वास्तु टिप्स: घर में डोर बेल लगाते समय रखें इन चीजों का ध्यान

आएं जानें की वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको अपने घर के लिए किस तरह की और कैसी ध्वनि वाली डोर बेल का चुनाव करना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, मानव जीवन में वास्तु का विशेष महत्व है। जो लोग अपने जीवन में वास्तु के अनुसार नहीं चलते उन्हें जगह-जगह कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि लोग वर्तमान समय में वास्तु को विशेष महत्व देते हैं, अगर पुराने समय की बात करें तो तब हर काम वास्तु के अनुसार ही किया जाता था ताकि जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी न आए। इसका परिणाम यह होता था कि उस जामाने में लोगों के जीवन में भरपूर खुशहाली होती थी। लेकिन आज की आधुनिक जीवनशैली में लोगों ने वास्तु के हिसाब से चलना बंद कर दिया है, जिसके दुष्परिणाम लोगों को अक्सर दिखाई देते हैं। लोगों के जीवन में रोज एक न एक समस्या बनी रहती है। इसलिए अगर लोगों को खुशी के साथ अपना जीवन जीना है तो उन्हें अपनी संस्कृति, सिद्धांतों को कभी नहीं भूलना चाहिए। जिसके अंतर्गत वास्तु शास्त्र का सिद्धांत भी आता है, जिसका पालन करने से लोग जीवन में जल्द ही तरक्की पा सकते हैं और उन्हें परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।

आजकल ज्यादातर लोगों के घरों में डोर बेल लगी होती है। इसका काम घर में आए मेहमानों की मदद करना है। घर में आए मेहमान इसकी मदद से आपको बुला सकते हैं। आजकल बाजार में विभिन्न प्रकार की डोर बेल उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग अपने घरों पर लगवाते हैं। कई बार ये आकर्षक डिजाइन की होती हैं। तो कई बार उन्हें अलग-अलग तरह की ध्वनि सुनाई देती है। साथ ही लोग अपने घरों में मंत्रों वाली या गानों वाली डोर बेल भी लगवाते हैं।

वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि मानव जीवन में हर प्रकार की ध्वनि अपना असर छोड़ती है। चाहे वह कोई गाना हो, मंत्र हो या डरावनी आवाज हो। इसलिए घर की डोर बेल का चुनाव बेहद सावधानी से करना चाहिए। क्योंकि मधुर ध्वनि जातक के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालती है। जबकि कुछ ध्वनि ऐसी भी होती है जो लोगों के जीवन में नकारात्मक प्रभाव डालती है। कई बार तो ऐसा होता है कि सही डोर बेल का चुनाव न करने के कारण लोगों के जीवन में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको अपने घर के लिए किस तरह की और कैसी ध्वनि वाली डोर बेल का चुनाव करना चाहिए। ताकि जीवन में सुख समृद्धि बनी रहे।

 

नेम प्लेट से ऊपर लगाएं डोर बेल

देखा गया है कि ज्यादातर लोग इस मामले में गलती कर देते हैं। वो मुख्य दरवाजे पर लगी नेम प्लेट के नीचे डोर बेल का स्विच लगवा देते हैं। यह वास्तु शास्त्र के हिसाब से सही नहीं है। इससे घर का मुखिया परेशान हो सकता है। उसके जीवन में नई दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसलिए हमेशा डोर बेल को नेम प्लेट के ऊपर लगाना चाहिए। इससे घर के मुखिया की समाज में इज्जत बढ़ती है। साथ ही लोग उन्हें प्यार करते हैं और सम्मान देते हैं।

 

इतनी ऊंचाई पर लगाएं डोर बेल

घर की डोर बेल कितनी ऊंचाई पर होना चाहिए, इसका भी वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि घर की डोर बेल कम से कम 5 फीट की ऊंचाई पर लगी होनी चाहिए। इतनी ऊंचाई पर डोर बेल लगाना बेहद शुभ होता है। इसका एक अन्य फायदा यह भी है कि बच्चे डोर बेल के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे। जिससे डोर बेल खराब नहीं होगी, साथ ही घर में रहने वाले लोगों को बच्चों की शरारत के कारण परेशान नहीं होना पड़ेगा।

 

हमेशा दरवाजे के दाईं ओर लगाएं डोर बेल

घर के मुख्य दरवाजे पर डोर बेल का स्विच लगाते समय ध्यान रखें कि यह दरवाजे के दाईं ओर होना चाहिए। ताकि जो भी व्यक्ति आपके घर आए वो बेहद आसानी से डोर बेल बजा सके।

 

डोर बेल की आवाज

वास्तु शास्त्र के अनुसार डोर बेल की आवाज का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। अगर डोर बेल की आवाज कानों को चुभने वाली है तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर सकती है, जिससे घर के लोगों को किसी न किसी प्रकार की हानि हो सकती है। ऐसे में घर में मधुर आवाज वाली डोर बेल लगाएं। साथ ही ध्यान रखें की डोर बेल की आवाज  ज्यादा तेज नहीं होना चाहिए। डोर बेल की तेज आवाज से घर के लोग परेशान हो सकते हैं। इसलिए डोर बेल का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि डोर बेल की आवाज ऐसी होनी चाहिए जो घर के लोगों के मन को सुकून देने वाली हो, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहे।

 

पूजा वाले स्थान के पास न लगाएं डोर बेल

वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा वाले स्थान के नजदीक डोर बेल नहीं लगाना चाहिए। पूजा वाले स्थान के पास डोर बेल लगाने से पूजा करने वाले व्यक्ति का ध्यान भंग होता है ओर उसका मन पूजा में नहीं लगता। इसलिए इस चीज का ध्यान रखे कि डोर बेल पूजा वाले कमरे से कम से कम 20 फीट दूर लगी हो, ताकि डोर बेल की ध्वनि से पूजा करने वाले को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

 

घर की इस दिशा में लगाएं डोर बेल

वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि सही दिशा में डोर बेल लगाने से भी घर का माहौल सकारात्मक हो सकता है। अगर आपने मंत्रोच्‍चार वाली डोर बेल का चुनाव किया है तो इसे घर की पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। साथ ही अगर पक्षियों के चहचहाने की आवाज वाली डोर बेल का चुनाव किया है तो उसे घर की उत्‍तर-पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। यह बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा से घर में हवा का प्रवेश होता है, जिससे यहां पर डोर बेल लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इन सब के अलावा आप अपने आराध्य देव के हिसाब से डोर बेल का चुनाव कर सकते हैं। इससे आपका मन शांत होगा और इस बहाने आप अपने आराध्य देव को भी याद कर पाएंगे। साथ ही आपको नेगेटिव वाइब्‍स से छुटकारा मिलेगा और आपके घर में पॉजिटिव वाइब्‍स रहेंगी। जिससे घर में शांति बनी रहेगी।

हमारे लेख से संबंधित कोई सवाल या प्रतिक्रिया है? हम आपकी बात सुनना चाहेंगे।

हमारे प्रधान संपादक झूमर घोष को jhumur.ghosh1@housing.com पर लिखें

 

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