ही मुख्य द्वार से समानांतर में। क्योंकि इसे गंभीर वास्तु दोष माना गया है और यह घर की खुशियों को प्रभावित कर सकता है।

 

वास्तु के मुताबिक मेन डोर के लिए सबसे अच्छा मटीरियल कौन सा है?

किसी भी दिशा के लिए लकड़ी का दरवाजा सबसे अच्छा माना जाता है. हालांकि अगर आपका मेन डोर दक्षिण दिशा में है तो दरवाजा लकड़ी और लोहे का मिश्रण होना चाहिए. इसी तरह, अगर दरवाजा पश्चिम में हैं तो उस पर लोहे का काम होना चाहिए. उत्तर दिशा में मेन डोर है तो सिल्वर कलर ज्यादा होना चाहिए और अगर ईस्ट में मेन डोर है तो यह लकड़ी से बना होना चाहिए और सीमित धातु के सामान से सजाया जाना चाहिए.

 

Main door

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मुख्य द्वार और वास्तु के अनुसार इसकी विजिबिलिटी

दोनों वास्तु और फेंगशुई सलाह देते हैं कि मेन डोर दिखाई देने और आसानी से पहचान योग्य होना चाहिए. अपने घर का नंबर या फिर अपना नाम मेन गेट पर लगाने से भी अलग छाप पड़ती है. नाम को गुदवाने की बजाय  दरवाजे पर एक सरल नेमप्लेट लगाना बेहतर है.

 

Main door design

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ध्यान दें कि मेन डोर कम से कम 7 फुट ऊंचा और 3 फीट चौड़ा होना चाहिए.  बड़े दरवाजे होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा ज्यादा आती है. इसलिए छोटे दरवाजे न लगवाएं.  इसके अलावा बाकी के दरवाजे हाइट में छोटे होने चाहिए. मेन डोर के रूप में मालिकों को पीछे के दरवाजे का उपयोग नहीं करना चाहिए. इसका उपयोग आपके घरेलू सहायकों या अन्य कर्मचारियों द्वारा किया जा सकता है.

 

मुख्य द्वार के आसपास का एरिया कैसे सजाएं

मुंबई की होलिस्टिक हीलर काजल रोहिरा के मुताबिक एक साफ-सुथरा घर, खासकर मुख्य दरवाजा, पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। मेन गेट के पास कूड़ेदान, टूटी हुई कुर्सियां और स्टूल न रखें।

रोहिरा के मुताबिक, ”मेन गेट के आसपास के एरिया में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। मुख्य द्वार के ठीक सामने शीशा न रखें, क्योंकि यह एनर्जी को वापस धकेल देगा”।

दिल्ली की गृहणी तान्या सिन्हा ने दर्जनों फ्लैट रिजेक्ट किए, क्योंकि घर का मुख्य द्वार वास्तु के मुताबिक नहीं था। उन्होंने बाद में ईस्ट फेसिंग फ्लैट लिया। उन्होंने बताया, ”मेरे घर का मेन गेट कलात्मक तरीके से डिजाइन किया गया है, जिस पर मैट गोल्ड फिनिशिंग की गई है।  इस पर स्वास्तिक का चिन्ह बना हुआ है, जिस पर गोल्ड कलर वाली नेम प्लेट लगी हुई है। इससे घर का मेन गेट शानदार लगता है और मैंने एंट्रेंस पर पीले रंग का लैंप भी लगाया हुआ है”।

 

Ornamental main door

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घर के मेन गेट पर एक चौखट (मार्बल या लकड़ी) होनी चाहिए.  क्योंकि एेसा माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को समाहित कर सकारात्मक ऊर्जा को आगे बढ़ाता है. वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार पर कुलदेवता की तस्वीर लगाना शुभ होता है. इसके अलावा, पारंपरिक गार्ड छवियों को उकेरा जा सकता है. इसके अलावा, शंख और पद्मनिधि (कुबेर), सिक्के देते हुए, हाथियों के साथ कमल पर विराजमान लक्ष्मी, धात्री (द्वारफिश नर्स), बछड़े के साथ गाय, तोते, मोर या हंसों की छवियों जैसे पक्षी दरवाजे पर इस्तेमाल होने पर फायदेमंद होते हैं.

अपने घर के मेन गेट को धार्मिक चिन्हों जैसे ओम, स्वास्तिक, क्रॉस से सजाएं और फ्लोर पर रंगोली बनाएं. यह इसलिए क्योंकि इन्हें शुभ माना जाता है और यह सुख-समृद्धि लाता है.

 

क्या-करें और क्या न करें

घर के मेन डोर पर रोशनी

घर के एंट्रेंस पर हमेशा चमकदार रोशनी रखें, लेकिन लाल लाइट्स से परहेज रखें। शाम के वक्त घर के दरवाजे पर लाइट जरूर जलाएं।

समृद्धि और वैभव के लिए

मेन डोर के पास पानी से भरा एक कांच का घड़ा रखें, जिसमें फूलों की पत्तियां हों. चूंकि पानी नकारात्मक ऊर्जा का कुचालक है, यह आपके घर और परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखने में आपकी मदद करेगा. आप लक्ष्मी के पैर भी घर की एंट्रेंस पर चिपका सकते हैं.

घर के मेन डोर पर डेकोरेशन

घर के एंट्रेंस को हरे पौधों से सजाएं. मेन डोर पर आप तोरण भी लगा सकते हैं. मेन डोर के पास जानवरों की मूर्तियां और अन्य आकृतियां, फव्वारा या फिर पानी के तत्व न रखें. घर के मुख्य द्वार के सामने कभी शीशा न रखें। अगर जगह है तो एंट्रेंस को हरे पौधों से सजाएं।

सजावटी हैंगिंग बेल्स भी सकारात्मक ऊर्जा को आपके घर का पता बताती हैं. मेन डोर पर रंगोली न केवल देवी लक्ष्मी और घर पर मेहमानों का स्वागत करती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा भी देती है, खुशियां बिखेरती है और बुराई को दूर करती है. रंगोली को रंगीन पाउडर, हल्दी पाउडर, चूना पत्थर पाउडर, गेरू (भूरी मिट्टी पाउडर) फूलों की पंखुड़ियों, या चावल के आटे का उपयोग करके डिजाइन किया जा सकता है.

घर के मेन डोर की पोजिशन

वास्तु सिद्धांतों के अनुसार हमेशा एंट्री गेट और मेन गेट एक ही तरफ रखें. घर का मुख्य द्वार 90 डिग्री में खुलना चाहिए, वो भी बिना किसी रुकावट के. दरवाजा हमेशा घड़ी के घूमने (Clockwise) की दिशा में खुलना चाहिए. दरवाजों के कब्जों में नियमित तौर पर तेल डालें और दरवाजों के सामान पर पॉलिश करें। एंट्रेंस में किसी भी तरह की टूट-फूट और चटकी हुई लकड़ी नहीं होनी चाहिए, न ही कोई पेच निकला होना चाहिए।

नेम प्लेट और वास्तु

हमेशा नेम प्लेट लगाएं। अगर घर का दरवाजा उत्तर और पश्चिम दिशा की ओर है तो धातु की नेम प्लेट लगाने की हमेशा सलाह दी जाती है। अगर दक्षिण या पूर्व में है तो लकड़ी की नेम प्लेट लगाएं। इसे मुख्य द्वार के बाईं ओर रखें, क्योंकि इसे अन्य पक्षों की तुलना में अधिक शुभ बताया जाता है।

मेन डोर के लिए घंटी

दरवाजे के बाहर लगाई जाने वाली घंटी को कम से कम 5 फुट या उससे ऊपर लगवाएं. झकझोरने वाली, पीतल की या ज्यादा आवाज वाली घंटियां ना लगवाएं. ऐसी डोर बेल चुनें, जिसकी आवाज मधुर और सुकून देने वाली हो ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़े.

मेन डोर में इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी की क्वॉलिटी

लकड़ी केवल अच्छी क्वॉलिटी की ही लें और मेन डोर बाकी दरवाजों के मुकाबले बड़ा होना चाहिए.

 

vastu for main door

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मेन डोर और बाथरूम

मेन डोर के करीब बाथरूम नहीं होना चाहिए. पीले, बेज या लकड़ी जैसे रंगों को चुनें. लाल और संतरी जैसे गहरे रंगों से बचें.

मेन डोर का रंग

सुख और सौभाग्य लाने की दिशा के आधार पर मेन डोर के लिए सबसे शुभ रंग इस प्रकार हैं:

  • पश्चिम: नीला और सफेद
  • दक्षिण और दक्षिण-पूर्व: चांदी, नारंगी और गुलाबी
  • दक्षिण-पश्चिम: पीला
  • उत्तर: हरा
  • उत्तर-पूर्व: क्रीम और पीला
  • उत्तर-पश्चिम: सफेद और क्रीम
  • पूर्व: सफेद, लकड़ी के रंग या हल्का नीला

काले रंग से मेन डोर न रंगें.

मेन डोर के पास ईश्वर की मूर्तियां

एंट्रेंस पर देवताओं और देवियों की मूर्ति और तस्वीरें लगाना शुभ माना जाता है. वास्तु के मुताबिक, आप घर की एंट्रेंस पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और तस्वीरें रख सकते हैं. इससे वैभव, अच्छा भाग्य और समृद्धि आती है.

कदमों का ध्यान रखें

अगर एंट्रेंस पर सीढ़ियां हैं तो ऐसा माना जाता है कि विषम संख्या वाली सीढ़ियों से सौभाग्य आता है.

दरवाजे का साइज

घर का मेन डोर घर में सबसे बड़ा होना चाहिए. बेहतर होगा कि यह दो हिस्सों में आए बजाय एक के. सुनिश्चित करें कि दरवाजा पर जगह चौड़ी हो और कोनों से दूर हो.

 

घर के एंट्रेंस पर क्या चीज न रखें?

शू रैक

कई लोग अपने घर के मेन डोर पर ही शू रैक रख देते हैं. घर लौटने के बाद उन्हें जूते वहां रखने में आसानी होती है. यह आसान भी है लेकिन इससे बचना चाहिए. यही बात कूड़ेदान और टूटे हुए फर्नीचर पर भी लागू होती है. मुख्य दरवाजे के पीछे चीजों को लटकाने से बचें.

प्रॉपर्टी का लेआउट चेक करें

बड़े शहरों में, घर के लेआउट पर आपका ज्यादा जोर नहीं चलेगा. लेकिन अगर आप प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो आपके घर का मेन डोर किसी दूसरे के घर के मेन डोर के सामने नहीं होना चाहिए. इससे समस्याएं आएंगी. किसी अन्य व्यक्ति के मेन डोर या फिर एक पौधे द्वारा डाली गई छाया भी आपके घर के लिए अच्छी नहीं है.

दरवाजों के प्रकार और प्रकृति

घर की एंट्रेंस पर स्लाइडिंग डोर नहीं होना चाहिए.  यहां तक कि सर्कुलर शेप वाले दरवाजों का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वे फैशनेबल लग सकते हैं लेकिन ये वास्तु के सिद्धांतों का पालन नहीं करते. एंट्रेंस के लिए  हमेशा सिंपल और अच्छी क्वॉलिटी के दरवाजों का ही इस्तेमाल करें. लकड़ी एक अच्छी चॉइस है और यह दोषों को सुधारती है. यह भी सलाह दी जाती है कि मेन डोर पर एक दहलीज हो. सुनिश्चित करें कि घर जमीन के समान स्तर पर न हो. यह घर के अंदर सकारात्मक वातावरण को दर्शाता है, जो कि बाहर की नकारात्मक ऊर्जा के खिलाफ है. दहलीज बुरी शक्तियों के खिलाफ रोड़े का काम करता है और पैसे को बर्बाद होने से बचाता है.  अगर सीढ़ियां हैं तो वे ऑड नंबर्स में होनी चाहिए. इसी तरह डोरमैट भी जरूरी है. जब आप डोरमैट पर अपने जूतों को साफ करते हैं तो आप सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों को घर के बाहर ही छोड़ देते हैं.

सेप्टिक टैंक की प्लेसमेंट

घर के मेन डोर पर कभी भी सेप्टिक टैंक नहीं रखवाना चाहिए.

घर के मेन डोर की प्लेसमेंट

मेन डोर कभी भी घर के कोने में न लगवाएं. घर के कोनों को हमेशा खाली छोड़ देना चाहिए ताकि उसमें रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहे.

मेन डोर के पास लाइटिंग

इसकी सलाह हमेशा दी जाती है कि आपके घर के मेन जोर पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए ताकि आपका मूड फ्रेश हो जाए. हल्की लाइट्स का ही इस्तेमाल करें और डार्क लाइट्स को नजरअंदाज करें. यह दोनों अनिष्ट हैं. मेन डोर पर दाग और स्क्रैच को चेक करें, क्योंकि ये नहीं होने चाहिए. टूटे दरवाजे होने से सम्मान का भी नुकसान होता है.

फ़ोयर स्पेस

फोयर वास्तु का एक अहम हिस्सा है. अच्छे से सजा हुआ फोयर स्पेस, हमारी फिलॉसफी के मुताबिक घर में रहने वालों के लिए चमत्कार कर सकता है. दुर्भाग्यवश, शहरी इलाकों में हर कोई जगह की कमी के कारण ऐसे घर अफोर्ड नहीं कर सकता. लेकिन अगर आप अफोर्ड कर सकते हैं तो ऐसा घर देखें, जहां की ओर रास्ता छोटे से बड़े स्थान की ओर जाए.

शीशा

मेन डोर के विपरीत कभी शीशा ना रखें.

यह भी देखें: घर की सजावट में शीशे का इस्तेमाल कैसे करें

 

मेन डोर बनाने की सही जगह

मेन डोर कहां लगाना है, ये आप नीचे तस्वीर के जरिए जान सकते हैं. 1 का मतलब है सर्वश्रेष्ठ पोजिशन और अन्य के बारे में तस्वीर में बताया गया है.

आइए आपको बताते हैं कि क्यों कुछ दिशाएं अन्यों से बेहतर हैं:

  • नॉर्थ ईस्ट: जब बात मेन गेट लगाने की आती है तो जैसा कि तस्वीर में दिखाया गया है, नॉर्थ ईस्ट को सबसे ज्यादा शुभ माना गया है. यह भी एक दिशा है जो सुबह सूर्य के संपर्क में आने के कारण अपार ऊर्जा प्रदान करती है. यह घर और उसके निवासियों में जीवन शक्ति और ऊर्जा जोड़ती है.
  • नॉर्थ: ऐसा माना जाता है कि मेन गेट को इस दिशा में लगाने से परिवार में वैभव और सौभाग्य आता है. इसलिए घर में मेन डोर या एंट्रेंस लगाने के लिए यह दूसरी सर्वश्रेष्ठ जगह है.
  • ईस्ट: यह बहुत अच्छी जगह नहीं है लेकिन पूर्व दिशा आपकी ऊर्जा को बढ़ाती है. यह उत्सव में भी जोड़ती है.
  • साउथ ईस्ट: कभी भी साउथ वेस्ट का विकल्प न चुनें. अगर कोई विकल्प न हो तो साउथ-ईस्ट को ही आपको चुनना चाहिए.
  • नॉर्थ वेस्ट: अगर आपके पास कोई विकल्प नहीं है और एंट्रेंस नॉर्थ में ही है तो सुनिश्चित करें कि वह नॉर्थ वेस्ट दिशा में हो. इसके जरिए आप सौभाग्य के अलावा शाम की धूप का भी स्वागत कर सकते हैं.

 

Vastu Shastra

 

अपने घर का रेनोवेशन करते समय वास्तु के साथ तालमेल बिठाने के सरल तरीके

अब तक आपको यह स्पष्ट हो गया होगा कि मेन डोर और उसका वास्तु के सिद्धांतों के तहत उसके अनुपालन की क्या अहमियत है. अगर आप सीमित बजट में अपना घर रेनोवेट करना चाहते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान:

  • सुनिश्चित करें कि घर का मेन डोर स्वागत योग्य हो. वास्तु के अनुरूप रंगों से ही इस पर पुताई करें.
  • सुनिश्चित करें कि मेन डोर कोई नेगेटिव जोन ना हो.
  • सुनिश्चित करें कि दरवाजे के कब्जे चिकने हैं. मेन डोर जर्जर होने पर परिवार के सदस्यों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो जाते हैं.
  • मुख्य दरवाजे पर कभी भी जंग लगे तालों का इस्तेमाल न करें, जिससे आवाज आती हो. या तो ऐसे तालों को बदलें या उनमें नियमित रूप से तेल लगाएं.
  • वास्तु शास्त्र का मुख्य मकसद घर के अंदर ऊर्जा को बढ़ावा देना है. इसलिए, धनुषाकार मुख्य द्वार से बचना चाहिए, क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को बदल सकता है.
  • ऐसे दरवाजे ना चुनें जो खुद ब खुद बंद हो जाते हैं.
  • अगर घर में एक से ज्यादा मंजिलें हैं तो प्रत्येक मंजिल पर दरवाजे एक के ऊपर एक नहीं होने चाहिए.

 

पूछे जाने वाले सवाल

हाउस एंट्रेंस के लिए कौन सी दिशा अच्छी है?

मेन डोर/एंट्रेंस हमेशा नॉर्थ, नॉर्थ ईस्ट, ईस्ट या वेस्ट में होनी चाहिए क्योंकि ये दिशाएं शुभ मानी गई हैं. साउथ, साउथ ईस्ट, नॉर्थ वेस्ट (नॉर्थ साइड) या साउथ-ईस्ट (ईस्ट साइड) में मेन डोर नहीं होना चाहिए.

मेन डोर के सामने क्या रखना चाहिए?

एक साफ-सुथरा घर, खासकर मेन डोर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. कभी भी कूड़ेदान, टूटी हुई कुर्सी या स्टूल मेन डोर के करीब न रखें. मुख्य द्वार में हमेशा दहलीज (मार्बल या लकड़ी) होनी चाहिए क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है और सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा ही आगे जाती है. मुख्य द्वार को दिव्य प्रतीकों जैसे ओम, स्वास्तिक, क्रॉस आदि से सजाएं और फर्श पर रंगोली लगाएं, क्योंकि वे शुभ माने जाते हैं और सौभाग्य को आमंत्रित करते हैं.

क्या मेन गेट के सामने शीशा रख सकते हैं?

कभी भी मेन एंट्रेंस के सामने शीशा न रखें, क्योंकि उसमें मेन डोर ही दिखाई देगा और उससे एनर्जी वापस चली जाएगी.

क्या साउथ-ईस्ट में मेन डोर होना चाहिए?

दक्षिण पूर्व में मेन गेट ना ही हो तो बेहतर है. अगर साउथ-वेस्ट या साउथ में मेन गेट है तो इसे लेड मेटल पिरामिड और लेड हेलिक्स के जरिए ठीक किया जा सकता है.

क्या लाफिंग बुद्धा को मेन डोर पर रखा जा सकता है?

लाफिंग बुद्धा को घर के अंदर की ओर, तिरछे विपरीत या मेन डोर की ओर रखें. मेन डोर से घर में एंट्री करने वाली ऊर्जा का लाफिंग बुद्धा से स्वागत किया जाता है और अवांछित ऊर्जा को शुद्ध किया जाता है.

(स्नेहा शैरन मेमन के इनपुट्स के साथ)

 

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