क्या होता है पेंटहाउस और ये भारत में कितने पॉपुलर हैं?


आज हम आपको पेंटहाउस की खासियतों के बारे में बताएंगे साथ ही ये भी कि कौन से ऐसे फैक्टर्स होते हैं, जो इन्हें रेग्युलर अपार्टमेंट्स से अलग बनाते हैं.

भारत में लोगों की बढ़ती इनकम के बीच लग्जरी रियल एस्टेट में पेंटहाउस भारतीयों की पसंद बनता जा रहा है. नतीजतन, भारतीय अचल संपत्ति में पेंटहाउस की मांग और सप्लाई में पिछले एक दशक में काफी वृद्धि देखी गई है. इसमें मिलने वाले शानदार आराम और गजब की सुविधाओं के अलावा पेंटहाउस घर के मालिकों के लिए एक स्टेटस सिंबल भी बन गया है.

इन बहुत ज्यादा कीमत वाले घरों के विकल्पों के लिए ये ज्यादा कीमत वाला प्राइज टैग यूनिक सेलिंग पॉइंट के तौर पर काम करता है न कि निवारक के तौर पर. इसकी वजह है विशिष्टता से जुड़ाव.इतना ही नहीं, पेंटहाउस तेजी से सालाना बिक्री में अल्ट्रा-लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में बंगले और स्वतंत्र घरों को निगल रहे हैं. सबसे अहम, इनमें भी वही ज्यादा मौद्रिक मूल्य होता है, जो विशाल, आकर्षक और स्वतंत्र संपत्तियों में होता है.

पिछले एक दशक में भारतीय रियल एस्टेट में पेंटहाउस की मांग और सप्लाई में अमीर व्यक्तियों की बढ़ती संख्या के बीच जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है. नाइट फ्रैंक के अनुसार, साल 2019 में भारत में 5,986 अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ वाले व्यक्ति थे. ऐसे सुपर रिच की संख्या 2024 तक बढ़कर 10,354 हो जाने की संभावना है. भारत में अरबपतियों की संख्या 2019 में 104 थी, जिसके 2024 तक 113 पहुंचने का अनुमान है. कोरोना वायरस महामारी के कारण भी पेंटहाउस की डिमांड बढ़ी है. इस महामारी के कारण अब रिमोट वर्किंग एक नियम सा बन गया है और लोगों का घर ही उनका दफ्तर बन गया है.  इसका एक संकेतक यह तथ्य भी है कि COVID-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण चल रहे वित्तीय संकट का नई दिल्ली के पॉश इलाकों में प्रीमियम संपत्तियों की बिक्री पर बहुत कम प्रभाव पड़ा है.

भारत में लग्जरी सेगमेंट में उनकी बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद, खरीदारों में यह कन्फ्यूजन अब भी है कि आखिर पेंटहाउस का मतलब होता क्या है. पेंटहाउस क्या होते हैं और ये कैसे एक ही बिल्डिंग में अन्य अपार्टमेंट्स की तुलना में अलग होते हैं.

क्या होते हैं पेंटहाउस?

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक, एक बड़ी सी इमारत के टॉप पर एक पेंटहाउस महंगा और आरामदायक फ्लैट या कमरों का सेट होता है.

ये कॉन्सेप्ट पहली बार पॉपुलर तब हुआ, जब डेवेलपर्स ने इस शब्द की मूल परिभाषा का पालन किया. आगे बढ़ते हुए, इस शब्द का इस्तेमाल अन्य मंजिलों पर एक खास फ्लैट को परिभाषित करने के लिए भी किया गया था, क्योंकि डेवेलपर्स को पेंटहाउस कॉन्सेप्ट से ज्यादा मुनाफा कमाने की संभावना का अहसास हुआ.

इस कॉन्सेप्ट ने सबसे पहले शोहरत उन बड़ी बिजनेस जगहों पर बटोरी, जहां प्राइवेसी और स्पेस बढ़ती आबादी के कारण ढूंढना मुश्किल हो गया था. डिमांड बढ़ती देख, डेवेलपर्स अपार्टमेंट की बिल्डिंग के टॉप पर पेंटाहाउस का निर्माण करने लगे और उसके लिए ज्यादा पैसे वसूलते थे. जैसे ही डिमांड पैटर्न विकसित हुआ, डेवेलपर्स ने अधिक पेंटहाउस को समायोजित करने के लिए इमारत के ढांचे में बदलाव करना शुरू कर दिया, जो कि इमारत में कहीं भी बनाया जा सकता था. विभिन्न टीयर्स में बनने वाली इमारतों में कई पेंटहाउस हो सकते हैं.

हाल ही में, डेवेलपर्स अब पेंटहाउस शब्द का इस्तेमाल किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट में खास यूनिट को परिभाषित करने के लिए करने लगे हैं, जिसमें लोकेशन व बाकी सुविधाओं के कारण अन्य यूनिट्स की तुलना में ज्यादा फीचर्स होते हैं.

यह कहना भी सही होगा कि लग्जरी हाउसिंग मार्केट के भीतर एक सब-मार्केट है जिसे पेंटहाउस मार्केट के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. इस श्रेणी के निवेशक, जो प्राइवेसी और यूनीकनेस को महत्व देते हैं, एक आलीशान प्रोजेक्ट में सबसे अच्छे अपार्टमेंट की तलाश करते हैं और अक्सर ऐसी फैंसी यूनिट को सुरक्षित करने के लिए बेहद मोटी रकम खर्च करने को तैयार रहते हैं.

लेकिन पेंटहाउस भारत में बहुत आम नहीं हैं. जब डेवेलपर्स इसकी मार्केटिंग करते हैं, तो वे मानक परिभाषा पर ही टिके रहते हैं. भारत में एक पेंटहाउस मूल रूप से पारंपरिक शब्दों में एक पेंटहाउस है.

 

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पेंटहाउस में कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं?

पेंटहाउस अकसर अमीर और बेहद अमीरों के लिए होते हैं और इनमें सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं जैसे फैन्सी इनडोर फीटिंग्स, हाई-टेक कमांड डिवाइसेज और हर तरफ खुशनुमा अहसास. हालांकि रियल एस्टेट में सारी जद्दोजहद जगह की ही है इसलिए सारी कोशिशें न सिर्फ बड़ी जगह देने बल्कि ऐसे घर की होती है, जो लग्जरी दिखाई दे. इसलिए पेंटहाउस में एक खुली छत होती है, जो सिर्फ मालिक की होती है. इन यूनिट्स में भव्य इनडोर फिटिंग भी की जाती हैं. एक रेग्युलर फ्लैट के उलट, पेंटहाउस में छत बहुत ऊंची होती है और इसका लेआउट प्लान भी अलग होता है. इसमें लग्जरी सुविधाएं जैसे जिम, स्वीमिंग पूल और कई बार प्राइवेट एलिवेटर्स भी होते हैं.

ABA कॉर्प के डायरेक्टर और CREDAI-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष-चुनाव अमित मोदी कहते हैं, ‘पेंटहाउस को खास तौर पर डिजाइन किया जाता है, ताकि ऐसे खास खरीदारों को लुभाया जा सके, जो ज्यादा बड़ी जगह और खास फीचर्स का फायदा उठाने के लिए ज्यादा पैसे चुकाने के लिए तैयार हैं.’

 

वो खास सेगमेंट

भारत में पेंटहाउस कई खासियतों वाला एक स्टेटस सिंबल है. डेवेलपर्स एक खास वर्ग पर खासा ध्यान देते हैं. पेंटहाउस को आमतौर पर मुंबई में सिलेब्रिटीज तवज्जो देते हैं. मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी भी है और यहां कई बेहद अमीर बॉलिवुड सितारों के अलावा खेल जगत की नामी हस्तियां भी रहती हैं. जिन लोगों के पास ज्यादा पैसा है जैसे बिजनेसमैन, एनआरआई या बड़ी कंपनी के कार्यकारी अधिकारी, पेंटहाउस उनकी पसंद होते हैं.

 

पेंटहाउस खरीदने के फायदे

प्राइवेसी, टेरेस स्पेस और ऊंची छत पेंटहाउस के वो फीचर्स होते हैं, वो बाकी नियमित घरों में नहीं मिलते.

खुला-खुला नजारा: पेंटहाउस में आपको प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन और आसपास की जगहों का खुला-खुला नजारा देखने को मिलता है. ये वो चीजें हैं, जो कई लोग बड़े शहरों में अफोर्ड नहीं कर सकते. पेंटहाउस में काफी शांति होती है, शायद इमारत में इनकी जगह की वजह से.

विशिष्टता: भारत में, पेंटहाउस के मालिक की अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच खासी तारीफ होती है. पेंटहाउस के मालिक को ऐसी कई सुविधाएं मिलती हैं, जिनसे उसी बिल्डिंग में रहने वाले लोग महरूम रह जाते हैं.

मंदी रोधक निवेश: पश्चिमी देशों के उलट, जहां पेंटहाउस काफी संख्या में हैं, भारत में डेवेलपर्स पेंटहाउस के लॉन्च को लेकर काफी सजग हैं. लिमिटेड सप्लाई, की मौजूदगी के कारण पेंटहाउस की वैल्यू बढ़ती जा रही है. जब तक सप्लाई कुल मांग से कम है, तब तक कीमतें गिरने को लेकर परेशान होने का कोई कारण नहीं है.

मोदी के मुताबिक, कारोबारी, कॉरपोरेट लीडर्स, एनआरआई और एचएनआई सेगमेंट के नामी सदस्य ऐसी प्रॉपर्टीज में निवेश करते हैं क्योंकि ऐसी प्रॉपर्टीज पर देश की अर्थव्यवस्था में आने वाले उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं होता.

 

पेंटहाउस के नुकसान

बड़ी जगह मिलना यानी उसकी मेंटेनेंस में भी हर महीने खर्चा ज्यादा होगा. पेंटहाउस में बिल्डिंग के अन्य फ्लैट्स की तुलना में सीधी हवा और धूप आती है. लिहाजा गर्म शहरों में, पेंटहाउस के अंदर गर्मी हो सकती है. जिन शहरों में बारिश बहुत ज्यादा पड़ती है, वहां पानी के रसाव की परेशानी आम है. बड़े पेंटहाउस प्राइवेसी तो देते हैं लेकिन वहां आपको अकेलेपन का अहसास हो सकता है.

हमेशा की तरहटॉप फ्लोर की हाउसिंग यूनिट की रीसेल वैल्यू हमेशा बेकार होती है. चूंकि पेंटहाउस भी सबसे ऊपर वाली मंजिल पर ही होता है इसलिए पेंटहाउस की रीसेल वैल्यू भी प्रभावित होती है. इसकी कीमत अधिक होने के कारणअगर मालिक ने इसे किराये पर देने का फैसला किया है तब भी ऐसी जगहों को लेने वाले भी कम ही हैं. कम से कम भारत मेंजब फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स की डिमांड किराया सेगमेंट में ज्यादा है तो पेंटहाउस से मिलने वाला किराया आपकी उम्मीदों की तुलना में बहुत कम होगा.

 

भारत में पेंटहाउस की कीमतें क्या हैं?

मुंबई में पेंटहाउस की प्राइज रेंज 20 करोड़ से लेकर 100 करोड़ तक जा सकती है. यह लोकेशन पर भी निर्भर करता है. गुरुग्राम भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का ऐसा इलाका है, जहां ग्राहक शानदार पेंटहाउस खोज सकते हैं. इस मार्केट में भी पेंटहाउस की कीमत कई करोड़ तक जा सकती है. ऐसा ही ट्रेंड पुणे और बेंगलुरु में भी देखा जा सकता है, जहां पेंटहाउस काफी मशहूर हैं. नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन में भी पेंटहाउस की प्राइज रेंज 6-12 करोड़ तक जा सकती है.

जो लोग पेंटहाउस में निवेश कर रहे हैंउन्हें यह बात को ध्यान में रखना चाहिए कि हर यूनिट अपने आप में खास है और इसलिए एक इकाई की प्रति वर्ग फुट कीमत की तुलना दूसरे के साथ करना ठीक नहीं है.

 

पेंटहाउस पर तरजीही जगहों के शुल्क

हाउसिंग सोसाइटीज में विशेष जगहों के लिए शुल्क लगाए जाते हैंजिन्हें पीएलसी कहा जाता है. ये इसलिए लगता है क्योंकि बाकी अन्य फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स की तुलना में पेंटहाउस में आपको शानदार आरामहाइटव्यू मिलता है. स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क या अचल संपत्ति पर जीएसटी के विपरीतपीएलसी तय नहीं है और हर बिल्डर की यह अलग-अलग होती है. पीएलसी के कारण आपको घर की खरीद पर अतिरिक्त 50 रुपये से 100 रुपये प्रति वर्ग फुट खर्च करना पड़ सकता है लेकिन पेंटहाउस के मामले में यह खर्च और ज्यादा हो सकता है.

 

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पेंटहाउस के निर्माण के लिए वास्तु टिप्स

खरीदार इन दिनों वास्तु को लेकर काफी संजीदा हो गए हैं. पेंटहाउस के निर्माण के दौरान भी वास्तु के सारे नियमों का पालन किया जाता है. हालांकि आधुनिक विशेषज्ञ कुछ अतिरिक्त टिप्स भी देते हैं ताकि पेंटहाउस बेहतर तरीके से सुजज्जित और वास्तु के मुताबिक बन सके. वास्तु एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पश्चिम और उत्तर दिशाएं पेंटहाउस बनाने के लिए सबसे बेहतर हैं जबकि पूर्व और उत्तर दिशा से बचना चाहिए. दूसरे शब्दों में, छत के दक्षिण-पश्चिम कोने की ओर पेंटहाउस का निर्माण किया जाना चाहिए. इसका मतलब है कि आपको पूर्व और उत्तर दिशाओं को खुली जगह के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए. उत्तर-पूर्व का कोना बगीचे या फिर पौधे लगाने के लिए सबसे बेहतर जगह है. यह भी सिफारिश की जाती है कि पेंटहाउस की संरचना पश्चिम और दक्षिण की ओर ज्यादा लंबी हो.

जैसा कि सभी निर्माणों में होता है, छतों का ढलान उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए. उनका ढलान दक्षिण या पश्चिम की ओर नहीं होना चाहिए.

 

भारत में पेंटहाउस की डिमांड

कोरोना वायरस महामारी के बादबड़े स्वतंत्र घरों की डिमांड कई गुना बढ़ गई है. यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि फरवरी 2021 में अहमदाबाद में एक पेंटहाउस 25 करोड़ रुपये में बेचा गया था.  बोडकदेव में राजपथ क्लब और अशोक वाटिका के पीछे बड़े पेंटहाउस आलीशान हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का हिस्सा थे और उनका सुपर बिल्ड अप एरिया 18000 स्क्वेयर फुट था. इसी प्रोजेक्ट का अन्य पेंटहाउस करोड़ रुपये में बिका था.

आने वाले समय में भारत में पेंटहाउस की डिमांड उन जगहों पर रफ्तार पकड़ेगीजहां इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े डेवेलपमेंट होने हैं. उदाहरण के तौर पर नोएडा में पेंटहाउस की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि यहां उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने फिल्म सिटी बनाने का ऐलान किया है. डेवेलपर्स का मानना है कि नोएडा फिल्म सिटी शहर में सितारों को आकर्षित करेगीजिससे आलीशान पेंटहाउस की डिमांड बढ़ेगी.

गुलशन होम्स के डायरेक्टर दीपक कपूर ने कहा, ‘जो लोग बॉलीवुड में काम कर रहे हैंवे ऐसी रियल एस्टेट जगह देखेंगेजो उनके स्टैंडर्ड से मेल खाती हों इसलिए आला दर्जे वाले प्रोजेक्ट्स को शानदार कामयाबी मिलेगी. क्षेत्र में पेंटहाउसविला और फार्महाउस की डिमांड बढ़ेगी. वेलनेस होम कॉन्सेप्ट की डिमांड भी ऊपर जाएगी.

 

पूछे जाने वाले सवाल

पेंटहाउस का मतलब क्या होता है?

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक, एक बड़ी सी इमारत के टॉप पर एक पेंटहाउस महंगा और आरामदायक फ्लैट या कमरों का सेट होता है.

मुंबई में पेंट हाउस की कीमतें क्या होती हैं?

मुंबई में पेंटहाउस की कीमतें 20 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक हो सकती हैं. यह लोकेशन पर भी निर्भर करता है.

निवेश के नजरिए से पेंटहाउस कैसे होते हैं?

इसमें पूंजी का निवेश बहुत ज्यादा होता है. इसलिए ऐसे प्रीमियम हाउसिंग ऑप्शन्स में नगण्य मूल्यह्रास (Depreciation) देखा जाता है. उस तरीके से यह मिड रेंज प्रॉपर्टी के विकल्पों से काफी ज्यादा सुरक्षित है, खासकर कमजोर मार्केट में

 

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