नया अपार्टमेंट खरीदते वक्त काम आएंगी ये वास्तु टिप्स, चमक जाएगी किस्मत

अगर आप नया घर या अपार्टमेंट खरीदने वाले हैं तो वास्तु शास्त्र के एेसे कई पहलू हैं, जिनका आपको ध्यान रखना है। आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं।
वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो रहने की जगहों को सर्वश्रेष्ठ बनाता है। जो घर या प्लॉट वास्तु के मुताबिक होते हैं, उससे रहने वालों के जीवन में खुशियां, वैभव और समृद्धि आती है। अच्छी जगह, प्लॉट, रिहायशी व कमर्शियल स्ट्रक्चर के लिए यह प्राचीन विज्ञान रियल एस्टेट में भी काफी पॉपुलर हो रहा है।

वास्तु के मुताबिक एंट्रेंस:

प्लॉट, घर या अपार्टमेंट की कंस्ट्रक्शन, डिजाइन प्लान और लेआउट के वक्त पहली चीज जो दिमाग में रखनी चाहिए, वह है अच्छी एंट्रेंस। इसी जगह से घर में खुशहाली और सकारात्मकता आती है। रहने की हर जगह में एेसी 32 मुमकिन लोकेशंस होती हैं, जो बिल्डिंग में एंट्रेंस का काम करती हैं। इन 32 जगहों का अपना महत्व होता है और ये हमारी जिंदगी पर उसी तरह असर डालती हैं। उदाहरण के तौर पर साउथ-ईस्ट जोन में एंट्रेंस (जो कैश का वास्तु जोन होता है) होने से भुगतान में देरी होती है। साउथ-वेस्ट में एंट्रेंस होने से परिवार को पैसे की तंगी और रिश्तों में तनाव से गुजरना पड़ सकता है। दूसरी ओर अगर आपका एंट्रेंस उत्तर में है तो आपको मौद्रिक, व्यापार के मामलों और करियर में सफलता मिलेगी। अगर आपके द्वारा चुनी गई प्रॉपर्टी या अपार्टमेंट वास्तु के मुताबिक नहीं है तब भी आप उसे खरीदकर कुछ आसान वास्तु उपाय अपना सकते हैं।

वास्तु के मुताबिक एेसे होने चाहिए कमरे:

कमरे की लोकेशन अगर सही है तो आपको उसके भरपूर फायदे भी मिलेंगे। कमरा किस जोन में स्थित है, इसी आधार पर उसमें रहने वालों पर कमरे के सकारात्मक और नकारात्मक असर पड़ते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आपका लिविंग रूम ईस्ट में है तो आपके सामाजिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। दूसरी ओर वास्तु के मुताबिक ईस्ट और साउथ-ईस्ट के बीच बेडरूम नहीं बनवाना चाहिए। इन जगहों में सोने से बेचैनी या पति/पत्नी से अनबन रह सकती है। घर के नॉर्थ या नॉर्थ-ईस्ट जोन में टॉयलेट नहीं बनवाना चाहिए। इससे घर में रहने वालों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। किचन के लिए साउथ-ईस्ट एकदम सटीक लोकेशन है। किचन कभी भी नॉर्थ-ईस्ट या साउथ-वेस्ट जोन में नहीं होनी चाहिए।

पंचतत्व या पांच तत्वों की समीक्षा:

लिविंग स्पेस को अंतरिक्ष में 16 जोन या दिशाओं में बांटा गया है। हर जोन का एक खास तत्व है, जिससे जिंदगी पर विभिन्न असर होते हैं। उदाहरण के तौर पर नॉर्थ जोन का मुख्य तत्व पानी है। इस क्षेत्र के मुख्य गुण वैभव, विकास, करियर, मौद्रिक लाभ इत्यादि हैं। अगर इस जोन में संतुलन बिगड़ता है तो इससे लोगों के करियर, बिजनेस और स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। आग दक्षिणी क्षेत्र का मुख्य तत्व है। इसका मुख्य गुण नींद और चैन है।
घर खरीदते वक्त विभिन्न कमरों की लोकेशन और आंतरिक तत्वों को जरूर देख लेना चाहिए। इसमें किचन, टॉयलेट्स, बालकनी, खुला एरिया, पानी की टंकियां, गार्डन, सर्विस लेन, पड़ोसियों के वाटर स्टोरेज, ढलान, बारिश के पानी का निकास, बिल्डिंग की हाइट, शाफ्ट इत्यादि होते हैं। यह जांच लेना जरूरी होता है कि सभी पांच तत्व या पंचतत्व अपने निर्धारित क्षेत्रों में मौजूद हैं। यानी पानी नॉर्थ में, हवा पूर्व में, आग दक्षिण में, पृथ्वी दक्षिण-पश्चिम में और अंतरिक्ष पश्चिम में।

आधुनिक वास्तु और स्पेस प्रोग्रामिंग:

लेकिन अगर आपने प्रॉपर्टी खरीद ली है या बुकिंग अमाउंट का भुगतान कर दिया है? एेसे मामलों में आप वास्तु की चौथी जांच- स्पेस प्रोग्रामिंग कर सकते हैं। आधुनिक वास्तु की एप्लिकेशंस और तकनीक की बदौलत आपको अपनी संपत्ति तोड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। आसान और असरदार वास्तु तकनीक व उपाय किसी खास क्षेत्र में तत्वों को संतुलित कर सकते हैं। रंग, शेप, लाइट, मेटल्स और चिन्हों का इस्तेमाल इसमें काफी असरदार माना गया है।
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