मकर संक्रान्ति का पर्व हर साल खरमास समाप्त होने के बाद सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने की तिथि पर मनाया जाता है। मकर संक्रांति को अलग- अलग जगहों पर अलग अलग नामों से मनाया जाता है।जैसे- कहीं पर पोंगल तो कहीं पर इसे खिचड़ी के नाम से भी मनाया जाता है।मकर संक्रान्ति का यह पर्व हर साल जनवरी के महीने में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य की पूजा अर्चना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस महीने में स्नान – दान की भी बड़ी महत्वा होती है।ऐसा माना जाता है कि जो भी लोग जनवरी इस महीने में मकर संक्रान्ति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं उन्हें कई नदियों मे स्नान के पुण्य की प्राप्त होती है। तथा उनके द्वारा किये गये सारे पापों से उन्हें मुक्ति मिलती है।
2024 में कब है मकर संक्रांति
पंचांग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रान्ति मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार मकर संक्रान्ति 2024 में 15 जनवरी को मनाई जायेगी। इसदिन सूर्यदेव दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से मकर राशि में प्रवेश करेंगे ,तो आप 2 बजे से मकर संक्रांति मना सकते हैं।
मकर संक्रान्ति 2024 सही डेट
मकर संक्रांति 15 जनवरी 2024 को, 2 बजकर 5 मिनट से मनाई जायेगी।
मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य देव की पूजा कैसे करें
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा उपासना विशेष तौर पर की जाती है।
इस दिन सूर्य देव को सुबह स्नान करके अर्घ्य दिया जाता है। तथा उनको अक्षत, धूप ,दीप आदि चीजें समर्पित की जाती हैं ।
मकर संक्रान्ति का महत्व
मकर संक्रांति का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान सूर्य देव की पूजा के लिये समर्पित होता है साथ ही इस सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो इसलिए भी मकर संक्रान्ति मनाई जाती है। इस दिन सरयू, गंगा, यमुना इन सभी पवित्र नदियों में स्नान का किया जाता है और साथ ही भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। तथा इस दिन दान का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है मकर संक्रान्ति के दिन दान करने से हमारे घर तथा जीवन दोनों में सुख- समृद्धि बनी रहती है। मकर संक्रान्ति पर हमारे घरों में खिचड़ी, पापड़, आदि विभिन्न प्रकार के भोजन बनाये जाते है तथा ये सभी भोजन बन जाने के बाद भगवान को भोग लगाया जाता है, उसके बाद घर सभी सदस्य इस भोजन को ग्रहण करते हैं।
मकर संक्रांति के दिन क्या करें
मकर संक्रांति के दिन सुबह सूर्योदय से पहले सोकर उठें , तथा किसी पास के पवित्र नदी या फिर किसी देव स्थान पर जाकर वहाँ किसी नदी में स्नान करें। अगर आप नदी पर जाकर स्नान नहीं कर सकते हैं तो आप अपने घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल की कुछ बूँदे मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- उसके बाद साफ या फिर नये वस्त्र पहने।
- उसके बाद सूर्य देव अर्घ्य दें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद आप सबसे पहले चावल और उड़द मिली हुई खिचड़ी तथा तिल, नया गुड़, निंबू, अदरक, देशी घी, तिल के लड्डू,नमक, मूली, आम या आंवले का अचार इन सभी वस्तुओं को एक बड़े पात्र में रखकर उसके चारों तरफ जल को घुमाकर उसे छुयें तथा उसके बाद उसे दान करें।
- इन सभी वस्तुओं को अपने पास के किसी मन्दिर में में दान करें या फिर किसी ब्राह्मण को दान करें।
- इस दिन गरीब तथा जरूरत मंदों को तिल, गुड़, तथा खिचड़ी का दान करना चाहिए। साथ ही इस दिन तिल, गुड़, ज्वार, बाजरा आदि से बने पकवान तथा नये कपड़ों को लेकर लोग अपने विवाहित बेटियों के घर लेकर जाते हैं. यह परंपरा हमारे घरों में सदियों से चली आ रही है।
- मकर संक्रांति के अपने पूरे घर में अच्छे से साफ़ सफाई करके पूरे घरमें गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए।
- मकर संक्रांति के दिन अपने घर घर सभी बड़ों तथा बुजुर्गों का पैर छुयें तथा उनसे आशीर्वाद लें।
मकर संक्रांति के दिन क्या न करें
- मकर संक्रांति के दिन किसी का भी अपमान नहीं करना चाहिए।
- इस दिन किसी भी तरह के तामसिक भोजन करने से बचना चाहिये।
- मकर संक्रांति के दिन प्याज, लहसुन आदि सभी चीजों के प्रयोग से भी बचना चाहिए।
- मकर संक्रान्ति के घर पर आये हुए किसी भी गरीब व्यक्ति को खाली हाथ वापस न लौटायें, उन्हें कुछ न कुछ जरूर दान करें।
- मकर संक्रांति के दिन हमें बिना स्नान किये भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- मकर संक्रान्ति के दिन माँस- मदिरा आदि के सेवन से भी हमें दूर रहना चाहिए।
- मकर संक्रांति के दिन हमें बिना स्नान किये भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- मकर संक्रान्ति के दिन नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
- मकर संक्रांति के दिन अपने बगीचे या फिर बालकनी के पेड़ पौधों की कटाई – छटाई से भी बचना चाहिए।
- मकर संक्रांति के दिन द्वार पर आये किसी भी व्यक्ति को भूखा नहीं जाने देना चाहिए, उन्हें कुछ न कुछ भोजन जरूर करायें।
मकर संक्रान्ति के दिन कौन- कौन सी वस्तुओं का करें दान
मकर संक्रान्ति के दिन ब्राह्मण तथा गरीबों को इन सभी वस्तुओं का दान करें।
काला तिल

गुड़

तिल के लडू

उड़द मिली हुई खिचड़ी

गुड़ की चिक्की

सर्दियों के कपड़े

कंबल

अदरक

घी

तेल

पैसे

मकर संक्रांति पर क्यों है पतंग उड़ाने की परंपरा

मकर संक्रान्ति के दिन पतंग उड़ाने की भी एक परंपरा है। इस दिन लोग अपने घरों की छतों और मैदानों में रंग- बिरंगी पतंग ऊड़ाते हैं। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने के पीछे का राज है अच्छी सेहत, दरसल मकर संक्रान्ति पर सूर्य से प्राप्त होने वाली धूप , मकर संक्रांति के दिन सूर्य से निकलने वाली सूर्य की किरणे के लिये अमृत के समान मानी जाती हैं। जो की विभिन्न रोगों को दूर करने में सहायक होती हैं। क्योंकि सर्दी के मौसम में हमें सर्दी, जुखाम, बुखार जैसे एलार्जिकल् प्राब्लम हो जाते हैं। इसी वजह से मकर संक्रान्ति के दिन पतंग उड़ाने से शरीर सूर्य की किरणों के संपर्क में रहता है और हमें इन सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।





