2025 में मेट्रो शहरों और गैर-मेट्रो शहरों में HRA (हाउस रेंट अलाउंस) की गणना

भारत में एचआरए (HRA) के लिए मेट्रो शहरों और नॉन-मेट्रो शहरों में टैक्स कटौती को लेकर फर्क होता है।

घर का किराया भत्ता (HRA) अधिकतर लोगों की सैलरी का एक अहम हिस्सा होता है। इनकम टैक्स नियम 1962 के नियम-2A के तहत, यदि कोई व्यक्ति किराए के मकान में रहता है तो उसकी सैलरी का यह हिस्सा पूरी तरह टैक्स के दायरे में नहीं आता। मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 50 फीसदी तक HRA में टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर नॉन-मेट्रो शहरों में रहने वालों को यह छूट 40 फीसदी तक मिलती है। इसका मतलब ये है कि मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों में HRA की गणना में काफी ज्यादा अंतर होता है। इस आर्टिकल में आपको ऐसे ही सवालों के जवाब मिलेंगे, जैसे- क्या HRA की गणना में हैदराबाद मेट्रो शहर माना जाता है? क्या पुणे को HRA के लिए मेट्रो सिटी की श्रेणी में रखा गया है? और मेट्रो व नॉन-मेट्रो शहरों में HRA की गणना कैसे की जाती है?

Table of Contents

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए HRA (हाउस रेंट अलाउंस) क्या होता है? 

यदि नियोक्ता (एम्प्लॉयर) आपको HRA का लाभ देता है तो आप आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-10(13A) और नियम-2A के तहत टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं।  

लेकिन यदि आपका नियोक्ता HRA नहीं देता तो ऐसी स्थिति में आप आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-80GG के अंतर्गत किराए पर रहने के लिए टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

पुरानी कर व्यवस्था बनाम नई कर व्यवस्था में HRA छूट

पुरानी कर व्यवस्था नई कर व्यवस्था
धारा-10(13ए) के तहत पूर्ण एचआरए छूट का लाभ उठाया जा सकता है।  कोई HRA लाभ नहीं लिया जा सकेगा। 
अन्य कटौतियां जैसे 80सी, 80डी का ऑप्शन चुना जा सकता है।  कम कटौती होती है। 
टैक्स की दरें इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि बहुत सी छूटें मिलती हैं। कम कर कटौतियों के कारण कम टैक्स दरें लागू होती हैं।
अगर एचआरए क्लेम ज़्यादा है तो बेहतर ऑप्शनष  छोटे एचआरए क्लेम वालों के लिए ज्यादा उपयुक्त। 
धारा 10(13ए) के तहत पूर्ण एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं।   

इस बात का विशेष ध्यान रखें कि HRA (हाउस रेंट अलाउंस) का लाभ लेने के लिए आपको पुराने टैक्स सिस्टम को चुनना होगा, क्योंकि यह सुविधा नए टैक्स सिस्टम में शामिल नहीं है। यदि आप ये ऑप्शन चुनना भूल जाते हैं तो ऑटोमेटिकली आपको नया टैक्स सिस्टम में मान लिया जाएगा, जिससे आप HRA का लाभ नहीं ले पाएंगे। हालांकि, देशभर में कई लोगों की मांग है कि HRA को नए टैक्स सिस्टम में भी शामिल किया जाए। चूंकि आवास एक बुनियादी जरूरत है और किराए पर रहने वाले लोगों की तनख्वाह का बड़ा हिस्सा इसी मद में खर्च हो जाता है तो ऐसे में अगर HRA को नए टैक्स सिस्टम में शामिल किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद होगा। असल में अधिकांश लोग केवल इसलिए पुराने टैक्स सिस्टम को चुनते हैं, क्योंकि नए सिस्टम में HRA का लाभ नहीं मिलता।

 

एचआरए की गणना में मेट्रो शहरों का महत्व 

भारत के शहरों को एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) की गणना के लिए X, Y और Z कैटेगिरी में बांटा गया है। यह वर्गीकरण 7वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित किया गया था, ताकि अलग-अलग शहरों में रहने की लागत के अनुसार, कर्मचारियों को उचित और संतुलित भत्ता मिल सके। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े महानगर X कैटेगिरी में आते हैं और इन्हें मूल वेतन का 30 फीसदी एचआरए दिया जाता है। अहमदाबाद, पुणे और हैदराबाद जैसे शहर Y कैटेगिरी में रखे गए हैं, जिन्हें 20 फीसदी एचआरए मिलता है। बाकी सभी छोटे शहर और कस्बे Z कैटेगिरी में आते हैं, जहां कर्मचारियों को 10 फीसदी एचआरए मिलता है।

 

HRA गणना: भारत के प्रमुख मेट्रो शहरों की सूची

शहर वर्ग 2024 में जनसंख्या
दिल्ली एक्स लगभग 33.8 मिलियन
मुंबई एक्स लगभग 21.7 मिलियन
बेंगलुरु एक्स लगभग 14 मिलियन
चेन्नई एक्स लगभग 12 मिलियन
कोलकाता एक्स लगभग 15.6 मिलियन
हैदराबाद एक्स लगभग 11 मिलियन
पुणे एक्स लगभग 5 मिलियन
अहमदाबाद एक्स लगभग 8.8 मिलियन

2025 में भारत में HRA गणना के लिए मेट्रो शहर कौन से होंगे?

भारत में HRA की गणना के लिए 4 शहरों को मेट्रो सिटी के रूप में मान्यता प्राप्त है। ये शहर हैं – 

  • दिल्ली
  • मुंबई
  • कोलकाता
  • चेन्नई

2025 में भारत में HRA गणना के लिए गैर-मेट्रो शहर कौन से होंगे?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आने वाले शहरों को HRA टैक्स छूट की गणना में मेट्रो सिटी नहीं माना जाता। इसी तरह देश के कुछ बड़े शहर, जिनका आकार, जनसंख्या और किराया मूल्य बहुत अधिक है, उन्हें भी मेट्रो शहरों की श्रेणी में नहीं गिना जाता। ऐसे शहरों में रहने वाले लोग HRA पर 50 फीसदी टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकते, भले ही इन शहरों में किराए काफी ज्यादा क्यों न हों। ये शहर हैं –  

  • नोएडा
  • गुड़गांव
  • फरीदाबाद
  • नवी मुंबई
  • ठाणे
  • बेंगलुरू 
  • हैदराबाद
  • पुणे
  • अहमदाबाद

आपको बता दें कि भारत सरकार बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के साथ मेट्रो शहरों के रूप में पहचान देती है, लेकिन एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) पर 50 फीसदी टैक्स छूट के संदर्भ में ये तीनों शहर ‘मेट्रो सिटी’ की मान्यता नहीं पाते हैं। बेंगलुरु लंबे समय से इस लिस्ट में शामिल होने की कोशिश कर रहा है लेकिन 2024 में भी इसे यह दर्जा नहीं प्राप्त हो सका। केंद्र सरकार ने 8 अगस्त 2024 को साफ तौर पर ऐलान किया था कि एचआरए उद्देश्यों के लिए अब किसी नए शहर को मेट्रो सिटी का दर्जा नहीं दिया जाएगा। ऐसे में इंडस्ट्रीज से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि यदि बेंगलुरु को एचआरए में 50 फीसदी छूट के लिए मेट्रो सिटी का दर्जा दिया जाता है तो इससे रियल एस्टेट सेक्टर को और अधिक गति मिल सकती है।

 

HRA कैलकुलेशन: 2025 में एचआरए क्लेम करने के तरीके

साल 2025 में वेतनभोगी कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के रूप में टैक्स में छूट लेने के लिए निम्न में से सबसे कम राशि को मान्य किया गया है – 

  • वास्तविक एचआरए, जो उन्हें मिलता है। 
  • यदि कर्मचारी मेट्रो शहर में रहता है तो मूल वेतन + महंगाई भत्ता (DA) का 50 फीसदी और नॉन-मेट्रो में 40 फीसदी। 
  • वास्तविक किराया, जो कर्मचारी को दिया गया है, उसमें से मूल वेतन + DA का 10 फीसदी घटाने के बाद की राशि। 

यहां इस बात का ध्यान दें कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी निर्धारित नीति के अनुसार सरकारी आवास प्राप्त करने में असमर्थ होता है तो उसे HRA क्लेम करने के लिए एक HRA सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।

HRA कैलकुलेटर क्या होता है?

HRA कैलकुलेटर एक ऐसा टूल होता है, जो आपको इनकम टैक्स में छूट पाने के लिए मिलने वाले हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की गणना करने में मदद करता है। यह कैलकुलेटर इस्तेमाल में आसान होता है और तेजी से काम करने के साथ-साथ सटीक नतीजे देता है। जब आपको यह पता होता है कि टैक्स में कितनी छूट मिलेगी और कितना टैक्स देना होगा।

HRA छूट कैलकुलेटर कैसे आपकी मदद करेगा?

एचआरए छूट कैलकुलेटर का उपयोग करने के निम्नलिखित लाभ हैं – 

  • सटीक गणना

जैसे ही आप HRA कैलकुलेटर में मूल वेतन, वास्तविक किराया, प्राप्त HRA आदि जानकारी सबमिट करते हैं तो कैलकुलेटर तुरंत सटीक कैलकुलेशन कर देता है। इससे किसी भी तरह की गणितीय गलती की संभावना बहुत कम हो जाती है।

इसके अलावा HRA छूट की गणना करते समय कई घटक काम करते हैं। जब इन सभी बातों को ध्यान में रखकर मैनुअली (हाथ से) गणना करनी हो तो यह कठिन और भ्रमित करने वाला हो सकता है। ऐसे में ऑनलाइन कैलकुलेटर इन सभी घटकों को ध्यान में रखकर तेजी और आसानी से सटीक रिजल्ट देता है।

  • कर की योजना और बचत

HRA कैलकुलेटर, आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10(13A) के तहत अधिकतम टैक्स बचत करने में मदद करता है। कैलकुलेटर में दर्ज की गई जानकारी के आधार पर आप यह समझ सकते हैं कि कैसे अपने टैक्स को कम किया जा सकता है और अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को बेहतर तरीके से दिशा दे सकते हैं। 

  • व्यक्तिगत परिणाम

कोई भी कर्मचारी किसी भी स्थान पर HRA कैलकुलेटर का उपयोग कर सकता है और अपने द्वारा सबमिट की गई वित्तीय जानकारी के आधार पर यह उन्हें व्यक्तिगत परिणाम दे सकता है। 

  • समय की बचत 

मैन्युअल गणना जहां काफी ज्यादा समय लेने वाली होती है और थकाऊ और बोझिल होती है, वहीं HRA कैलकुलेटर का उपयोग करना बेहद आसान है। इसके लिए किसी तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं होती और कुछ ही मिनटों में सटीक रिजल्ट मिल जाता है।

  • विभिन्न परिदृश्यों का विश्लेषण

जब आप HRA छूट के बारे में सोचते हैं तो आप अलग-अलग संभावनाओं का विश्लेषण कर सकते हैं, जैसे कि अगर आप किसी नए शहर में शिफ्ट करते हैं या मकान मालिक किराया बढ़ा देता है तो आपको कितनी HRA छूट मिल सकती है। इस तरह की जानकारी आपके निर्णय लेने में मदद करती है।

  • अनुपालन

हाउस रेंट कैलकुलेटर से आपको न सिर्फ सटीक नतीजे मिलते हैं, बल्कि इससे आप अपनी टैक्स देनदारी के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा करने से आप टैक्स नियमों का भी आसानी से पालन कर सकेंगे और किसी भी जुर्माने से खुद को बचा सकते हैं।

 

HRA कैलकुलेटर में भरने के लिए इनपुट्स

  • मूल वेतन
  • महंगाई भत्ता
  • नियोक्ता से प्राप्त HRA
  • कर्मचारी द्वारा भुगतान किया गया किराया
  • कर्मचारी जिस शहर में रहता है- मेट्रो/नॉन-मेट्रो

जब आप ये सभी जानकारियां HRA कैलकुलेटर में दर्ज करते हैं तो आपको यह पता चल जाएगा कि आपको कितनी HRA राशि पर टैक्स से छूट मिलेगी। हालांकि इंटरनेट पर कई तरह के HRA कैलकुलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि आप इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आधिकारिक HRA कैलकुलेटर का ही उपयोग करें। इनकम टैक्स वेबसाइट पर HRA कैलकुलेटर एक्सेस करने के लिए इस लिंक पर जा सकते हैं –
https://incometaxindia.gov.in/Pages/tools/house-rent-allowance-calculator.aspx

 

2025 में मेट्रो शहरों और गैर-मेट्रो शहरों में HRA (हाउस रेंट अलाउंस) की गणना

 

 

उदाहरण के लिए, आप इसमें बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता, कमीशन, प्राप्त एचआरए, दिया गया किराया आदि जानकारियां सबमिट करें और जैसे ही आप ‘कैलकुलेट’ ऑप्शन पर क्लिक करेंगे तो  आपको छूट योग्य हाउस रेंट अलाउंस और टैक्स योग्य हाउस रेंट अलाउंस की जानकारी मिल जाएगी, जिसके आधार पर आप अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग तैयार कर सकते हैं।

विशेष HRA छूट गणना मामले, जिनके लिए आप HRA कैलकुलेटर का कर सकते हैं उपयोग

हालांकि कुछ मामलों में एचआरए छूट की गणना सीधे तरीके से की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में कई कारकों को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

  • आंशिक निवास अवधि: यदि कर्मचारी किराए के मकान में पूरे साल न रहकर केवल कुछ महीनों तक ही रहता है तो एचआरए छूट भी उसी अनुपात में दी जाती है। यानी कर्मचारी ने जितने महीने किराया दिया गया और मकान में रहा, उन्हीं महीनों के हिसाब से छूट की गणना की जाती है। 
  • वर्ष के बीच में किराए की राशि में बदलाव: अगर किसी वित्तीय वर्ष में किराए की राशि बदल जाती है तो एचआरए छूट की गणना अलग-अलग अवधियों के किराए को ध्यान में रखते हुए की जाती है।
  • खुद के मकान में रहना: यदि कर्मचारी अपने स्वामित्व वाले मकान में रह रहा है तो उसे एचआरए छूट का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, यदि कर्मचारी का खुद का मकान किसी और शहर में है और वह नौकरी के कारण किराए के मकान में किसी अन्य शहर में रह रहा है तो उसे किराए के मकान के लिए एचआरए छूट मिल सकती है।
  • जीवनसाथी के स्वामित्व वाले मकान में रहना: यदि कर्मचारी अपने जीवनसाथी के नाम से रजिस्टर्ड मकान में रह रहा है और उसे किराया दे रहा है तो वह एचआरए छूट का दावा कर सकता है, लेकिन ऐसी परिस्थिति में इस बात का ध्यान रखें कि इस स्थिति में दिए गए किराए की राशि बाजार दर के अनुरूप होनी चाहिए ताकि छूट की गणना में कोई परेशानी न हो।

मेट्रो शहरों में HRA की गणना: एक उदाहरण

दिल्ली में रहने वाले रजत माखिजा की बेसिक मासिक सैलरी 50,000 रुपए है और उन्हें 18,000 रुपए प्रतिमाह HRA मिलता है। वे किराए के मकान में रहते हैं, जिसके लिए वे 15,000 रुपए प्रतिमाह किराया चुकाते हैं। उनकी HRA छूट की गणना इन तीन ऑप्शन में से सबसे कम राशि पर की जाएगी- 

  • बेसिक सैलरी का 50 फीसदी: 25,000 रुपए
  • वास्तविक HRA: 18,000 रुपए
  • वास्तविक किराया – बेसिक सैलरी का 10 फीसदी = ₹15,000 – ₹5,000 = ₹10,000

(इन तीनों में से सबसे कम राशि 10,000 रुपए होगी, जिसे HRA छूट के रूप में माना जाएगा।)

इस तरह पूरे वर्ष की छूट होगी: 10,000 रुपए × 12 = 1.20 लाख रुपए। 

नॉन-मेट्रो शहरों में HRA की गणना: एक उदाहरण

अवनी पाठक की बेसिक सैलरी 20,000 रुपए है। उन्हें 7,000 रुपए HRA मिलता है और वे लखनऊ में किराए के मकान के लिए 6,000 रुपए प्रतिमाह देती हैं। ऐसे में HRA में मिलने वाली टैक्स छूट इन तीन ऑप्शन में से सबसे कम राशि पर आधारित होगी – 

  • बेसिक सैलरी का 40 फीसदी: 8,000 रुपए
  • वास्तविक HRA: 7,000 रुपए
  • वास्तविक किराया – बेसिक सैलरी का 10 फीसदी: ₹6,000 – ₹2,000 = ₹4,000

(इन तीनों में सबसे कम राशि 4,000 रुपए है, इसलिए हर महीने 4,000 रुपए की छूट मिलेगी।)

इस तरह पूरे साल भर की टैक्स छूट बनती है 4,000 रुपए × 12 = 48,000 रुपए

HRA का दावा करने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?

  • किराए की रसीद। 
  • रेंट एग्रीमेंट। 
  • मकान मालिक का पत्र, जिसमें यह लिखा हो कि आपने उनसे मकान किराए पर लिया है। 
  • मकान के किराए के भुगतान का प्रमाण। 
  • फॉर्म-12BB या सैलरी स्लिप। 
  • किराएदार और मकान मालिक, दोनों के पैन कार्ड की कॉपी। 

क्या HRA और होम लोन के ब्याज पर टैक्स कटौती दोनों का दावा किया जा सकता है?

हां, आप HRA टैक्स लाभ और होम लोन ब्याज पर कटौती दोनों का दावा कर सकते हैं।

क्या HRA क्लेम करने के लिए मकान मालिक का पैन कार्ड दिखाना जरूरी है?

अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और सालाना 1 रुपए लाख से ज्यादा किराया दे रहे हैं तो एचआरए क्लेम करते समय मकान मालिक का पैन कार्ड देना जरूरी होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको HRA का लाभ नहीं मिलेगा। यदि आपके मकान मालिक के पास पैन कार्ड नहीं है तो उन्हें खुद एक घोषणा-पत्र (self-declaration) पर साइन करके जमा करना होगा।

मकान मालिक के पैन कार्ड के बिना आप कितना HRA दावा कर सकते हैं?

अगर आपके पास मकान मालिक का पैन कार्ड नहीं है तो HRA छूट लेने के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में किराएदार केवल दिए गए किराए की 50 फीसदी राशि पर ही छूट का दावा कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई किराएदार 20,000 रुपए प्रति माह किराया देता है और मकान मालिक का पैन कार्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वह सिर्फ 10,000 रुपए पर ही HRA छूट ले सकता है। अगर मकान मालिक पैन कार्ड देने से इनकार कर दे तो किराएदार एक घोषणापत्र (डिक्लरेशन) पेश कर सकता है, जिसमें यह स्पष्ट हो कि मकान मालिक ने अपना पैन कार्ड शेयर नहीं किया है। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि अगर किराया 15,000 रुपए प्रति माह से अधिक है तो HRA छूट पाने के लिए मकान मालिक का पैन कार्ड देना अनिवार्य है।

 

अगर कोई व्यक्ति किराए की रसीदें समय पर अपने नियोक्ता को जमा करना भूल जाए तो उसे क्या करना चाहिए?

अगर आप HRA (हाउस रेंट अलाउंस) क्लेम करते समय अपनी कंपनी के एचआर को किराए की रसीदें देना भूल गए हैं, तो इसमें ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय सीधे HRA का दावा भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी टैक्सेबल इनकम को फिर से एडजस्ट करना होगा और इसमें HRA की छूट को शामिल करें और नई (घटी हुई) टैक्सेबल इनकम के हिसाब से टैक्स की गणना करें। अगर आपकी ओर से ज्यादा टैक्स कट गया है तो आपको इनकम टैक्स रिफंड मिल जाएगा।

 

एनआरआई मकान मालिक को किराया देने वाले किराएदारों के लिए नियम क्या है?

यदि कोई व्यक्ति किसी एनआरआई (गैर-प्रवासी भारतीय) मकान मालिक को किराया दे रहा है तो उसे किराया देने से पहले कुल राशि का 30 फीसदी हिस्सा टैक्स के रूप में काटना (TDS कटौती) जरूरी है। यह नियम आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-195 के तहत आता है, जिसके अनुसार किसी भी एनआरआई को किए जाने वाले भुगतान, चाहे वह किराया ही क्यों न हो, उस राशि पर टीडीएस काटना अनिवार्य है। सामान्यतः किराया राशि का 30 फीसदी ही टीडीएस काटा जाता है और फिर बचे हुए पैसे एनआरआई मकान मालिक को दिए जाते हैं। काटा गया टैक्स किराएदार को भारत सरकार को जमा करना होता है, जो कि एनआरआई की ओर से किया जाता है। इसके बाद किराएदार को एक TDS रिटर्न दाखिल करना होता है और साथ ही NRI मकान मालिक को TDS प्रमाण पत्र (TDS Certificate) भी देना होता है। अगर किराएदार TDS नहीं काटता है या गलत गणना करता है तो उसे जुर्माना, ब्याज और संभावित रूप से कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यह नियम समझना और पालन करना बेहद जरूरी है।

 

क्या आप अपने माता-पिता को किराया देकर HRA क्लेम कर सकते हैं? 

हां, यदि आप अपने माता-पिता को वास्तव में किराया दे रहे हैं तो आप HRA क्लेम कर सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि किराया देना, किराए की पक्की रसीद लेना और पूरे लेन-देन का रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी है। इस प्रक्रिया का कोई भी हिस्सा अधूरा रह जाए तो आपका HRA क्लेम अमान्य हो सकता है और इससे कानूनी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ सकता है।

यदि आपको अपने नियोक्ता से HRA नहीं मिलता है तो आप क्या कर सकते हैं?

अगर आपके नियोक्ता द्वारा आपको HRA (हाउस रेंट अलाउंस) नहीं दिया जाता है तो आप धारा 80GG के तहत किराए पर किए गए खर्च का दावा कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी करना होती हैं – 

  • आप वेतनभोगी कर्मचारी या स्व-रोजगार व्यक्ति हों।
  • उस वित्तीय वर्ष में आपने HRA प्राप्त नहीं किया हो।
  • जिस किराए के मकान में आप रह रहे हैं उसका मासिक किराया आपकी कुल सालाना आय का 10 फीसदी से अधिक हो।
  • आपके पास या आपके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर, ऐसा कोई मकान न हो, जिसमें आप रह रहे हों या जिससे आप अपने पेशेवर कामकाज का संचालन कर रहे हों।

HRA का दावा कौन नहीं कर सकता?

आमतौर पर खुद का व्यवसाय करने वाले लोग HRA (हाउस रेंट अलाउंस) का दावा नहीं कर सकते, क्योंकि यह सुविधा मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए होती है। हालांकि, ऐसे लोग आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-80GG के तहत किराए पर मकान लेने की स्थिति में छूट का लाभ ले सकते हैं।

क्या रख-रखाव शुल्क HRA टैक्स छूट में शामिल होता है?

इस बात पर ध्यान दें कि HRA में केवल किराए की राशि पर ही टैक्स छूट मिलती है। यदि किराएदार अपार्टमेंट के मैनटेनेंस चार्ज का भुगतान करता है तो वह HRA छूट में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी तरह बिजली, पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं के खर्च भी टैक्स छूट योग्य नहीं होते और इन्हें HRA टैक्स छूट के अंतर्गत नहीं गिना जाता है।

 

Housing.com का पक्ष

एचआरए की गणना मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों में अलग-अलग तरीके से होती है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा-10 (13ए) और नियम-2ए के अनुसार, सभी वेतनभोगी कर्मचारी HRA का दावा कर सकते हैं। हालांकि, गैर-वेतनभोगी लोग एचआरए का लाभ नहीं ले सकते, लेकिन वे धारा-80जीजी के तहत किराए के मकान पर टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं। एक जरूरी बात यह है कि जिन्होंने नया टैक्स सिस्टम चुना है, वे एचआरए का लाभ नहीं ले सकते।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HRA की गणना के लिए कौन-कौन से शहर मेट्रो सिटी माने जाते हैं?

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई, ये चार शहर HRA (हाउस रेंट अलाउंस) की गणना में मेट्रो सिटी माने जाते हैं।

क्या पुणे HRA की गणना में मेट्रो सिटी माना जाता है?

नहीं, पुणे HRA की गणना के लिहाज से मेट्रो सिटी की श्रेणी में नहीं आता।

क्या गुरुग्राम HRA के लिए मेट्रो सिटी माना जाता है?

नहीं, गुरुग्राम को HRA की गणना में मेट्रो सिटी नहीं माना जाता।

क्या बेंगलुरु HRA के लिए मेट्रो सिटी माना जाता है?

नहीं, बेंगलुरु HRA की गणना में मेट्रो सिटी की सूची में नहीं आता।

क्या हैदराबाद HRA की गणना में मेट्रो सिटी माना जाता है?

नहीं, हैदराबाद को भी HRA के लिए मेट्रो सिटी नहीं माना जाता।

 

(हमारे लेख से संबंधित कोई सवाल या प्रतिक्रिया है? हम आपकी बात सुनना चाहेंगे। हमारे प्रधान संपादक झूमर घोष को jhumur.ghosh1@housing.com पर लिखें।)

 

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