जानिए कैसे रियल एस्टेट एक्ट ने बदल दी कारपेट एरिया की परिभाषा

रियल एस्टेट एक्ट में डिवेलपर्स के लिेए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जो भी फ्लैट वह बेचेंगे, उसका उन्हें कारपेट एरिया बताना होगा। आज हम आपको कारपेट एरिया की परिभाषा और कैसे यह घर ग्राहकों और प्रॉपर्टी की कीमतों को प्रभावित करेगा, इसके बारे में बताएंगे।
प्रॉपर्टी का एरिया तीन तरीकों से कैलकुलेट किया जाता है-कारपेट एरिया, बिल्ड-अप एरिया और सुपर बिल्ड-अप एरिया। इसलिए जब भी बात प्रॉपर्टी खरीदने की आती है तो आप क्या चुकाएंगे और आपको क्या मिलेगा, इसके बीच काफी फर्क होता है। इसलिेए हैरानी की बात नहीं कि बिल्डरों के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में ज्यादातर मामले धोखाधड़ी और फ्लैट के साइज के हैं। रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डिवेलपमेंट) एक्ट, 2016 (RERA) के प्रावधानों के मुताबिक यह अब डिवेलपर की ड्यूटी है कि वह घर खरीददारों को कारपेट एरिया के बारे में बताएं और कीमतें भी उसके आधार पर तय करें, सुपर-बिल्ड-अप एरिया पर नहीं।
महाराष्ट्र RERA के चेयरमैन गौतम चटर्जी ने कहा, अब यह सभी बिल्डर्स के लिेए अनिवार्य है कि वे अपार्टमेंट का साइज कारपेट एरिया (चार दीवारों के बीच का एरिया) के आधार पर बताएं। इस्तेमाल होने वाले इल एरिया में टॉयलेट एवं किचन भी शामिल होंगे। इससे पारदर्शिता आएगी, जो पहले नहीं थी।

RERA के तहत कारपेट एरिया: इसमें क्या-क्या आएगा?

कारपेट एरिया या नेट यूजेबल एरिया वह स्पेस होता है, जिसमें कारपेट फैलाया जा सकता है। बिल्ड-अप एरिया में कारपेट एरिया के अलावा प्राधिकारियों द्वारा मंजूर किए गए बाकी एरिया जैसे बाहरी व अंदरूनी दीवारें, बालकनी इत्यादि आते हैं। वहीं सुपर-बिल्ड-अप एरिया में कारपेट एरिया, बिल्ड-अप एरिया और बैलेंस एरिया जैसे सीढ़ियां, लॉबी, गैलरी आते हैं, जिसे पूरी बिल्डिंग इस्तेमाल करती है।
RERA के मुताबिक कारपेट एरिया किसी अपार्टमेंट का इस्तेमाल होने वाला एरिया होता है, जिसमें बाहरी दीवारों का एरिया, सर्विस शाफ्ट, बालकनी और वरांडा एरिया शामिल नहीं होते। फ्लैट के अंदर की दीवारों का एरिया इसका हिस्सा होता है।
आसान भाषा में कहें तो: आरआईसीएस के साउथ एरिया के हेड दिग्बिजॉय भौमिक के मुताबिक एक अपार्टमेंट की बाहरी दीवारों के अंदर कुछ भी, लेकिन बालकनी, बरामदा या खुले छत और शाफ्ट को छोड़कर वह कारपेट एरिया है। उन्होंने कहा, बालकनी एरिया भी इसमें शामिल नहीं होगा, चाहे वह सिर्फ फ्लैट के लिए ही क्यों न हो। लिफ्ट लॉबी, सीढ़ियां या घर के अंदर आने से पहले वाला एरिया भी इसमें शामिल नहीं होगा। इसके अलावा किचन या शौचालय से हवा को बाहर फेंकने वाला कॉमन या एक्सक्लूसिव शाफ्ट भी इसका हिस्सा नहीं है। लेकिन वॉक-इन वॉडरॉब इसमें शामिल होगा।
अजमेरा रियलिटी के डायरेक्टर धवल अजमेरा ने कहा, कई प्रोमोटर कारपेट एरिया के बारे में जानकारी देने के बजाय बिल्ड-अप एरिया के बारे में बताते हैं, जो बिल्ड-अप एरिया से कम होता है। अब ग्राहकों के लिए एक स्पष्ट परिभाषा है, वह भी फ्लैट के असली माप के साथ।

क्यों जरुरी है कारपेट एरिया के बारे में जानना

शेलट्रैक्स के सीईओ संदीप सिंह ने कहा, अब ग्राहकों को अपने फ्लैट का सही माप पता चलेगा, जिसकी वह बिल्डर से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। अब उन्हें यह भी मालूम होगा कि फ्लैट का कौन सा हिस्सा कारपेट एरिया में और कौन सा वरांडा या छत में शामिल है। इसके अलावा अपने प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग करने में डिवेलपर्स को ज्यादा सख्त होना होगा, ताकि कारपेट एरिया की योजनाओं को सही तरीके से पेश किया जा सके।
  • पहले बिल्डर बालकनी, छत, वरांडा और खाली जगह को भी कारपेट स्पेस बता देते थे। यह चलन अब खत्म हो जाएगा।
  • कुछ मामलों में कॉर्नर या अन्य अपार्टमेंट्स कुछ लाभदायक या नुकसानदायक जगहों पर बने होते हैं। उन्हें कम या फिर ज्यादा कारपेट स्पेस मिलता है। जो लाभदायक जगह वाले अपार्टमेंट्स होते हैं, उनका कारपेट एरिया भी ज्यादा होता है और कीमत भी। जो अपार्टमेंट्स कुछ कारपेट एरिया खो देते हैं, वे कभी डिस्काउंट में नहीं दिए जाते, क्योंकि ‘गायब’ कारपेट एरिया सुपर-बिल्ड-अप एरिया ढक दिया जाता था।
  • अच्छा डिजाइन और कुशलता अब अहम होगी। पहले एक बेकार डिजाइन, जिसमें काफी कॉमन एरिया स्पेस इस्तेमाल होता था, उसकी भी अच्छे डिजाइन जितनी कीमत होती थी। क्योंकि दोनों का बिल्ड-अप एरिया बराबर होता था और कापरेट एरिया अलग।
घर खरीददार निधि शर्मा ने कहा कि संपत्ति दर प्रति वर्ग फुट, निश्चित तौर पर ऊपर जाएगा, क्योंकि कुल मूल्य कम विभाजक (कारपेट एरिया, सुपर बिल्ड-अप एरिया के खिलाफ) से भाग किया जाएगा। फिर भी यह जरूर पता चल जाएगा कि हमें क्या मिलेगा। अब हमें 700 स्क्वेयर फुट के नाम पर 500 स्क्वेयर फुट अपार्टमेंट नहीं मिलेगा।

कारपेट एरिया की जानकारी ग्राहकों को कैसे फायदा पहुंचाएगी?

इसप्रवा के संस्थापक और सीईओ निभ्रंत शाह ने कहा कि प्रोजेक्ट साइट, लेआउट और प्लॉट के बारे में सटीक सूचना ग्राहक को सही फैसला लेने में मदद करेगी। ग्राहकों के लिए भी प्रॉपर्टी पर टैक्स देयता और अधिकारों को समझना आसान हो जाएगा। सुमेर ग्रुप के सीईओ राहुल शाह ने कहा, RERA की गाइडलाइंस के मुताबिक, बिल्डर को सटीक कारपेट एरिया की जानकारी देनी होगी, ताकि ग्राहकों को यह पता चल सके कि वह किसके लिए भुगतान कर रहे हैं। लेकिन कानून के तहत बिल्डरों को कारपेट एरिया के आधार पर फ्लैट बेचना अनिवार्य नहीं है। साईं एस्टेट कंसलटेंट्स के डायरेक्टर अमित वाधवानी ने कहा कि जागरूकता फैलाने के लिए कई कदम उठाए जाने बाकी हैं। उन्होंने कहा, सूचना फैलाने के लिए बैंकर्स, इन्वेस्टर्स, डिवेलपर्स और ब्रोकर्स को RERA पर अमल शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलती परिभाषा को न सिर्फ अमल में लाना चाहिए बल्कि रियल एस्टेट बिरादरी को जमीनी स्तर पर काम भी करना चाहिए, ताकि पारदर्शिता आए और ग्राहकों को फायदा पहुंचे।
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