घर में मंदिर के लिए वास्तु शास्त्र टिप्स


जब भी घर में बात मंदिर या पूजा करने के स्थान की आती है तो वास्तु शास्त्र की एेसी कई गाइडलाइंस हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए, ताकि घर के लोगों पर ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक प्रभाव पड़े। आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर घर में मंदिर हो तो क्या करें, क्या न करें।

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घर का मंदिर एक पवित्र जगह है, जहां हम भगवान की पूजा करते हैं। जाहिर सी बात है कि यह सकारात्मक और शांतिपूर्ण जगह होनी चाहिए। अगर मंदिर को वास्तु शास्त्र के मुताबिक रखा जाए तो यह घर और उनके निवासियों के लिए सुख-शांति और समृद्धि लाता है। यूं तो एक अलग पूजाघर श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन मेट्रोपॉलिटन शहरों में जगह कम होने के कारण यह हमेशा मुमकिन नहीं होता।ऐसे घरों के लिए, आप अपनी जरूरत के अनुसार दीवार पर या छोटे कोने में मंदिर रखने पर विचार कर सकते हैं.

मुंबई में रहने वाले और वास्तुप्लस के नितिन परमार ने बताया कि पूजा का स्थान शांतिपूर्ण होना चाहिए, जो दिव्य ऊर्जा से भरा होता है। यह वह स्थान है, जहां लोग खुद को भगवान को अर्पित कर शक्ति पाते हैं। अगर घर में पूजा का कमरा बनाने की जगह नहीं है तो पूर्व की दीवार या घर के नॉर्थ-ईस्ट जोन में छोटी वेदी होनी चाहिए। मंदिर घर की दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए।

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घर पर मंदिर के लिए वास्तु टिप्स

वास्तु के हिसाब से घर के मंदिर के लिए आदर्श दिशाएं

वास्तु शास्त्र और एस्ट्रोलॉजी एक्सपर्ट जयश्री धमानी ने कहा, नॉर्थ-ईस्ट दिशा का स्वामी बृहस्पति होता है। इसे ईशान कोण भी कहा जाता है। ईशान यानी ईश्वर या भगवान। इसी वजह से यह भगवान या बृहस्पति की दिशा है। सलाह दी जाती है कि मंदिर यहीं रखें। इसके अलावा पृथ्वी का झुकाव उत्तर-पूर्व दिशा में भी है और धरती उत्तर-पूर्व के शुरुआती बिंदु के साथ घूमती है। यह कॉर्नर रेल के इंजन की तरह है तो पूरी रेलगाड़ी को खींचता है। घर के इस एरिया में मंदिर होना भी कुछ एेसा ही है। यह पूरे घर की ऊर्जा को खुद की ओर खींचकर उसे आगे ले जाता है। उन्होंने कहा कि घर के केंद्र में स्थित एक मंदिर, जिसे ब्रह्मस्थान भी कहा जाता है, को भी शुभ माना जाता है और घर के निवासियों के लिए यह समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य लाता है।

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अपने पूजा कक्ष को घर में रखने की सर्वोत्तम दिशा

Vastu Shastra tips for a temple at home

 

वास्तु के मुताबिक घर में कैसा होना चाहिए मंदिर का निर्माण

परमार के मुताबिक जब बात घर में मंदिर के निर्माण की आती है तो इसे सीधे जमीन पर न रखें। इसे किसी ऊंचे स्थान या चौकी पर रखें। उन्होंने कहा, मंदिर लकड़ी या मार्बल का बना होना चाहिेए। ग्लास या एक्रेलिक से बना मंदिर न लें। मंदिर अव्यवस्थित नहीं होना चाहिए। इसमें एक ही जैसे देवी-देवता खड़े या बैठे मुद्रा में नहीं होने चाहिए। साथ ही जो मू्र्तियां या तस्वीरें आपने मंदिर में रखी हैं, वे टूटी या खंडित नहीं होनी चाहिए। इसे अपशगुन माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी घर में नौ इंच से अधिक ऊंचाई वाले किसी भी देवी या देवता की मूर्ति नहीं होनी चाहिए। युद्ध से संबंधित भगवान की तस्वीरें घर में मंदिर में रखने से बचें, जिसमें भगवान का रूप क्रोधित हो। सकारात्मक ऊर्जा के लिए भगवान की मूर्तियों को हमेशा सौम्य, शांत और धन्य मुद्रा में रखें।
जहां भी मंदिर हो, वहां कोई शख्स पूजा करने में सक्षम होना चाहिए। अगर कोई खास त्योहार हो तो पूरा घर साथ में पूजा कर सके। इसके अलावा बैठकर पूजा करने की जगह भी होनी चाहिए। मंदिर की जगह में अच्छी और स्वस्थ ऊर्जा का संचार होना चाहिए। इसलिए हमेशा मंदिर को साफ-सुथरा रखें। इस पर धूल, जाले और आसपास बेकार सामान नहीं होना चाहिए। मंदिर एेसा हो जो आपको शांति और स्थिरता महसूस कराए।

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छोटे फ्लैट्स के लिए पूजा घर के डिजाइन

एक ऐसा ढांचा, जो पिरामिड के आकार का हो और मंदिरों के गोपुरा जैसा दिखता हो, वह पूजा घर के लिए अच्छा डिजाइन है. पिरामिड आकार सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए जाना जाता है.

एंटरटेनमेंट यूनिट/लिविंग रूम में पूजा घर

छोटे अपार्टमेंट्स के लिए लिविंग रूम पूजा घर के लिए सर्वश्रेष्ठ है. अगर एंटरटेनमेंट यूनिट में खाली शेल्फ है तो आप पूजा घर के लिए एक छोटा सा कोना सजा सकते हैं. हालांकि प्राइवेसी और एकाग्रता को लेकर उन लोगों को समस्या हो सकती है जो ध्यान और पूजा में अधिक समय बिताते हैं.

किचन कैबिनेट में पूजा घर

आप छोटा मंदिर बनाने के लिए किचन कैबिनेट को कस्टमाइज करा सकते हैं. कैबिनेट के दरवाजों के नक्काशीदार किनारे  और सतह पर सुरूप छेद हो सकते हैं ताकि धुएं का निकास हो सके और वहां आप अगरबत्ती जलाई जा सकें.

डाइनिंग रूम का कोना

आप डाइनिंग रूम के किसी खाली कोने को पूजा घर में तब्दील कर सकते हैं. आप किसी साफ-सुथरे स्टूल पर मूर्तियां रख सकते हैं, जो जमीन की सतह से ऊपर हो. आप उस जगह पर छोटी लाइट्स लगा सकते हैं ताकि मंदिर जगमगा उठे. प्राइवेसी के लिए आप छोटा सा परदा भी लगा सकते हैं ताकि पूजा घर लोगों की नजरों से दूर रहे.

रूम डिवाइडर का ईस्तेमाल

यदि आपका पूजा घर लिविंग रूम, डायनिंग एरिया, बेडरूम या स्टडी रूम में हो तो आप रूम डिवाइडर का ईस्तेमाल कर सकते हैं. इसके मदद से आप एक अलग स्पेस पूजा घर के लिए बना सकते है. रूम डिवाइड करने के लिए आप एक साधारण पर्दा, ग्लास वॉल, औरनट प्लास्टर ऑफ़ पेरिस डिवाइडर, या वर्टिकल गार्डन रूम डिवाइडर का भी ईस्तेमाल कर सकते हैं. आप पूजा की चीजों को रखने के लिए एक लकड़ी का डिवाइडर जिसमें सेल्फ बने हो वो भी लगा सकते हैं. एक धार्मिक और भावपूर्ण छाप छोड़ने के लिए आप अपने पूजा घर को धार्मिक निशानों, ऐचिगं या स्टेनसिल कटों से सजा सकते हैं.

ओपन शेल्फ कॉर्नर्स

अगर आपका ओपन शेल्फ है तो आप उसे मूर्तियां रखने के लिए मिनी पूजा घर बना सकते हैं. छोटे घरों के लिए मकान के कोने में लोहे का शेल्फ बढ़िया पूजा घर में तब्दील हो सकता है, जिसमें आप विभिन्न शेल्फ पर अलग-अलग मूर्तियां रख सकते हैं. साथ ही अगरबत्तियां और दीया भी जला सकते हैं.

वॉल निच

एक छोटे रूम में छोटा नीच या वॉल नीच क्रिएट करें. नीच को अच्छे रंगों और फोकस लाइट से सजाएँ और पूजा घर तैय्यार करें.

घर में मंदिर सजाते वक्त क्या करें क्या न करें

पूजा घर कहां रखें

अगर आपका ड्यूप्लेक्स घर है तो ग्राउंड फ्लोर पर ही मंदिर को रखें. कुछ लोग मंदिर को बेडरूम या किचन में रख देते हैं. ऐसे मामलों में अगर आप मंदिर में पूजा नहीं कर रहे हैं तो उसके आगे पर्दा डालकर रखें. अगर मंदिर को किचन में रख रहे हैं, नॉर्थ ईस्ट कॉर्नर में रखें. इसके अलावा मंदिर ऐसी दीवार के आगे ना रखें, जिसके पीछे टॉयलेट हो. अगर ऊपरी मंजिल पर टॉयलेट हो  तो उसके नीचे मंदिर ना रखें. मंदिर को बेसमेंट में भी ना रखें क्योंकि यह अपशगुन माना जाता है.

 

Puja room placement

Pinterest

मंदिर को कम से कम इतनी ऊंचाई पर रखना चाहिए ताकि मूर्तियों के पैर पूजा करने वाले की छाती तक आएं. कभी भी मूर्तियों को जमीन पर ना रखें. मूर्तियां कम से कम 10 इंच होनी चाहिए. मूर्तियां तंग तरीके से रखी नहीं होनी चाहिए. भगवान गणेश की मूर्ति को देवी लक्ष्मी की मूर्ति के बाई साइड रखनी चाहिए. सारे मुर्तियां बैठे हुए होने चाहिए और उन्हें चोकी की ऊपर रखना चाहिए. वास्तु के अनुसार मूर्तियों एक दूसरे को नहीं देखनी चाहिए.

अगर आप लकड़ी के मंदिर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो टॉप पर गुंबद जैसा ढांचा होना चाहिए और सुनिश्चित करें कि पूजा घर की ओर प्रवेश की एक सीमा हो. अगर मूर्तियां खंडित हो गई हैं तो मंदिर में उन्हें कभी ना रखें.

वास्तु के मुताबिक पूजा घर में दो-शटर वाला गेट होना चाहिए. ऐसे मामलों में मूर्तियां सीधे दरवाजे को देखते हुए ना हों.

पूजा घर में लाइट्स/दीया

मंदिर वास्तु के मुताबिक, दीया जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं. जो शख्स पूजा कर रहा है, उसके दाईं ओर दीया रखा होना चाहिए. अगर किसी को दीया लंबे समय तक जलाना है तो दीये को शीशे से ढक दें. अगर आप कपूर, दीया या अगरबत्ती जलाते हैं तो आग के खतरों को भी ध्यान में रखें. वास्तु के मुताबिक, दीए का मुंह दक्षिण की ओर ना रखें क्योंकि इससे पैसों का नुकसान होता है. . दीयों के अंदर हमेशा रुई की बत्ती का इस्तेमाल करें. अगर मंदिर के आसपास बिजली का बोर्ड है तो और अच्छी बात है क्योंकि आप त्योहारों के दिनों में मंदिर को लाइट्स से सजा सकते हैं. आप बैटरी से चलने वाली टी लाइट्स, फेयरी लाइट्स या एलईडी लाइट्स या फिर बैकलाइट पैनल से भी मंदिर को जगमग कर सकते हैं.

 

Puja room design

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पूजा घर के लिए फूल

पूजा घर के लिए हमेशा ताजे फूलों का इस्तेमाल करें. बासी फूलों का इस्तेमाल करने से बचें. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, मंदिर से देर रात मुरझाए हुए फूलों को हटा दें.मंदिर को ताजे फूलों जैसे गेंदा, मोगरा, ऑर्किड और आम के पत्तों के तोरण से सजाएं.

 

Flowers in puja room

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फोटोग्राफ

पूजा घर में कभी अपनी तस्वीरें ना रखें. आपके जो करीबी गुजर गए हैं, उनकी तस्वीरें भी ना रखें. इससे घर में ऊर्जाएं असंतुलित हो जाती हैं.

 

Puja mandir in Indian home

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पूजा घर में स्टोरेज

उन चीजों को रखने से बचें जिनका आप पूजा घर में इस्तेमाल नहीं करने वाले हैं. धूप, पूजा सामग्री और पवित्र पुस्तकों को रखने के लिए मंदिर के पास एक छोटा सा शेल्फ बनाएं. इस क्षेत्र में मंदिर या कूड़ेदान के नीचे गैर-जरूरी सामान रखने से बचें. मूर्तियों के ऊपर कुछ भी न रखें. जल के लिए तांबे के कलश का ही इस्तेमाल करें और कलश का जल हर दिन बदलें.

मंदिर में कैसे रंगों का इस्तेमाल करें

मंदिर के लिए सफेद, हल्का पीला, बेज या लैवेंडर रंग का इस्तेमाल करें.

पूजा घर का वातावरण

मंदिर को ताजे फूलों से सजाएं. सुगंधित मोमबत्तियां, धूप और अगरबत्तियां जलाएं ताकि इलाके और वातावरण शुद्ध हो जाए. ध्यान दें कि साफ-सफाई बेहद जरूरी है. मंदिर में तस्वीरों या अन्य मूर्तियों के नीचे लाल रंग का कपड़ा रखें.

वास्तु के अनुसार घंटी की आवाज नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है. घर के मंदिरों में बाईं ओर घंटी रखनी चाहिए. रंगोली के डिजाइनों के साथ फर्श को सजाएं क्योंकि यह सकारात्मक वाइब्स लाता है और खुशी का अनुभव कराता है. वास्तु के अनुसार उत्तर-पूर्व की दीवार पर स्वास्तिक और ओम चिन्ह बनाएं क्योंकि यह समृद्धि लाता है. फर्श पर रंगोली डिजाइन में शुभ चिन्ह न बनाएं. अगर मंदिर क्षेत्र के पास कम जगह है, तो कोई चौकीपर रंगोली बना सकते हैं और इसे मंदिर क्षेत्र के पास रख सकते हैं.

पूजा घर के वॉल और सीलिंग को कैसे सजाए

पूजा घर के सीलिंग पे पॉप डिजाइन दे सकते हैं. इस स्पेस को और निखारने के लिए पेनडेंट लाइट लगा सकते हैं. सीलिंग पे सुनहरे टेक्सचर वाले रंग और हैंगिंग बेल्स भी लगा सकते हैं. जिस वॉल पे मंदिर फिक्स्ड है उसे अच्छी तरह सजाए. बैकलिट पैनल भी आजकल ट्रेडिंग है. मंदिर को और खूबसूरत बनाने के लिए आप संस्कृत श्लोकों या कमल पैटर्न भी बैकलिट बोर्ड पे लगा सकते हैं. आप मंदिर के वॉल पे पीला या सतरंगी रंग के आकर्षित वॉल पेपर भी लगा सकते हैं.

अशुद्ध चीजों को मंदिर से दूर रखें

ऊपर बताई गई चीजों के अलावा, चमड़ा ऐसी चीज है, जिसे अशुद्ध माना जाता है. मंदिर के इलाके में  जानवरों की चमड़ी नहीं रखनी चाहिए. पूजा घर में पैसे भी न रखें. सफेद अशुद्ध नहीं होता. जिस जगह पर आप प्रार्थना करते हैं, वहां पैसे रखना सही नहीं है.

 

वास्तु के मुताबिक पूजा घर के लिए सर्वश्रेष्ठ रंग

जैसा कि बताया गया कि पूजा घर की शांति बनाए रखने के लिए वास्तु शास्त्र कहता है कि कोमल रंगों का इस्तेमाल करें. सफेद, लाइट ब्लू और पेल यलो इसके लिए मुफीद हैं. पूजा घर में गहरे रंग न कराएं क्योंकि इससे शांति का माहौल नहीं बनेगा, जो पूजाघर के लिए बेहद जरूरी है. पूजा घर की फ्लोरिंग के लिए वाइट मार्बल या कोई भी हल्के रंग वाली मार्बल टाइलिंग इस्तेमाल करें.

यह भी देखें: वास्तु के आधार पर अपने घर के लिए सही रंग कैसे चुनें?

 

घर में मंदिर स्थापित करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप किसी छोटे अपार्टमेंट में रहते हैं या फिर प्रॉपर्टी का ढांचा ऐसा नहीं है कि वास्तु के मुताबिक घर में मंदिर हो सके तो अगला विकल्प चुनें जो काम कर सके. आपके घर में उत्तर-पूर्व मंदिर के लिए सबसे बेहतर दिशा है क्योंकि इससे प्राकृतिक रोशनी आती है. प्राकृतिक रोशनी के अभाव में आप पूजा घर को आर्टिफिशियल लाइटिंग से भी सजा सकते हैं खासकर तब जब घर में खिड़की का कोई स्पेस न हो.

इसका रखें ध्यानऐसा करने से बचें
नॉर्थ-ईस्ट सबसे अच्छी दिशा हैसीढ़ियों के नीचे पूजाघर नहीं होना चाहिए
पूजा करते वक्त मुंह या तो उत्तर या फिर पूर्व की ओर हो.पूजा घर बाथरूम के नीचे नहीं होना चाहिए
ग्राउंड फ्लोर सबसे अच्छी लोकेशन हैमूर्तियों को इस तरह से रखें कि वे एक दूसरे के आमने-सामने न हों
दरवाजे और खिड़कियां उत्तर या फिर पूर्व में खुलनी चाहिएउसे विभिन्न कामों वाला कमरा न बनाएं
तांबे के बर्तन बेहतर होते हैंमृतकों की  तस्वीरें न रखें
हल्के और सुखदायक रंगों का प्रयोग करेंअपने बेडरूम में एक मंदिर रखने से बचें
हमेशा चौकी, मैट या कार्पेट पर बैठकर पूजा करें

 

पूजा घर में वास्तु दोष निवारण के कुछ टिप्स

  • सुनिश्चित करें कि मूर्तियों के मुंह एक-दूसरे की ओर न हों.
  • मूर्तियों को हमेशा ऊंचा रखें- एक नॉर्मल बेंच भी ऐसा कर सकता है.
  • मूर्ति को दीवार से कम से कम एक इंच की दूरी पर रखें.
  • उत्तर-पूर्व में लैंप और दीया को रखें
  • टूटी हुई मूर्तियां न रखें.
  • पूजा घर में अव्यवस्था मुक्त वातावरण होना चाहिए.

यह भी देखें: संरचनात्मक परिवर्तन किए बिना घर के वास्तु में सुधार कैसे करें?

 

मंदिर को पूर्व दिशा वाले घर में कहां रखना चाहिए?

पूर्व मुखी घर में पूजा घर उत्तर या पूर्वी कोने में होना चाहिए. ताकि प्रार्थना करते समय शख्स का मुंह इन दिशाओं में से किसी एक में हो.

पूजा घर उत्तर दिशा वाले घर में कहां रखना चाहिए?

घर में एक मंदिर के लिए आदर्श जगह उत्तर-पूर्व है. ऐसे मामले में, कोशिश और सुनिश्चित करें कि  पूजा करते समय आपका मुंह उत्तर या पूर्व की ओर हो. हमेशा सुनिश्चित करें कि पूजा घर सीढ़ी के नीचे या बाथरूम की दीवार के बराबर में नहीं है.

दक्षिण मुखी घर में पूजा घर कहां रखना चाहिए?

पूजा घर दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए क्योंकि यह दिशा यम की होती है, जो मौत के देवता हैं. यह सलाह दी जाती है कि आपके घर में पूजा घर की छत एक त्रिकोण के आकार में होनी चाहिए ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहे.

पश्चिम मुखी घरों में पूजा घर कहां होना चाहिए?

पश्चिम मुखी घरों में पूजा घर नॉर्थ ईस्ट में होना चाहिए, क्योंकि यह सबसे शुभ कोना होता है. अगर आप पश्चिम मुखी घर में रहते हैं तो आपके लिए सभी 5 तत्वों को संतुलित करना जरूरी है.

घर में मंदिर की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?

मंदिर को जमीन से कुछ फीट ऊंचा रखा जाना चाहिए ताकि रखी गई मूर्तियां भक्त की छाती के स्तर पर हों। देवताओं को ऐसी ऊँचाई पर स्थापित करें जहाँ कोई भी बैठकर या खड़े होकर आराम से प्रार्थना कर सके। मंदिर के फर्श और आधार के बीच की ऊंचाई लगभग 32-36 इंच के बीच होनी चाहिए।

घर में मंदिर की सफाई के टिप्स

घर में एक साफ मंदिर एक सकारात्मक आभा देता है और देवी लक्ष्मी को भी अपने घर में आमंत्रित करता है।

पीतल की मूर्तियों और कलश को कुछ डिटर्जेंट के साथ गुनगुने पानी में भिगोना चाहिए। फिर उस पर नींबू को स्क्रब करें। एक नींबू के टुकड़े के साथ कुछ बेकिंग सोडा का भी उपयोग कर सकते हैं।

तांबे के बर्तनों को सिरके और नमक से साफ किया जा सकता है।

दीयों को रोजाना धोकर साफ रखें, फिर डिशवॉशिंग लिक्विड से स्क्रब करके ग्रीस हटा दें। पीतल के दीये को साफ करने के लिए इमली के पानी या सिरके का इस्तेमाल करें।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि चांदी की मूर्तियां चमकें, टूथपेस्ट का उपयोग करें और टूथब्रश से धीरे से स्क्रब करें। पानी उबालकर चांदी के बर्तन भिगो दें। फिर उबलते पानी में एल्युमिनियम फॉयल के टुकड़े और एक बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। 5 मिनिट बाद चांदी के बर्तन को निकाल लीजिए. उन्हें स्क्रब करके धोकर सुखा लें।

संगमरमर के मंदिर को गर्म पानी से धीरे से पोंछें जिसमें हल्का डिटर्जेंट मिला हो और फिर सूखे कपड़े से पोंछ लें।

तस्वीरों के कांच के फ्रेम को किसी भी कांच की सफाई स्प्रे और एक मुलायम कपड़े से साफ किया जा सकता है।

लकड़ी के मंदिर को कपड़े से झाड़ा जा सकता है।

पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

लकड़ी के मंदिर को घर में कैसे सजाएं?

आप मंदिर को ताजे फूलों से सजा सकते हैं.

घर में मंदिर कहां पर रखें?

मंदिर को घर के केंद्र में रखें. ये वो स्थान होता है, जिसे ब्रह्मस्थान कहते हैं. इसे शुभ भी कहा जाता है और यह घरवालों के लिए सौभाग्य और अच्छा स्वास्थ्य लाता है. आप नॉर्थ ईस्ट की दिशा में भी मंदिर रख सकते हैं.

क्या लिविंग रूम में मंदिर रख सकते हैं?

यदि किसी के पास मंदिर के लिए एक पूरे कमरे की जगह नहीं है, तो कोई पूर्व की दीवार पर एक छोटी सी वेदी स्थापित कर सकता है.

क्या मंदिर बेडरूम या किचन में रख सकता हूं?

अगर आप मंदिर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप उस परदे टांग सकते हैं.

घर में मंदिर में क्या रखना चाहिए?

देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरों के अलावा धूप, घंटी, कुमकुम, ताजे फूल, दीया, कलश और धार्मिक पुस्तकें रखें.

क्या हम मंदिर में शंख रख सकते हैं?

घर के मंदिर में शंख रखना शुभ माना जाता है. शंख बजाने से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

दिया जलाने के लिए कौन से तेल का इस्तेमाल करना चाहिए?

वास्तु के मुताबिक गाय का घई सबसे ज्यादा अच्छा है. आप सिसेम या सरसों के तेल का इस्तेमाल दिया जलाने के लिए कर सकते हैं. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होते हैं.

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