जीपीआरए: जानिए ई-संपदा सिस्टम के बारे में सब कुछ


केंद्र सरकार के कर्मचारी जीपीआरए के तहत आवास के लिए अप्लाई करने के हकदार हैं. हम आपको उन बातों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में आपको जानना जरूरी है.

अपने कर्मचारियों को किफायती आवास मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार घरों का एक पूल रखती है, जो योग्यता, जरूरत और नौकरियों के आधार पर आवंटित किए जाते हैं. सरकारी कर्मचारी आवास के लिए आसानी से अप्लाई कर सकें, इसके लिए केंद्रीय आवास मंत्रालय ने ई-संपदा पोर्टल लॉन्च किया है. इससे पहले अलॉटमेंट ई-आवास पोर्टल के जरिए होती थी, जहां आवेदक जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन (GPRA) प्रणाली के तहत अपनी वर्क लोकेशन पर आवास इकाइयों का चयन और आवेदन करने में सक्षम थे.

सब्सिडी वाले घरों के लिए आवेदन करने के लिए, आवेदक को कुछ दिशानिर्देशों का पालन और पात्रता मानदंडों को पूरा करने की जरूरत होती है. यहां हम आपको GPRA ई-अवास और ई-संपदा पोर्टल के अलावा अन्य जरूरी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं.

जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन क्या है?

जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन (जीपीआरए) केंद्र सरकार की एक स्कीम है, ताकि योग्य केंद्रीय कर्मचारियों को रिहायशी आवास मुहैया कराया जा सके. ये दिल्ली में एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ द डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स (DoE)के तहत आते हैं और  अलॉटमेंट ऑफ गवर्नमेंट रेजिडेंस रूल्स 1963 के प्रावधानों के तहत न सिर्फ दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय राजधानी के बाहर 31 स्टेशन में अलॉट किए जाते हैं, जिसमें कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और चंडीगढ़ इत्यादि भी शामिल हैं.

जो आवेदक दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार के अधीन काम कर रहे हैं को जनरल पूल के तहत आवंटन के हकदार हैं. जीपीआरए के तहत जो योग्य जोन कवर किए गए हैं, उनमें शहरी सीमा के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स क्षेत्रीय कार्यालय या सेंट्रल पब्लिश वर्क्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्ल्यूडी) द्वारा घोषित किए गए इलाके शामिल हैं.

-जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन (जीपीआरए) केंद्र सरकार की एक स्कीम है, जो योग्य केंद्रीय कर्मचारियों को रिहायशी आवास मुहैया कराती है.

-किसी खास प्रकार के आवास के लिए जीपीआरए हाउस का आवंटन ‘यूनिफाइड वेटिंग लिस्ट’ द्वारा किया जाता है.

-जीपीआरए हाउस के लिए एप्लिकेशन सिर्फ ऑनलाइन ही दर्ज कराई जा सकती है, जो ऑटोमेटेड सिस्टम ऑफ अलॉटमेंट (एएसए) के जरिए होता है.

– घर खाली करने से दो दिन पहले डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट को सूचित कर कोई भी आवंटी जीपीआरए को छोड़ सकता है.

जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन के लिए कौन योग्य है?

-जो आवेदक दिल्ली के सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे हैं, उनकी लोकेशन कैबिनेट कमिटी ऑन अकोमोडेशन (सीसीए) द्वारा मंजूर होनी चाहिए. इसके अलावा, वे राष्ट्रीय राजधानी  क्षेत्र की सीमा के अंदर होने चाहिए.

-जो आवेदक दिल्ली से इतर सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे हैं, उनका प्रस्ताव सीसीए द्वारा मंजूर होना चाहिए और उसे जॉइंट सेक्रेटरी की मंजूरी के बाद डायरेक्टोरेट को भेजा जाना चाहिए, जैसे कार्यालय की स्थिति और अगर अधिकारी और विभाग के कर्मचारी किसी अन्य पूल से रिहायशी आवास के पात्र हैं.

-सभी सरकारी कर्मचारी जिनका डिपार्टमेंटल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन पूल है, वे जनरल पूल के लिए अप्लाई करने योग्य हैं. लेकिन आवेदक को अपने डिपार्टमेंट से एक सर्टिफिकेट सब्मिट करना होगा, जिसमें यह लिखा होगा कि ‘किसी भी आवेदक को विभाग के पूल से बदले में कोई जूनियर नहीं दिया गया है’. जिन सर्टिफिकेट्स में ये शर्तें नहीं लिखी होंगी, उसे मंजूर नहीं किया जाएगा.

ग्रेड पे और आवास का हकदार

आवास का प्रकार ग्रेड पे /बेसिक पे (रुपये में)
I 1,300, 1,400, 1,600, 1,650 और 1,800
II 1,900, 2,000, 2,400 और 2,800
III 4,200, 4,600 और 4,800
IV 5,400 से 6,600
IV (एसपीएल) 6,600
V-ए (डी-II) 7,600 से 8000
V-बी (डी-I) 8,700 से 8,900
VI-ए (सी-II) 10,000
VI-बी (सी-I) 67,000 से 74,999
VII 75,000 से 79,999
VIII 80,000 या इससे ज्यादा

आवास आवंटन के लिए प्राथमिकता

आवास का प्रकार प्राथमिकता का कारक
निचला प्रकार – जैसे, टाइप-I, II, III, IV भारत सरकार के साथ नौकरी जॉइन करने की तारीख
ऊंचे प्रकार के आवास – जैसे, टाइप IV (स्पेशल) से VI 1) ऑफिस का ग्रेड पे.

2) वह तिथि जिससे आवेदक अपने वर्तमान वेतन के ग्रेड को लगातार बना रहा है

3) बेसिक पे– यानी उच्च वेतन वाले अधिकारियों की प्रतीक्षा सूची में वरिष्ठता होगी .

4) नौकरी जॉइन करने की तारीख.

5) जब प्राथमिकता तारीख, बेसिक पे और दो या दो से अधिक अधिकारियों की सेवा में शामिल होने की तिथि समान है, पहले सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि जो अधिकारी टाइप V या उससे ज्यादा के आवास के लायक हैं, वे अपनी वरीयता से कम का आवास भी चुन सकते हैं. लेकिन टाइप IV (स्पेशल) से कम नहीं. हालांकि जो अधिकारी टाइप V-A और IV (स्पेशल) के योग्य हैं, वे टाइप IV आवास के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

जीपीआरए के तहत अलॉटमेंट की प्रक्रिया

किसी खास प्रकार के आवास के लिए अलॉटमेंट जीपीआरए में ‘यूनिफाइड वेटिंग लिस्ट’ के आधार पर होता है. इस वेटिंग लिस्ट में, सारे आवेदक, इसमें वो भी शामिल हैं जो शुरुआती आवंटन का इंतजार कर रहे हैं, साथ ही आवास बदलने वालों को साथ में मिला लिया जाता है. अलॉटमेंट्स को प्राथमिकता और वरिष्ठता के आधार पर किया जाता है. हर आवेदक को हर प्रकार के आवास में दो तरह के अलॉटमेंट्स मिलते हैं, यानी शुरुआत और बदलाव.

ई-संपदा का इस्तेमाल कर कैसे करें जीपीआरए के लिए अप्लाई

सभी सरकारी कर्मचारी ऑनलाइन ही घरों के आवंटन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. सरकारी आवास के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने का ये है तरीका:

स्टेप 1: ई-संपदा पोर्टल पर जाएं और Government Residential Accomodation पर क्लिक करें.

स्टेप 2: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ऑफिशियल ई-मेल आईडी से लॉग इन करें.

स्टेप 3: लॉग इन करने के बाद आप DE-II फॉर्म भर पाएंगे. इसके बाद आगे की प्रक्रिया को फॉलो करें.

ई-आवास के जरिए एप्लिकेशन्स

अगर आप ई-आवास के जरिए अप्लाई कर रहे हैं तो आप DE-2 फॉर्म का इस्तेमाल कर ऑटोमेटेड सिस्टम ऑफ अलॉटमेंट (एएसए) पर पहुंच जाएंगे, उन शहरों के लिए जहां के लिए एएसए डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

जीपीआरए के लिए पात्र घोषित किए गए सरकार और अन्य संगठनों के मंत्रालयों, विभागों या कार्यालयों में पोस्टिंग के स्थान पर नियमित नियुक्ति / ट्रांसफर के बाद ही यह आवेदन किया जाना चाहिए. अप्लाई करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें.

स्टेप 1: जीपीआरए पोर्टल पर जाएं और उस क्षेत्र पर क्लिक करें, जहां के आवास के लिए आप अप्लाई करना चाहते हैं.

स्टेप 2: ई-आवास के जरिए लॉग इन आईडी बनाएं और फॉर्म भरें.

स्टेप 3: डीई-2 फॉर्म को भरने के लिए लॉग इन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करें.

स्टेप 4: फॉर्म का प्रिंट आउट निकाल लें और उसे आवेदक के दफ्तर से डीओई को फॉर्वर्ड करा दें.

स्टेप 5: डीई-2 फॉर्म सब्मिट होने के बाद, आवेदक का अकाउंट एक्टिवेट हो जाएगा और वेटिंग लिस्ट में शामिल कर लिया जाएगा.

नोट: महीने के अंतिम दिन तक मिले आवेदनों को बाद के महीने की प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाता है. जीपीआरए के लिए आवेदन करने के लिए भी आधार संख्या अनिवार्य है.

अलॉटमेंट लेटर और अथॉरिटी स्लिप

सभी अलॉटमेंट लेटर्स ऑनलाइन जारी किए जाएंगे और मंजूरी ई-अवास और ई-संपादा पर उपलब्ध स्वीकृति फॉर्म ’के जरिए भरनी होती है.

एक बार स्वीकृति फॉर्म वेरिफाई होने और ऑफिस द्वारा उसे मंजूर किए जाने के बाद, एक प्राधिकरण स्लिप और एक लाइसेंस शुल्क बिल ऑनलाइन जनरेट किया जाएगा और आवंटी को भेजा जाएगा. एक बार आवंटित आवास की फिजिकल ऑक्युपेशन की रिपोर्ट आवंटियों को हासिल हो जाने के बाद, संशोधित लाइसेंस शुल्क बिल आवंटनकर्ता को ऑनलाइन भेजा जाएगा.

फ्लैट की पोजेशन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

1. आवंटी को फ्लैट में मौजूद हर चीज जैसे फिटिंग/फर्नीशिंग की चीजों की जानकारी लेनी चाहिए, ताकि बाद में असुविधा न हो.

2. किसी भी तरह की टूट-फूट की जानकारी सीपीडब्ल्यूडी के संज्ञान में लानी चाहिए और उस पर काम होना चाहिए.

3. हैंडओवर मिल जाने के बाद आवंटी को ताला बदल लेना चाहिए.

4. आवंटी को फिजिकल ऑक्युपेशन रिपोर्ट जरूर हासिल कर लेनी चाहिए, जिस पर सीपीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर के दस्तखत हों.

5. आवंटित घर में पानी और बिजली के कनेक्शन हासिल करने के लिए आवंटी को म्युनिसिपल अथॉरिटी के पास जाना चाहिए.

6. किराया या तो डेट ऑफ ऑक्युपेशन या अलॉटमेंट लेटर के आठवें दिन से लिया जाएगा, जो भी पहले हो.

7. अगर सीपीडब्ल्यूडी यह प्रमाणित करता है कि घर कब्जे के लिए उपयुक्त नहीं है, तो आवास शुल्क आवंटित करने की तारीख से लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा.

घर बदलने की क्या है प्रक्रिया

एक आवेदक घर के बदलाव के लिए सिर्फ उसी टाइप में आवेदन कर सकता है. हालांकि, एक विशेष प्रकार के आवास में केवल एक परिवर्तन की इजाजत है. एक आवंटी जो घर बदलना चाहता है, उसे निर्धारित फॉर्म में एक ऑनलाइन आवेदन पेश करना होगा और उसी आवेदन की एक हार्ड कॉपी अपने ऑफिस से आईएफसी, डीओई, निर्माण भवन, नई दिल्ली या विभिन्न स्थानों पर क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजनी होगी. आवेदक किसी खास प्रकार के आवास के लिए बोली लगाने की अवधि के दौरान ऑनलाइन क्षेत्रों के लिए वरीयताएं भी दे सकता है.

जिस तारीख को आवंटन पत्र जारी किया गया था, उससे आवंटी को आवास के परिवर्तन के लिए अपनी मंजूरी देनी पड़ती है. और जिस दिन से नया घर आपको मिला है, उस दिन से 15 दिनों के भीतर पिछला घर खाली कर दें.
अगर तय समय सीमा में आवंटी घर खाली नहीं करता है तो अलॉटमेंट रद्द होने के साथ-साथ उसे बाहर निकालने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है.

जीपीआरए के तहत  टाइप IV और  VIII आवास की अलॉटमेंट

पद की जरूरत और संवेदनशीलता को देखते हुए, टाइप VII और VIII के सामान्य पूल के तहत सभी आवंटन शहरी विकास मंत्री द्वारा आवंटित किए जाते हैं. डीई-2 फॉर्म के जरिए आप ऐसे आवास के लिए एप्लिकेशन ऑफलाइन भी दे सकते हैं, जिसे इसके बाद वेरिफिकेशन के लिए डीओई को भेजा जाएगा. अन्य श्रेणियों के आवास के लिए भी यही प्रक्रिया है.

जीपीआरए अलॉटमेंट के लिए कोटा और पूल

जीपीआरए के तहत अलॉटमेंट के लिए कई कोटा और पूल होते हैं.

1. सेक्रेटरीज पूल:  नई दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 70 प्रकार के VII घर एएसए के जरिए भारत सरकार के सचिवों को ऑनलाइन आवंटन के लिए उपलब्ध हैं.

2. टेन्योर ऑफिसर्स पूल: ऑल इंडिया सर्विसेज (आईएएस, आईपीएस इत्यादि) के लिए कई आवास उपलब्ध हैं. ये उन अफसरों के लिए होते हैं, जो टेन्योर बेसिस पर भारत सरकार में सेवाएं देते हैं.

3. टेन्योर पूल: सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत सेंट्रल डेप्युटेशन पर नॉन ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों के लिए कई आवास विकल्प रखे गए हैं.

4. लेडी ऑफिसर्स पूल: कई आवास खासतौर पर शादीशुदा और कुंवारी महिला अफसरों के लिए रखे गए हैं. लेडी अफसर भी जनरल पूल के लिए योग्य हैं. हालांकि लेडी अफसर के आवास में बदलाव पर वह सिर्फ लेडी अफसर पूल के एवज में ही मिलेगा.

5. लीगल ऑफिसर्स पूल: करीब 10 घर भारत सरकार के कानूनी अफसरों के लिए रखे गए हैं, जिनमें सॉलिसिटर जनरल, अडिशनल सॉलिसिटल जनरल और अटॉर्नी जनरल शामिल हैं.

6. प्रेस पूल: करीब 100 घर पत्रकारों, कैमरामैन के लिए उपलब्ध हैं. ये आवंटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सिफारिशों के बाद दिए जाते हैं. जिन पेशेवरों की सैलरी प्रतिमाह 20 हजार रुपये है और वे कैटिगरी -I में आते हैं, वे टाइप IV आवास के हकदार हैं. इसी तरह, जिनकी प्रतिमाह तनख्वाह 20 हजार रुपये से 40 हजार रुपये है, वे कैटगरी-II में आएंगे और वे टाइप IV (स्पेशल) आवास के योग्य हैं.

7. आर्टिस्ट्स पूल: इस कोटा के तहत, 40 घर नामी कलाकारों के लिए रखे जाते हैं, जिनके नाम की सिफारिश केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय करता है.

विवेकाधीन कोटा के तहत आउट ऑफ टर्न आवंटन

विवेकाधीन आवंटन मेडिकल, सिक्योरिटी और कार्यात्मक आधार पर किए जाते हैं और आवेदकों के पात्रता के नीचे एक प्रकार है. इस तरह के प्राथमिकता वाले आवंटन केंद्रीय क्षेत्रों में पहली मंजिल पर और गैर-केंद्रीय क्षेत्रों में किसी भी मंजिल पर किए जाते हैं. ये आवंटन सरकारी अधिकारियों के अनुरोध पर, अत्यधिक अनुकंपा समूहों पर और एक कैलेंडर वर्ष में हर प्रकार के कुल पांच घरों तक सीमित हैं.

जीपीआरए के तहत आवास का सरेंडर

एक आवंटी आवास को खाली करने की तारीख से कम से कम दो दिन पहले डीओई को सूचित करके, अपने कब्जे वाले जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन को आत्मसमर्पण कर सकता है.

जब निदेशालय को पत्र मिलेगा या फिर जो तारीख पत्र में लिखी होगी, उसके 11वें दिन से अलॉटमेंट रद्द हो जाएगा, जो भी बाद में हो.  अगर आवेदक नोटिस देने में असक्षम रहता है तो उसे 10 दिन के लिए लाइसेंस फीस देनी चाहिए या फिर उन दिनों की संख्या, जो उसके द्वारा दिए गए नोटिस से 10 दिन कम हो. यहां डीओई शॉर्ट पीरियड के लिए नोटिस मंजूर कर सकता है.

रिटायरमेंट/डिस्मिस/इस्तीफे के बाद परिसर छोड़ना

सरकारी आवास के लिए योग्य कार्यालय में एक आवंटियों के ड्यूटी पर रहने के बाद नियमों के तहत अनुमति के रूप में प्रतिधारण की रियायती अवधि की समाप्ति के बाद आवंटन को रद्द या रद्द माना जाता है.

इवेंट लागू होने की अवधि और लाइसेंस शुल्क (एसआर 317-बी -11) लागू करने की अवधि और लाइसेंस शुल्क (एसआर 317-बी -22)
इस्तीफा, बर्खास्तगी, सेवा से हटाना, सेवा की समाप्ति या अनधिकृत अनुपस्थिति नॉर्मल लाइसेंस फीस पर 1 महीना कोई प्रतिधारण स्वीकार्य नहीं है
सेवानिवृत्ति (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सहित) या टर्मिनल लीव 1) 1 जुलाई, 2013 से पहले आवंटित आवास के मामले में: नॉर्मल रेट पर दो महीने, नॉर्मल रेट के दोगुने पर दो महीने, नॉर्मल रेट के चार गुना पर दो महीने, नॉर्मल रेट पर 6 गुना दो महीने के लिए. (8 महीने)

(2) 1 जुलाई, 2013 को या उसके बाद आवंटित आवास के मामलों में: नॉर्मल रेट पर दो महीने, दो मगीने के लिए नॉर्मल रेट पर दोगुने और नॉर्मल रेट पर दो महीने के लिए चार गुना (6 महीने)

आवंटी की मौत नॉर्मल रेट पर 12 महीने नॉर्मल रेट पर 12 महीने
दिल्ली के बाहर किसी जगह पर ट्रांसफर नॉर्मल रेट पर 2 महीने छह महीने सामान्य दर से दोगुना
दिल्ली में गैर योग्य कार्यालय में ट्रांसफर नॉर्मल रेट पर दो महीने सामान्य दर से 6 महीने के लिए दोगुना
भारत में विदेशी सेवा पर रहने पर नॉर्मल रेट पर दो महीने सामान्य दर से 6 महीने के लिए दोगुना
भारत में अस्थायी ट्रांसफर या विदेश में किसी जगह पर ट्रांसफर नॉर्मल रेट पर 4 महीने सामान्य दर से 6 महीने के लिए दोगुना
छुट्टी (इंकार की छुट्टी के अलावा, टर्मिनल छुट्टी, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश) नॉर्मल रेट पर 4 महीने सामान्य दर से 6 महीने के लिए दोगुना
भारत या बाहर स्टडी लीव (1) अगर अधिकारी अपनी योग्यता से नीचे के आवास पर रह रहा है: पूरी अवधि के लिए नॉर्मल रेट पर स्टडी लीव

(2)  अगर कार्यालय एक प्रकार का आवास भी है तो सामान्य दर पर छह महीने की समाप्ति पर एक प्रकार का वैकल्पिक आवास आवंटित किया जाता है.

स्वीकार्य नहीं है
भारत के बाहर प्रतिनियुक्ति नॉर्मल रेट पर 6 महीने सामान्य दर से 6 महीने के लिए दोगुना
मेडिकल आधार पर छुट्टियां सामान्य दर पर छुट्टी की पूरी अवधि स्वीकार्य नहीं है
प्रशिक्षण के लिए आगे बढ़ने पर सामान्य दर पर प्रशिक्षण की पूर्ण अवधि स्वीकार्य नहीं है

 

वो शहर जहां जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन उपलब्ध हैं

उत्तर पूर्व दक्षिण पश्चिम मध्य नॉर्थ ईस्ट
दिल्ली कोलकाता चेन्नई नागपुर आगरा अगरतला
शिमला पटना बेंगलुरु मुंबई प्रयागराज गंगटोक
चंडीगढ़ कालीकट पुणे बरेली गुवाहाटी
गाजियाबाद कोच्चि गोवा भोपाल इम्फाल
फरीदाबाद हैदराबाद राजकोट इंदौर कोहिमा
देहरादून सिकंदराबाद बीकानेर कानपुर शिलॉन्ग
श्रीनगर मैसूर जोधपुर लखनऊ सिलचर
पोर्ट ब्लेयर जयपुर वाराणसी सिलिगुड़ी
त्रिवेंद्रम
विजयवाड़ा  

जीपीआरए के तहत ई-संपदा के जरिए क्या ऑफर किया जाता है

ई-संपदा के जरिए एक यूजर ये जगह बुक कर सकता है:

1. वेन्यू की बुकिंग: फिलहाल, 5 अशोक रोड और दिल्ली का विज्ञान भवन ऑनलाइन ई-संपदा के जरिए बुक किया जा सकता है. अन्य जगहों में किदवई नगर लॉन्स और शिमला का फगली क्लब शामिल है.

2. ऑफिस अकोमोडेशन बुकिंग: डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स ही दिल्ली और अन्य जगहों पर ऑफिस अकोमोडेशन का कामकाज देखता है. योग्य केंद्रीय कर्मचारियों को ऑफिस स्पेस अलॉट किए जाते हैं, जो जगह की उपलब्धता पर आधारित होते हैं. ई-परिसर के जरिए ऑफिस बुक किए जा सकते हैं

3. दुकान/मार्केट की बुकिंग: डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स के पास आईएनए मार्केट के आवंटन और मालिकाना हक है. इसके अलावा किदवई नगर (ईस्ट) और न्यू मोती बाग में बने नए मार्केट्स का भी कामकाज यही संस्था देखती है.

कुल जीपीआरए यूनिट्स 1,09,474
कुल जगह 340
कुल शहर 70
कुल गेस्ट हाउस 62
कुल ऑफिस स्पेस 1.25 करोड़ स्क्वेयर फीट

जीपीआरए से जुड़ी ताजा खबर

अधिकारियों को जीपीआरए श्रेणी के तहत मिले सरकारी आवास अब महंगे होने जा रहे हैं क्योंकि सरकार ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें पूरे देश में आवास के लिए लाइसेंस शुल्क की वसूली योग्य फ्लैट दर में वृद्धि की गई है. हाउसिंग मिनिस्ट्री द्वारा जारी आदेश के मुताबिक,  सभी प्रकार के सरकारी आवासों के लिए लाइसेंस शुल्क दरों में इजाफा किया जाएगा, जो टाइप I से टाइप VIII तक हैं. ऐसा 7 वें वेतन आयोग के तहत वेतन मैट्रिक्स के स्तर के आधार पर किया जाएगा. लाइसेंस शुल्क की संशोधित दरें 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी होंगी. जो कर्मचारी रक्षा मंत्रालय और रेल मंत्रालय में काम कर रहे हैं उन्हें इस वृद्धि में छूट दी गई है.

सरकारी क्वॉटर पाने के लिए एक सरकारी कर्मचारी को बेसिक सैलरी का हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छोड़ना होगा और नॉमिनल रेंट (लाइसेंस फीस) ग्रॉस सैलरी से काट लिया जाएगा.

पूछे जाने वाले सवाल

जीपीआरए के लिए ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें?

अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके आप ई-संपदा पोर्टल के जरिए GPRA के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

क्या मुझे दिल्ली में सरकारी क्वॉटर्स मिल सकते हैं?

अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं तो आप जीपीआरए के तहत आवास के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

मैं अपना सीपीडब्ल्यूडी क्वॉटर कैसे सरेंडर कर सकता हूं?

परिसर खाली करने से दो दिन पहले सभी सरकारी कर्मचारियों को डीओई को इसकी सूचना देनी होगी.

Was this article useful?
  • 😃 (0)
  • 😐 (0)
  • 😔 (1)

Comments

comments

Comments 0