केन बेतवा लिंक परियोजना: वह सब जो आपको जानना चाहिए


केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के तहत नदियों को जोड़ने वाली पहली परियोजना होगी। इससे सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट के समाधान होने की उम्मीद है।

देश के कई हिस्सों को प्रभावित करने वाली जल संकट की समस्या का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार नदियों को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना लेकर आई है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के तहत परिकल्पित केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत में कार्यान्वित होने वाली नदियों जोड़ने की पहली परियोजनाओं में से एक होगी। इस परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर के लिए वार्षिक सिंचाई प्रदान करना, पेयजल आपूर्ति को बढ़ावा देना और 103 मेगावाट की पनबिजली उत्पन्न करना है।

मार्च 2021 में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों ने परियोजना के कार्यान्वयन के लिए जल शक्ति मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

8 दिसंबर, 2021 को कैबिनेट ने केन बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना की फंडिंग और कार्यान्वयन को मंजूरी दी, जिसे करीब 44,605 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। कैबिनेट ने परियोजना के लिए 39,317 करोड़ रुपये के केंद्रीय समर्थन को भी मंजूरी दी, जिसमें 36,290 करोड़ रुपये का अनुदान और 3,027 करोड़ रुपये का लोन शामिल है।

 

केन बेतवा लिंक परियोजना: संक्षिप्त विवरण

केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) एनपीपी के प्रायद्वीपीय नदियों के विकास के तहत नियोजित 16 समान परियोजनाओं में से नदियों को जोड़ने वाली पहली परियोजना है। यह यमुना नदी की सहायक नदियों – मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन नदी और उत्तर प्रदेश में बेतवा नदी – को जोड़ेगी।

एनपीपी का मुख्य उद्देश्य जल संकट की समस्या से निपटने के लिए अतिरिक्त पानी वाले नदी के बेसिन से कम पानी वाले बेसिन तक पानी पहुंचाना है। एनपीपी में दो घटक शामिल हैं – हिमालयी नदियों का विकास और प्रायद्वीपीय नदियों का विकास।

केन बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना, जिसका निर्माण कार्यक्रम आठ वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है, को दो चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा:

  • प्रथम चरण: प्रथम चरण के दौरान दौधन बांध परिसर एवं उससे जुड़े कार्यों जैसे निम्न स्तरीय सुरंग, उच्च स्तरीय सुरंग, 221-किलोमीटर लंबी केन-बेतवा लिंक नहर एवं बिजलीघर बनाए जाएंगे।
  • द्वितीय चरण: द्वितीय चरण में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत लोअर ऑर बांध, बीना कॉम्प्लेक्स परियोजना और कोठा बैराज के लिए विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।

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केन बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना का घटनाक्रम

  • अगस्त 1980: एनपीपी तैयार किया गया।
  • अगस्त 2005: परियोजना के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
  • अप्रैल 2010: राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) ने केबीएलपी के पहले चरण के लिए डीपीआर को पूरा किया।
  • जनवरी 2014: एनडब्ल्यूडीए ने परियोजना के दूसरे चरण की डीपीआर पूरी की।
  • सितंबर 2014: आईएलआर (इंटरलिंकिंग ऑफ़ रिवर्स) कार्यक्रम को लागू करने के लिए नदियों को आपस में जोड़ने को लेकर विशेष समिति का गठन किया गया।
  • अप्रैल 2015: MoWR, नदी विकास और गंगा कायाकल्प द्वारा नदियों को जोड़ने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया।
  • मार्च 2021: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने केन बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना को लागू करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

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केन बेतवा लिंक परियोजना का नक्शा

केन-बेतवा लिंक परियोजना

(स्रोत: एनडब्ल्यूडीए )

केन और बेतवा नदी को जोड़ने वाली केन बेतवा लिंक परियोजना, जैसा कि नक़्शे में दिखाया गया है, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों को कवर करेगी।

 

केन बेतवा लिंक परियोजना की लागत

यह परियोजना लगभग 44,605 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरी की जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण, परियोजना को लागू करने के लिए special purpose vehicle (एसपीवी), का गठन किया जाएगा और केंद्र सरकार परियोजना की कुल लागत का 90% खर्च उठाएगी, जबकि शेष खर्च राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।

 

केन बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना: लाभ और प्रभाव

सरकार भारत में जल संसाधनों के सतत विकास की ओर नदियों को जोड़ने के कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में देखती है। जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई हिस्सों में जल संकट को दूर करने के संदर्भ में कई लाभ प्रदान करने के लिए केन बेतवा लिंक परियोजना को एक बहुउद्देश्यीय परियोजना के रूप में नियोजित किया गया है।

यह क्षेत्र बार-बार सूखे की स्थिति का सामना करता है जिसने क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रभावित किया है। इसके अलावा, कठोर चट्टान और सीमांत जलोढ़ इलाके के कारण यह क्षेत्र भूजल में समृद्ध नहीं है। इसलिए यह परियोजना मानसून के दौरान बाढ़ के पानी के उपयोग में मदद करेगी और कम बारिश वाले महीनों के दौरान पानी की उपलब्धता को स्थिर करेगी, खास तौर पर सूखे के वर्षों में।

केन और बेतवा नदी को जोड़ने वाली परियोजना वार्षिक सिंचाई और पनबिजली उत्पादन भी प्रदान करेगा। केन-बेतवा लिंक योजना से जिन जिलों को लाभ होगा उनमें मध्य प्रदेश में छतरपुर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन और पन्ना और उत्तर प्रदेश में झांसी, महोबा, बांदा और ललितपुर शामिल हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र के 62 लाख लोगों को भी इस परियोजना से बेहतर पेयजल आपूर्ति होगी।

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केन बेतवा लिंक परियोजना की ताजा जानकारी

केंद्र सरकार ने नेशनल इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर अथॉरिटी (एनआईआरए) स्थापित करने की योजना बनाई है जो अंतर-राज्यीय और अंतर-राज्य परियोजनाओं को लेने और धन अर्जित करने के लिए जिम्मेदार होगा।

परियोजना के पर्यावरण पर प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की गई

जहां एक ओर केन बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल संकट की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी और कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पन्ना टाइगर रिजर्व पर इसके प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है। राष्ट्रीय उद्यान के भीतर निर्माण कार्य की वजह से 46 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने की संभावना है। टाइगर रिजर्व कई गंभीर रूप से लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों का घर है। इसके अलावा, केन बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना के विकास से केबीएलपी के दौधन बांध के तहत 6,017 हेक्टेयर वन भूमि के जलमग्न होने का भी खतरा है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भारत में राष्ट्रीय नदी जोड़ने की परियोजना क्या है?

भारत में राष्ट्रीय नदी जोड़ने की परियोजना एक बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 14 नदियाँ और हिमालय से निकलने वाली 16 नदियाँ शामिल हैं।

भारत में कौन सी नदियाँ आपस में जुड़ी हुई हैं?

नदियों को जोड़ने की कई परियोजनाएं हैं जो अतीत में लागू हुई थीं। भारत में नदी जोड़ने वाली कुछ प्रमुख परियोजनाओं में महानदी-गोदावरी लिंक, पार-तापी-नर्मदा लिंक, मानस-संकोश-तिस्ता-गंगा लिंक, पेन्नैयार-शंकरबारानी लिंक आदि शामिल हैं।

केन नदी कहाँ से शुरू होती है?

केन नदी मध्य प्रदेश के कटनी जिले के अहिरगवां से शुरू होती है।

 

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