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क्या पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति की बिक्री कानूनी है?

क्या पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति की बिक्री कानूनी है?

इतिहास गवाह है कि रियल एस्टेट हमेशा से वह पसंदीदा साधन रहा है, जहां बेनामी या अघोषित धन को सुरक्षित रखा जाता रहा। वक्त के साथ ऐसे अनेक रास्ते बनाए गए, जिनसे यह निवेश वैध दिखाई दे, उन्हीं में से एक तरीका था पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) के जरिए संपत्ति की खरीद-फरोख्त। दिल्ली जैसे शहरों में तो दशकों से यह आम प्रचलन रहा है कि संपत्ति का सौदा पावर ऑफ अटॉर्नी से किया जाए, लेकिन वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के माध्यम से संपत्ति की बिक्री कानूनी रूप से मान्य है या नहीं। इसके बाद से पूरा प्रक्रिया ही जटिल हो गई।

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इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है और संपत्ति संबंधी लेन-देन में इसकी शक्ति कितनी है और इसके इस्तेमाल के दौरान किन सुरक्षा उपायों का ध्यान रखना चाहिए।

पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है?

पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) एक ऐसा कानूनी दस्तावेज है, जिसके जरिए किसी लेन-देन का प्रमुख व्यक्ति (Principal) किसी अन्य व्यक्ति को कानूनी अधिकार देता है कि वह उसकी ओर से आवश्यक कार्य कर सके। पावर ऑफ अटॉर्नी व्यापक भी हो सकती है और सीमित दायरे की भी। यह स्वाभाविक रूप से तभी समाप्त हो जाती है, जब प्रमुख व्यक्ति का निधन हो जाता है।

भारत में पावर ऑफ अटॉर्नी की अवधारणा दो कानूनों के अंतर्गत चर्चा में आती है, पहला-पावर ऑफ अटॉर्नी अधिनियम, 1882 और दूसरा – भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899।

इसके द्वारा मिलने वाली सुविधा के कारण यह दस्तावेज खासकर उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो अत्यधिक व्यस्त रहते हैं, जैसे व्यापारी या वे लोग जो अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों को स्वयं नहीं कर पाते। पावर ऑफ अटॉर्नी का प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बीच भी खूब उपयोग होता है, क्योंकि अक्सर उनके लिए अपने मूल देश आना संभव नहीं होता, चाहे वह व्यवसायिक कारणों से हो या व्यक्तिगत कार्यों की वजह से।

रजिस्ट्रेशन विधेयक 2025 में पावर ऑफ अटॉर्नी

रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा-28 में अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन का स्थान निर्धारित किया गया है। प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन विधेयक 2025 को मसौदा प्रतिक्रिया के लिए ही जारी किया गया है, इसके अनुसार धारा 28 के तहत निम्नलिखित पावर ऑफ अटॉर्नी मान्य मानी जाएगी – 

(a) यदि पावर ऑफ अटॉर्नी बनाते समय प्रिन्सिपल भारत में निवास करता है – 

(i) स्थावर सम्पत्ति (immovable property) के हस्तांतरण से संबंधित पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए, धारा 12 के अंतर्गत पंजीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी मान्य होगी।
(ii) अन्य किसी भी प्रकार की पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए वह पावर ऑफ अटॉर्नी मान्य होगी, जो उस जिले या उप-जिले के रजिस्ट्रार, उप-रजिस्ट्रार या मजिस्ट्रेट के समक्ष बनाई और सत्यापित की गई हो, जहां प्रिन्सिपल निवास करता है।

(b) यदि पावर ऑफ अटॉर्नी बनाते समय प्रिन्सिपल भारत के उस हिस्से में निवास करता है, जहां यह अधिनियम लागू नहीं है, तो ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी मान्य होगी, जो किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष बनाई और सत्यापित की गई हो।

(c) यदि पावर ऑफ अटॉर्नी बनाते समय प्रिन्सिपल भारत में निवास नहीं करता, तो ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी मान्य होगी, जो किसी नोटरी पब्लिक या किसी न्यायालय, न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, भारतीय कौंसुल या वाइस-कौंसुल अथवा भारत सरकार के प्रतिनिधि के समक्ष बनाई और सत्यापित की गई हो।

निम्नलिखित व्यक्तियों को पावर ऑफ अटॉर्नी बनाने या उसकी पुष्टि कराने के लिए उपरोक्त उपधारा (1)(a) और (1)(b) के अंतर्गत किसी भी रजिस्ट्रेशन या कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी – 

  1. a) वे व्यक्ति, जो शारीरिक दुर्बलता के कारण उपस्थित नहीं हो सकते। 
  2. b) वे व्यक्ति, जो किसी दीवानी या फौजदारी प्रक्रिया के अंतर्गत कारावास में हैं और 
  3. c) वे व्यक्ति, जिन्हें विधि द्वारा न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्राप्त है।

पावर ऑफ अटॉर्नी क्या कार्य कर सकती है?

क्या कर सकती है क्या नहीं कर सकती है
पावर ऑफ अटॉर्नी के साथ आप संपत्ति खरीद, बेच या किराये पर ले सकते हैं। गारंटर से परामर्श किए बिना निर्णय न लें।
गारंटर के घर की मरम्मत और नवीनीकरण गारंटर के फंड और उसके फंड को मिलाएं।
बैंक खातों का प्रबंधन करें और उपयोगिता बिलों का भुगतान करें व्यक्तिगत हित के लिए पीओए स्थिति का दुरुपयोग

यह भी देखें: अपनी संपत्ति से अवैध कब्जा कैसे हटाएं?

पावर ऑफ अटॉर्नी कब उपयोग की जाती है?

कुछ विशेष परिस्थितियां, जहां पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) का उपयोग किया जा सकता है, नीचे दी गई हैं – 

पावर ऑफ अटॉर्नी के प्रकार

पावर ऑफ अटॉर्नी के कई प्रकार होते हैं – 

जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA): इसे परंपरागत पावर ऑफ अटॉर्नी भी कहा जाता है। इसमें विशेष जिम्मेदारियां होती हैं और यह एक निश्चित समयावधि तक ही मान्य रहती है। GPA के अंतर्गत, एजेंट को प्रिंसिपल की ओर से सामान्य और रोजमर्रा के काम करने का अधिकार मिलता है। ध्यान देने योग्य है कि GPA का कानूनी रूप से वैध होने के लिए रजिस्ट्रेशन आवश्यक है।

यह एक लचीला दस्तावेज है, जिसके माध्यम से एजेंट (अटॉर्नी होल्डर) को मालिक की संपत्ति और उससे जुड़े कई मामलों को संभालने का अधिकार मिल जाता है, लेकिन इसी कारण इस पर अत्यधिक भरोसा करना पड़ता है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

GPA और SPA के बीच अंतर

सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी
यह प्रतिनिधि को व्यापक अधिकार प्रदान करता है। यह केवल किसी विशेष कार्य के लिए अधिकृत करता है, जिसे प्रतिनिधि मुख्य व्यक्ति की ओर से पूरा कर सकता है।
जीपीए के तहत कोई व्यक्ति आपकी बिजली-पानी जैसी बिलों का भुगतान कर सकता है, आपकी ओर से किराया वसूल सकता है, विवादों का निपटारा कर सकता है या बैंक से जुड़े सभी काम कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई एनआरआई अपना मकान बेचना चाहता है तो उसे इसके लिए एसपीए बनाना होगा।
जीपीए को बनाने वाला व्यक्ति अपने जीवनकाल में कभी भी इसे रद्द कर सकता है। उसकी मृत्यु होने पर जीपीए स्वतः ही कानूनी रूप से अमान्य हो जाता है। एसपीए उसी क्षण समाप्त हो जाता है, जब उसका उद्देश्य यानी निर्धारित कार्य पूरा हो जाता है।

डीम्ड कन्वेयन्स के बारे में भी पढ़ें

पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) किसे दी जा सकती है और इसकी प्रक्रिया क्या है?

क्या पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) धारक खुद को ही संपत्ति बेच सकता है?

हां, यह संभव है कि जिसके पास पावर ऑफ अटॉर्नी है, वही उस संपत्ति का मालिक भी हो और वह संपत्ति खुद को ही बेच दे, लेकिन ऐसा लेन-देन धोखाधड़ी माना जा सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में लेन-देन केवल पंजीकृत बिक्री विलेख (Registered Sale Deed) के माध्यम से ही होना चाहिए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश भी यही कहता है।

क्या एक से अधिक पावर ऑफ अटॉर्नी नियुक्त की जा सकती है?

हां, कोई भी व्यक्ति एक से अधिक पावर ऑफ अटॉर्नी दे सकता है और यह भी तय कर सकता है कि वे सब अलग-अलग काम करेंगे या मिलकर काम करेंगे। यह तब लाभकारी होता है जब किसी महत्वपूर्ण निर्णय पर कई लोगों की सलाह और दिमाग की जरूरत हो। हालांकि, इससे मतभेद और विवाद की संभावना भी बढ़ सकती है।

पावर ऑफ अटॉर्नी का प्रारूप कैसा होना चाहिए?

एक पावर ऑफ अटॉर्नी में निम्नलिखित बातें शामिल होनी चाहिए – 

पावर ऑफ अटॉर्नी बनाने की प्रक्रिया

  1. सबसे पहले 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर पावर ऑफ अटॉर्नी के नियम और शर्तें लिखें। इस तरह तैयार किया गया ड्राफ्ट एक साधारण (Simple) पावर ऑफ अटॉर्नी कहलाता है।
  2. ड्राफ्ट तैयार होने के बाद अपने निवास क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जाएं।
  3. पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर करने के लिए दो गवाहों की उपस्थिति जरूरी है। गवाहों को रजिस्ट्रार के सामने ही साइन करना होगा।
  4. अपने साथ स्वयं-अभिप्रमाणित (self-attested) मूल दस्तावेज जैसे पते का प्रमाण, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड आदि अवश्य रखें। साथ ही पेन, दस्तावेज़ों की अतिरिक्त फोटोकॉपी और पासपोर्ट साइज फोटो साथ ले जाएं, क्योंकि ऐसी अपॉइंटमेंट आसानी से नहीं मिलती और किसी दस्तावेज की कमी की वजह से प्रक्रिया अधूरी रह जाए तो फिर से लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
  5. रजिस्ट्रार आपके, पावर ऑफ अटॉर्नी धारक और गवाहों की फोटो लेकर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित रखता है।
  6. आखिर में रजिस्ट्रार पावर ऑफ अटॉर्नी की एक प्रति सरकारी रिकॉर्ड में रखता है और आपको आधिकारिक रजिस्ट्री स्टाम्प लगी हुई प्रति प्रदान करता है। इसके बाद आपकी साधारण पावर ऑफ अटॉर्नी एक रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी बन जाती है।

पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यदि किसी संपत्ति की बिक्री के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) बनाई जाती है, तो उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि नोटरीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी को अदालत में सबूत के रूप में मान्यता प्राप्त होगी। हालांकि, यह नियम हर राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पावर ऑफ अटॉर्नी दस्तावेज किस राज्य में तैयार किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, गुजरात में गुजरात रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक के तहत नोटरीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

 

पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए कितना स्टाम्प शुल्क देना होगा?

सामान्य पीओए पिता, माता, बहन, भाई, पत्नी, पति, पोते, पोती के नाम पर रजिस्टर्ड बिना किसी प्रतिफल के पंजीकरण के लिए 500 रुपए का स्टाम्प शुल्क 100 रुपए
सामान्य पीओए अन्य लोगों के नाम पर स्टाम्प ड्यूटी संपत्ति के बाजार मूल्य या प्रतिफल मूल्य, जो भी अधिक हो, के अनुसार होगी। 1000 रुपए पर 10 रुपए, जिसमें न्यूनतम 100 रुपए और अधिकतम 30,000 रुपए बाजार मूल्य या प्रतिफल मूल्य, जो भी अधिक हो, होगा।

 

यह भी देखें: एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट के बारे में सब कुछ जानें

एनआरआई भारत में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं?

एनआरआई निम्न तरीकों से पावर ऑफ अटॉर्नी को लागू कर सकते हैं:

क्या पावर ऑफ अटॉर्नी रद्द की जा सकती है?

हां, पावर ऑफ अटॉर्नी को रद्द किया जा सकता है। इसके लिए प्रदाता (Grantor) को एजेंट को एक आधिकारिक लिखित पत्र भेजना होता है, जिसमें स्पष्ट रूप से रद्द करने का उल्लेख किया गया हो। साथ ही, जिन तीसरे पक्षों का संबंध उस पावर ऑफ अटॉर्नी से है, उन्हें भी इसकी सूचना देना आवश्यक है। यदि पावर ऑफ अटॉर्नी को रिकॉर्डर कार्यालय में रजिस्टर्ड किया गया था तो उसकी निरस्तीकरण प्रक्रिया भी वहीं पूरी करनी होगी।

इस बात का ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2022 के एक निर्णय में कहा है कि मौखिक रूप से पावर ऑफ अटॉर्नी रद्द करना मान्य नहीं है। इसे केवल लिखित रूप में रद्द किया जा सकता है और सभी संबंधित पक्षों तक पहुंचाना अनिवार्य है।

 

क्या पावर ऑफ अटॉर्नी से बिक्री विलेख (Sale Deed) किया जा सकता है?

साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर संपत्ति का स्वामित्व हस्तांतरण वैध नहीं है। इस आदेश और इससे जुड़ी अवैधता को समझने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि वास्तव में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी क्या होती है।

 

संपत्ति की बिक्री के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कैसे किया गया?

दरअसल, पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति बेचना एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसमें दो पक्ष आपस में समझौता कर कानून को दरकिनार करने की नीयत से प्रवेश करते थे।

इस तरीके का प्रचलन 1990 के दशक से शुरू हुई प्रॉपर्टी मार्केट की तेज रफ्तार के साथ बढ़ता चला गया। हालात इतने बिगड़े कि आखिरकार सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना पड़ा और 2011 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति बिक्री को अवैध करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के आधार पर किए गए लेन-देन की कोई कानूनी मान्यता नहीं होगी। केवल रजिस्टर्ड बिक्री विलेख (Registered Sale Deed) ही ऐसे सौदों को वैधता प्रदान कर सकती है।

 

जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये संपत्ति की बिक्री कैसे होती थी?

किसी संपत्ति की खरीद-फरोख्त में खरीदार को स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क चुकाना होता है, वहीं विक्रेता को कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा जैसे ही बिक्री विलेख (Sale Deed) रजिस्टर्ड हो जाता है, उसकी जानकारी सार्वजनिक हो जाती है और किसी भी समय बेनामी सौदों का खुलासा करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।

अक्सर कानून से बचने और संपत्ति सौदों पर लगने वाले टैक्स से बचने की नीयत से खरीदार और विक्रेता तीन-चरणीय चालाक योजना बनाते थे, जिसके जरिए वे बिक्री की पूरी प्रक्रिया अंजाम देते थे।

2009 में जब सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज प्रा. लि. बनाम हरियाणा राज्य का मामला सुर्खियों में आया, तब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, “अनुमतियां लेने की जटिल प्रक्रिया से बचने और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को ‘अनअर्न्ड इन्क्रीज’ के नाम पर भारी रकम चुकाने से बचने के लिए एक मिश्रित तरीका निकाला गया। इसके तहत फ्लैट का धारक, तय की गई राशि पाकर, खरीदार को फ्लैट का कब्जा सौंप देता था और साथ ही यह दस्तावेज तैयार करता था।” 

इस तरह का स्वामित्व हस्तांतरण उन लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया, जिन्हें डीडीए की अलग-अलग हाउसिंग योजनाओं की लॉटरी से मकान मिले थे और बाद में वे इन्हें इच्छुक खरीदारों को बहुत ऊंचे दामों पर बेच देते थे।

यह भी देखें: संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के बारे में सब कुछ जानें

पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत एजेंट को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए

पावर ऑफ अटॉर्नी से प्रॉपर्टी खरीदने पर खरीदार को होने वाली दिक्कतें

नीचे वे समस्याएं दी गई हैं, जिनका सामना खरीदार को आमतौर पर करना पड़ सकता है – 

  1. यदि कोई व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी से प्रॉपर्टी खरीदता है तो उसके पास कब्जा तो रहेगा, लेकिन जब तक विधिवत सेल डीड रजिस्टर्ड नहीं होती, तब तक उसे कानूनी मालिक नहीं माना जाएगा। यह स्थिति खरीदार के लिए बेहद उलझन भरी हो सकती है।
  2. चूंकि PoA से खरीदी गई प्रॉपर्टी में खरीदार का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता, इसलिए स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में नामांतरण संभव नहीं होता। इस वजह से बिजली का बिल, प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद और अन्य यूटिलिटी बिल पुराने मालिक के नाम पर ही आते रहते हैं।
  3. यदि विक्रेता असहयोगी हो जाए तो समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में खरीदार जब स्टांप ड्यूटी भरकर रजिस्ट्री करवाना चाहता है तो मूल मालिक कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए अतिरिक्त शुल्क या कमीशन मांग सकता है।
  4. अधिकांश बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) ऐसी संपत्ति पर लोन देने से मना कर देती हैं। अगर देती भी हैं तो शर्तें बेहद कड़ी होती हैं।

क्या किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद पॉवर ऑफ अटॉर्नी मान्य रहती है?

अगर उस व्यक्ति का निधन हो जाता है, जिसने पॉवर ऑफ अटॉर्नी दी थी तो वह पॉवर ऑफ अटॉर्नी अपने आप निरस्त मानी जाती है। इसके बाद सारी जिम्मेदारियां मृतक की संपत्ति के उत्तराधिकारी या वसीयत में नियुक्त निष्पादक को मिल जाती हैं। पॉवर ऑफ अटॉर्नी धारक का अधिकार सिर्फ उतना ही रहता है, जितना दाता (grantor) ने अपनी वसीयत में परिभाषित किया होता है।

 

Housing.com का पक्ष

पावर ऑफ अटॉर्नी एक बेहद मूल्यवान साधन है, बशर्ते इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए। पॉवर ऑफ अटॉर्नी बनवाते समय किसी अनुभवी वकील की मदद लें, जो आपकी असली जरूरतों को समझकर सही दिशा में मार्गदर्शन कर सके। दस्तावेज को हमेशा स्पष्ट और सटीक भाषा में तैयार किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी विवाद या दुरुपयोग की गुंजाइश न बचे। इस बात का ध्यान रखें कि पॉवर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कानूनन दंडनीय अपराध है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

 

GPA क्या है?

GPA का मतलब जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी होता है। इसे कोई व्यक्ति अपने प्रतिनिधि को इस उद्देश्य से देता है कि वह उसकी ओर से सामान्य प्रकार के कार्य पूरे कर सके।

SPA क्या है?

SPA का मतलब स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी होता है। इसे कोई व्यक्ति केवल किसी विशेष कार्य को पूरा कराने के लिए अपने प्रतिनिधि के पक्ष में निष्पादित करता है।

भारत में पावर ऑफ अटॉर्नी किस कानून से नियंत्रित होती है?

भारत में पावर ऑफ अटॉर्नी को पावर्स ऑफ अटॉर्नी अधिनियम, 1882 और भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत परिभाषित और नियंत्रित किया गया है।

 

(हमारे लेख से संबंधित कोई सवाल या प्रतिक्रिया है? हम आपकी बात सुनना चाहेंगे। हमारे प्रधान संपादक झूमर घोष को jhumur.ghosh1@housing.com पर लिखें।)

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