भारत में क्या है पगड़ी सिस्टम, जानिए?


भारत में पगड़ी सिस्टम किरायेदारी का ही एक रूप है, जहां किरायेदार प्रॉपर्टी का आंशिक मालिक भी होता है. यह सिस्टम महाराष्ट्र, दिल्ली और कोलकाता के कुछ हिस्सों में आम है. आगे जानिए कि क्या पगड़ी सिस्टम कानूनी है और अगर आप पगड़ी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं, जो आपने काफी समय पहले ली थी तो आपकी देयता क्या है.

जब बात घर की आती है तो पगड़ी सिस्टम की प्रथा काफी समय से चल रही है. भारत में काफी मशहूर पगड़ी प्रथा ब्रिटिश शासन में काफी तेजी से आगे बढ़ी. मेट्रो शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली और कोलकाता में आज भी पगड़ी सिस्टम चल रहा है.

क्या होता है पगड़ी सिस्टम

यह किरायेदारी का ही एक रूप है, जो काफी वर्ष पहले से चला आ रहा है. वो इसलिए क्योंकि 1999 से पहले, लीज के लिए मकान मालिक के साथ कॉन्ट्रैक्ट करने की जरूरत नहीं थी. किराये की रसीदें ही चली आ रही थीं. साल दर साल किराया एक जैसा ही रहता था और इस पर महंगाई का भी प्रभाव नहीं हुआ.

क्या पगड़ी सिस्टम कानूनी है?

महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट 1999, जो मार्च 31 2000 को लागू हुआ, के तहत इस सिस्टम को कानूनी ठहरा दिया गया. इस कानून का सेक्शन 56 इसे कानूनी मान्यता देता है.

1. किरायेदार या कोई शख्स जो किरायेदार की ओर से काम कर रहा है, वह किसी भी परिसर के अपने कार्यकाल के ट्रांसफर की शर्त के रूप में क्लेम हासिल करता है.

2. मकानमालिक या कोई और शख्स जो मकानमालिक की ओर से काम कर रहा है, वह कोई भी जुर्माना, प्रीमियम, पैसा, डिपॉजिट या ग्रांट पाने के अलावा किसी अन्य शख्स को लीज ट्रांसफर करने या मंजूरी देने का हकदार है.

इसलिए, एक भूमि मालिक किरायेदार को पैसे जमा के लिए एक प्रकार का मालिकाना हक दे सकता है. इस आंशिक मालिकाना हक का मतलब है कि किरायेदार का संपत्ति पर एक निश्चित अधिकार है, लेकिन जमीन पर नहीं.

इस मामले में, आंशिक मालिक किसी और को भी किराये पर परिसर दे सकता है लेकिन उसे जो किराया मिलेगा, वह उसे प्रॉपर्टी के असली मालिक और आंशिक मालिक, जो पहला किरायेदार है, उनके बीच विभाजित होगा. ऐसे प्रावधान के कारण असली मालिक की अतिरिक्त कमाई हो जाती है.

पगड़ी सिस्टम में मालिकाना हक का ट्रांसफर कैसे होता है?

एडवोकेट अंशुमन जगताप कहते हैं, ‘एनओसी के लिए मकान मालिक को भुगतान किए जाने वाले चार्जेज के बारे में कोई निर्धारित कानून नहीं है, अगर आप उस संपत्ति को बेचना चाहते हैं जो आपने पगड़ी के तहत खरीदी थी.’

यह केवल इतना बताता है कि आप अपने किरायेदार को ट्रांसफर करने से पहले मकान मालिक की पूर्व सहमति चाहते हैं. आमतौर पर आंशिक मालिक बिक्री का कुछ हिस्सा असली मालिक को देता है. बाजार प्रथाओं के अनुसार, यह 33% है लेकिन यह कम या अधिक भी हो सकता है. हालांकि ऐसा कोई नियम नहीं है.

क्या पगड़ी प्रॉपर्टी RERA के तहत आती हैं?

सरकार रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के तहत पगड़ी प्रॉपर्टियों को लाने पर विचार कर रही है, जो नियमित संपत्ति के लिए घर खरीदारों को समान फायदे और सुरक्षा प्रदान करेंगे. मौजूदा समझ के मुताबिक, पगड़ी प्रॉपर्टी में किरायेदार प्रोजेक्ट में सह-प्रोमोटर भी होते हैं. यह देखते हुए कि इनमें से अधिकांश पुरानी प्रॉपर्टीज हैं, ऐसी इकाइयों को पुनर्विकास करने की जरूरत है. एक बार यदि पगड़ी प्रॉपर्टीज रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (RERA) के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, तो अगर परियोजना में देरी हो रही है तो तो ऐसे किरायेदार मुआवजे के हकदार होंगे. फिलहाल महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ऐसे किरायेदारों से टैक्स लेती है और पगड़ी प्रॉपर्टीज की मरम्मत में मददद देती है.

पगड़ी प्रॉपर्टी रीडेवेलपमेंट बेनिफिट

अडिशनल फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI)
-2-5 पगड़ी भवनों के पुनर्विकास का कार्य करने वाले डेवेलपर्स के लिए 60 प्रतिशत एफएसआई प्रोत्साहन.

-5 से अधिक पगड़ी भवनों के पुनर्विकास का कार्य करने वाले डेवलपर्स के लिए 70 प्रतिशत तक प्रोत्साहन

किरायेदारों के लिए नए फ्लैट्स

-13 जून, 1996 से पहले नॉन सेस्ड इमारतों में रहने वाले लोग नए फ्लैटों के हकदार होंगे, अगर उनकी इमारतों का पुनर्विकास किया जाता है.

मुंबई में पगड़ी सिस्टम

पगड़ी घरों के लिए अतिरिक्त FSI: साल 2019 में, महाराष्ट्र सरकार ने डेवलपर्स के लिए एक अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) की अनुमति दी, जो पगड़ी संपत्तियों के पुनर्विकास के लिए तैयार थे. हालांकि, इससे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को 50% राजस्व हानि होगी. लेकिन अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है.

पगड़ी सिस्टम के लिए रीडेवेलपमेंट नियम: बीएमसी की गाइडलाइंस के मुताबिक, जो लोग 13 जून 1996 से पहले नॉन सेस्ड बिल्डिंग में रह रहे हैं वे नए फ्लैट्स के योग्य हैं, अगर बिल्डिंग को रीडेवेलप किया जाता है. यहां तक कि अगर किरायेदार ने स्वामित्व को औपचारिक और कानूनी रूप से स्थानांतरित कर दिया है, तो भी नया रहने वाला पात्र होगा.

पगड़ी भवनों के पुनर्विकास का काम करने वाले डेवलपर्स के लिए फायदे: डेवेलपमेंट कंट्रोल एंड प्रोमोशनल रेगुलेशन्स (DCPR) का मकसद इसे प्रोत्साहित करके पगड़ी की इमारतों के पुनर्विकास को बढ़ावा देना है.

यदि अचल संपत्ति डेवलपर ने दो से पांच पगड़ी भवनों का पुनर्विकास किया, तो वह 60% प्रोत्साहन एफएसआई के हकदार होंगे. अगर पांच से अधिक इमारतें हैं, तो एफएसआई प्रोत्साहन 70% तक जा सकता है.

पूछे जाने वाले सवाल

पगड़ी सिस्टम के किरायेदारों के लिए स्वामित्व अधिकार क्या हैं?

पगड़ी सिस्टम में, किरायेदार के प्रॉपर्टी पर कुछ अधिकार होते हैं लेकिन जमीन पर नहीं. किरायेदार या तो किसी और को परिसर किराये पर दे सकता है या फिर शेयर मालिक को देकर प्रॉपर्टी बेच सकता है.

पगड़ी सिस्टम के तहत किरायेदारी के अधिकार हासिल करने के नियम क्या हैं?

महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट 1999 के तहत पगड़ी सिस्टम कानूनी है. आमतौर पर पगड़ी किरायेदार की मौत के बाद किरायेदारी के अधिकार उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं, जो उसके साथ मरने के वक्त फ्लैट में रह रहे थे. वे मकानमालिक से उत्तराधिकारी के नाम पर नई किराये की रसीद जारी करने को कह सकते हैं.

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