भारत में प्रधानमंत्री आवास योजना में अब तक क्या प्रगति हुई, जानिए?

शुरुआत में थोड़ी मुश्किलों के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) अर्बन जून 2015 में लॉन्च हुई थी. इस मिशन ने रफ्तार साल 2019 में पकड़ी. इस आर्टिकल में हम आपको PMAY-U की प्रगति के बारे में बताएंगे.

25 जून 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन (PMAY-U) का मकसद है भारत में सभी को खुद का घर मुहैया कराना. प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के बीच, यह योजना शहरी इलाकों में  निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों को घर देने का सपना साकार करती है. इस आर्टिकल में हम आपको भारत में पीएमएवाई-अर्बन योजना की प्रगति, शोहरत, कमियां, स्कोप और आगे के बारे में बताएंगे.

भारत में PMAY-U घरों की मांग

PMAY-U में सभी पुरानी आवासीय योजनाओं को शामिल किया गया है और इसका मतलब साल 2022 तक 20 मिलियन घरों की कमी को पूरा करना है. अब तक 4427 शहरों/कस्बों को पीएमएवाई-यू में शामिल किया गया है.

आवास की मांग केवल पिछले दशक में बढ़ी है, जिसमें अनुकूल जनसांख्यिकी, बढ़ता शहरीकरण, अर्थव्यवस्था, आय, छोटे परिवारों की संख्या, पहली बार घर खरीदारों की संख्या में इजाफा और व होम लोन की आसान उपलब्धता शामिल है.

अनुकूल जनसांख्यिकी कामकाजी जनता की उम्र (18-59 साल) 2015 में 819 मिलियन थी. अनुमान है कि साल 2030 तक इस कामकाजी जनसंख्या में 150 मिलियन लोग और जुड़ेंगे. जबकि 2050 तक  212 मिलियन. चूंकि छोटे परिवारों का आकार बढ़ रहा है इसलिए घरों की डिमांड में इजाफा हो रहा है.
बढ़ता शहरीकरण शहरीकरण का प्रतिशत साल 2001 में 27.9 था, जो 2018 तक आते आते 34 प्रतिशत हो गया. अनुमान है कि 2050 तक यह 52.8 प्रतिशत हो जाएगा.

जनसंख्या वाले शहर > 10 लाख: 26 (1995), 59 (2015) और 2033 में 78

 

अर्थव्यवस्था में वृद्धि और बढ़ता सर्विसेज सेक्टर

कुल जीडीपी में सर्विस सेक्टर का शेयर वित्त वर्ष (2012) में 49 प्रतिशत था जो वित्त वर्ष 2019 में 54.2 तक पहुंच गया. वित्तीय वर्ष 2019 में अमेरिकी डॉलर 177 के राजस्व के साथ आईटी-बीपीएम प्रमुख विकास इंजन है जो वित्त वर्ष 14-19 के दौरान 10.8 के सीएजीआर में विकसित हुआ है. वित्त वर्ष 2019 में आईटी-बीपीएम ने 40 लाख से ज्यादा पेशेवरों को नौकरी दी थी.
आय के बढ़ते चरण भारत की प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2012 में 1323.50 डॉलर थी, जो 2019 तक 1982.65 अमेरिकी डॉलर हो गई. 2025 तक प्रति व्यक्ति आय 6000 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. मिडिल और अपर क्लास घरों में भी इजाफा हो रहा है.
पैसों की आसान उपलब्धता गिरवी वित्त तक आसान पहुंच, लोन की लंबी अवधि, मूल्य अनुपात के लिए ज्यादा लोन और टैक्स प्रोत्साहन ने घर के स्वामित्व को और ज्यादा किफायती बना दिया है.

 

 

कंपोनेंट्स मिशन
झुग्गी पुनर्विकास इसका मकसद झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं के साथ अच्छे बने हुए घर मुहैया करना है. यह एक संसाधन के रूप में भूमि का फायदा उठाता है और निजी भागीदारी की मदद से झुग्गियों का पुनर्विकास करता है.
पार्टनरशिप के जरिए किफायती आवास सार्वजनिक या निजी क्षेत्र के सहयोग से वित्तीय सहायता और विकासशील परियोजनाओं की पेशकश करके, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को किफायती आवास मुहैया कराना. सरकारी सहायता मुहैया कराई जाएगी, अगर प्रोजेक्ट में 250 से ज्यादा इकाइयां हैं, जिनमें से कम से कम 35%  ईडब्ल्यूएस/ एलआईजी / एमआईजी श्रेणी में है. सरकार ने किफायती आवास के लिए एक मसौदा मॉडल पीपीपी नीति भी तैयार की है.
लाभार्थी की अगुआई वाले व्यक्तिगत घर का निर्माण या इजाफा नया घर बनाने या कुछ शर्तों के तहत मौजूदा घर को बढ़ाने के लिए ईडब्ल्यूएस श्रेणी में लोगों को वित्तीय सहायता मुहैया कराना.
क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम एलआईजी और ईडब्ल्यूएस कैटिगरी में पहली बार घर खरीद रहे लोगों को सब्सिडी मुहैया कराना.

 

श्रेणी वर्ग मीटर (कालीन क्षेत्र) में आवास का आकार सालाना आय (लाख में) लोन की राशि (लाख में) सब्सिडी (प्रतिशत में)
MIG-1 160 6-12 9 तक 4
MIG-2 200 12-18 12 तक 3

 

पीएमएवाई-यू में सब्सिडी कैसे कैलकुलेट करें:

आधिकारिक वेबसाइट पर सब्सिडी कैलकुलेटर उपलब्ध है. आपको सिर्फ सब्सिडी कैलकुलेटर पर क्लिक करके आगे बढ़ जाना है. आपको परिवार की सालाना आय, लोन की राशि और अवधि इत्यादि भरनी पड़ेगी.

PMAY-U की प्रगति पर नजर रखना:

इस योजना पर शुरुआती रफ्तार धीमी थी लेकिन वित्त वर्ष 2019 में इस योजना ने रफ्तार पकड़ी. जनवरी 2018 में, 8.5 प्रतिशत प्लान्ड हाउस पूरे हो पाए थे. हालांकि, जून 2019 तक पूरा होने की दर 31% से अधिक हो गई, क्योंकि सरकार ने मंजूर घरों के पूरा होने पर अपना ध्यान केंद्रित किया. पूरे हो चुके मकानों का ऑक्युपेंसी रेट स्थिर बना हुआ है और जून 2019 में यह 92% के करीब था.

2020 में, किफायती आवास की वैध मांग 1.12 करोड़ थी. दिसंबर 2019 तक, एक करोड़ घरों को मंजूरी दी गई थी.

मिशन के लिए अब तक दी गई केंद्रीय सहायता 1.66 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से 72,646 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल निवेश 6.41 लाख करोड़ रुपये का है.

टाइमलाइन हाइलाइट मकसद
जारी टेक्नोलॉजी सब-मिशन (TSM) लगभग 33 वैकल्पिक प्रौद्योगिकियों की पहचान की गई है, जिनमें से केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग (CPWD) ने 29 प्रौद्योगिकियों के लिए SoR जारी किया है. ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर 15 लाख इकाइयों का निर्माण किया गया है.
अक्टूबर 2 2019 से दिसंबर 2019 तक अंगीकार कैंपेन पीएमएवाई-यू का फायदा उठाने वालों के लिए एलपीजी कनेक्शन, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, सौर और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए उज्जवला को बढ़ावा देने और उपलब्ध कराने के लिए डोर-टू-डोर गतिविधियों, वार्ड और शहर-स्तरीय घटनाओं के साथ एक अभियान.
निरंतर PMAY परियोजनाओं का सोशल ऑडिट लाभार्थियों और हितधारकों पर PMAY-U की प्रगति और प्रभाव का अध्ययन. फीडबैक सीधे लाभार्थी समूहों, संसद में निर्वाचित प्रतिनिधियों, राज्य विधानसभाओं और शहरी-स्थानीय निकायों और स्थानीय स्व-शासन निकायों के प्रतिनिधियों से लिया जाता है.
निरंतर लाभार्थियों के लिए पीएमएवाई-यू ऐप लाभार्थी पूरी इकाइयों की तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं और उनके आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं.
मार्च 2019 दुनिया में घरों में बदलती टेक्नोलॉजी हाउसिंग कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए दुनिया भर से नई तकनीकों की पहचान करना जो लागत प्रभावी, टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल और आपदा को झेलने योग्य हैं. भविष्य की 72 संभावित टेक्नोलॉजीज की पहचान की गई है.
25 नवंबर 2019 CLSS आवास पोर्टल (CLAP)

 

सभी स्टेकहोल्डर्स को एक रियल टाइम एनवायरनमेंट में जोड़ना.
जनवरी 14 2020 हाउसिंग फॉर ऑल (डॉट कॉम) लॉन्च हुआ उन सस्ती परियोजनाओं को उपलब्ध कराना, जिन्हें ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल गए हैं.
फरवरी 14 2020 45 दिवसीय अखिल भारतीय ऑनलाइन घर खरीदने का त्योहार शुरुआती 15 दिनों के लिए, खरीदार ऑफर देखने और अपने घरों को शॉर्टलिस्ट करने में सक्षम थे और 1 मार्च से महीने के अंत तक घरों की खरीद शुरू करने में सक्षम होंगे.
मई 2020 पीएमएवाई CLSS का विस्तार CLSS योजना को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया था. इससे 70,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद थी.
8 जुलाई 2020 किफायती रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स को कैबिनेट की मंजूरी प्रवासियों और शहरी गरीबों को किफायती किराये का घर देने के लिए PMAY सस्ती किराये की आवास योजना शुरू की गई. इसे पीएमएवाई-यू की उप-योजना के रूप में माना जाएगा.

पीएमएवाई-यू को प्रभावित करने वाली मुख्य रुकावटें

शहरी इलाकों में जमीन की दुर्लभ उपलब्धता.
-ज्यादा यूनिट दर, खासतौर पर मुंबई महानगरीय क्षेत्र और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में.
-निजी डेवलपर्स से हल्की प्रतिक्रिया.
-कच्चे माल की बढ़ती लागत.
-संचालन से जुड़ी चुनौतियां, जो वित्तीय संस्थानों को बिना क्रेडिट हिस्ट्री, अनियमित और अनौपचारिक आय स्रोत वाले गरीबों को फायदे पहुंचाने से रोकते हैं.

PMAY-U चुनौतियों से कैसे निपट सकता है?

प्राइम लैंड अनलॉक: सरकार को मुख्य जगहों पर विकसित की जाने वाली जमीन को छोड़ना होगा, जो सरकारी संस्थाओं या शहर के नो-डेवेलपमेंट जोन्स में है. उन्हें इन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को आवंटित करना चाहिए. NAREDCO के वाइस प्रेसिडेंट, वेस्ट राजन बंडेलकर ने कहा, ‘शहर में मौजूद निजी और खाली पड़े वन भूमि जैसे ठाणे, बोरीवली, आदि का उपयोग किया जाना चाहिए.’

प्रक्रियाओं को आसान बनाना: हालांकि पारदर्शिता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को कारगर बनाने के लिए बहुत सारी जमीन को कवर किया गया है, फिर भी काफी काम किया जाना बाकी है. सरकार को प्रक्रियाओं को कारगर बनाने के लिए देश भर में एक ऑनलाइन, सिंगल विंडो अप्रूवल सिस्टम को लागू करना चाहिए.

डेटाबेस को मजबूत बनाना: ईडब्ल्यूएस/ एलआईजी लाभार्थियों के लिए एक शहर-वार डेटाबेस बनाया जाना चाहिए, ताकि सही लाभार्थियों की पहचान की जा सके. सरकार को पहचान पत्र/भूमि का टाइटल भी प्रदान करना चाहिए, विशेष रूप से झुग्गी-झोपड़ी के लोगों के मामले में.

मानकीकृत प्रोजेक्ट की योजना और डिजाइन: प्रोजेक्ट प्लान/यूनिट प्लान के साथ गाइडेंस डॉक्युमेंट्स का एक सेट तैयार किया जा सकता है, जो डेवलपर्स द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है और प्रोजेक्ट्स के लिए अप्रूवल प्रोसेस को तेजी से ट्रैक करने में मदद कर सकता है, जिससे प्रयास, समय और लागत की बचत होती है और अमल में लाने के मुद्दों से बचा जाता है.

सरकार ने कुछ शहरों में भवन निर्माण योजना की मंजूरी, इंस्पेक्शन और ऑक्युपेंसी कम कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने करने के लिए भवनों के रिस्क बेस्ड क्लासिफिकेशन की शुरुआत की है और देश भर में इस प्रक्रिया को लागू करने पर गौर कर सकती है.

इनोवेटिव और लो कॉस्ट टेक्नोलॉजी: सरकार डेवलपर्स को अपनी परियोजनाओं में इन तकनीकों को लागू करने में मदद करने के लिए कम लागत वाली टेक्नोलॉजी/निर्माण के तरीकों और कच्चे माल के उपयोग के बारे में दिशानिर्देशों का एक सेट तैयार कर सकती है. सिग्नेचर ग्लोबल के फाउंडर और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल कहते हैं, ‘चीन, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर की कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी भारत में इस्तेमाल की जा सकती है. सरकार को वहां से आने वाली टेक्नोलॉजी पर ड्यूटी और टैक्स घटाना चाहिए.’

पूछे जाने वाले सवाल?

PMAY स्कीम के लिए कौन योग्य हैं?

जिन लोगों के पास पक्का घर नहीं है और किसी हाउसिंग स्कीम के तहत केंद्र से सहायता नहीं मिली है, वे पीएमएवाई के योग्य हैं. लाभार्थी के परिवार में पति, पत्नी, कुंवारा बेटा या बेटियां शामिल हैं.

कार्पेट एरिया क्या है?

जो एरिया दीवारों के बीच होता है, वो असली एरिया होता है. जिसमें आप कार्पेट बिछाते हैं, वो कार्पेट एरिया होता है. इसमें अंदरूनी दीवारों की मोटाई शामिल नहीं होती.

PMAY के तहत कितनी सब्सिडी हासिल की जा सकती है?

MIG I और MIG II के लिए, क्रमशः 9 लाख और 12 लाख रुपये तक की लोन राशियों पर 4% और 3% की ब्याज सब्सिडी वैध है.

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