घर रेनोवेशन कराने के लिए नहीं लेनी पड़ेगी बीएमसी की मंजूरी, लेकिन शर्तें लागू


बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लोगों को अपने घरों में बदलाव करने की इजाजत दी है और इसके लिए खुद बीएमसी की परमिशन की भी जरूरत नहीं है। इस फैसले से लोगों को नौकरशाहों के कारण होने वाली परेशानियां खत्म होंगी, लेकिन इमारतों के ढांचे से भी समझौता किया जा सकता है।
मुंबई में रियल एस्टेट की कीमतें ज्यादा होने के कारण अकसर मकान मालिकों से अपने मौजूदा घरों में अतिरिक्त जगह पैदा करने के लिए घर को दोबारा बनवाने को कहा जाता है। ईज अॉफ डूइंग बिजनेस की सरकारी पॉलिसी में सुधार के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) डिवेलपमेंट कंट्रोल रूल्स में प्लानिंग का प्रोपोजल ला रही है, जिसके तहत लोग अपने घरों में बिना इजाजत के बदलाव करवा सकते हैं। जिस बीम और दीवारों पर ढांचा खड़ा है, अगर उससे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है तो निकाय संस्था कोई एक्शन नहीं लेगी। बीएमसी के एग्जीक्युटिव इंजीनियर राजेश ढोले ने कहा, “बिल्डिंग की नींव को छुए बिना बदलाव किया जा सकता है। लेकिन अगर घर के अंदर रिपेयरिंग के काम से बिल्डिंग के ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो इसकी मंजूरी नहीं दी जाएगी”।

एक अच्छी पहल:

बीएमसी की इस सकारात्मक पहल के बाद सारा बोझ प्रशासन से हटकर नागरिकों पर आ जाएगा। कोअॉपरेटिव सोसाइटीज के प्राइवेट कंसलटेंट और आर्किटेक्ट संजय सिंह ने कहा, ”अब तक घरों में जो अंदरूनी बदलाव किए जाते थे, वे गैर-कानूनी तरीके से होते थे। अकसर कॉन्ट्रैक्टर्स इमारत के ढांचे को नुकसान पहुंचा ही देते थे। बीएमसी का यह कदम सराहनीय है। इससे आर्किटेक्ट के ऊपर अपार्टमेंट के रेनोवेशन का दायित्व होगा। उसे स्थानीय प्रशासन से भी कोई इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी”।
ऋचा रियलटर्स के सीईओ संदीप आहूजा ने कहा, ”नौकरशाही से जुड़ी परेशानियां न हों, एेसे कदम का हमेशा स्वागत होता है। उन्होंने कहा, ”इस फैसले से लोगों को गैर-जरूरी रुकावटें, देरी, लालफीताशाही और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। बिल्डिंग के ढांचे को छुए बिना लोग इमारत में बदलाव कर सकते हैं। इस कदम से रेनोवेशन साइट्स पर बीएमसी अफसरों का आना और बेवजह पेनाल्टी लगाने की धमकी देने जैसी चीजों पर लगाम लगेगी”।
एडिफिस एरेक्शन प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर उत्कर्ष जानी ने कहा, ”लोग अब अपने घरों का लेआउट बदलने के लिए हल्के मटीरियल जैसे हॉलो ब्लॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे बिल्डिंग के स्लैब पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा। हालांकि धंसी हुई स्लैब, जिसमें बाथरूम, टॉयलेट्स, किचन सिंक शामिल हैं, में बदलाव नहीं किया जा सकता”। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि लोकेशन, लोड, बीम के लेआउट की स्टडी करने के बाद ही बदलाव किया जाना चाहिए”।

समस्या कहां आएगी:

इस फैसले पर हाउसिंग सोसाइटीज सवाल उठाकर रेनोवेशन का काम रोक सकती हैं, जिससे बिल्डिंग की उम्र और उसकी वैल्यू पर असर पड़ेगा। सिविक एक्टिविस्ट जीआर वोरा बीएमसी के इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। वोरा ने कहा, अगर दीवारें शिफ्ट करने की मंजूरी पहले दे दी गई तो लोग अपनी जरूरतों और मर्जी के हिसाब से फ्लैट और दफ्तरों में बदलाव करेंगे। लोगों को इसके खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए। वोरा ने कहा, ”इससे न सिर्फ बिल्डिंग के ढांचे को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि वह गिर भी सकती है। निकाय संस्था को यह साफ कर देना चाहिए कि क्या हो सकता है और किस चीज की मंजूरी नहीं है”।
एडवांस लोकैलिटी मैनेजमेंट एंड नेटवर्किंग एक्शन कमिटी (ALMANAC) के अध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने कहा, ”लोग जब अपने घर खासकर बिल्डिंग की कमर्शियल जगहों को रेनोवेट कराते वक्त ढांचे को होने वाले खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं। जो इमारतें गिरीं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, वह इसलिए क्योंकि वजन संभालने वाली दीवारों, बीम या कॉलम्स को हटा दिया गया था”।

क्या करना चाहिए?

रेनोवेशन के लिए नागरिकों को किसी आर्किटेक्ट से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा हाउसिंग सोसाइटीज किसी प्रोफेशनल आर्किटेक्ट को हायर कर सकती हैं, ताकि सदस्य इन प्रावधानों का दुरुपयोग न कर सकें। स्ट्रक्चर इंजीनियर पवन निशाद ने कहा, ”बिल्डिंग में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए पहले अच्छी तरह सर्वे होना चाहिए। फ्लैट में रेनोवेशन कराने के लिए लोगों और सोसाइटीज को नामी प्रोफेशनल्स की मदद लेनी चाहिए”।

किस चीज की छूट है:

  • स्ट्रक्चर या दीवार में एक मशीन के जरिए सीमेंट भरना
  • प्लास्टर या पेंटिंग
  • फ्लोर्स की टाइल्स बदलना।
  • रिपेयरिंग डब्ल्यूसी, बाथरूम या कपड़े धोने की जगह।
  • ड्रेनेज पाइप्स, टंकियां या अन्य फिटिंग्स की रिपेयरिंग या बदलाव।
  • सैनेटरी, वाटर प्लम्बिंग या इलेक्ट्रिसिटी की फिटिंग्स में बदलाव या रिपेयरिंग।
  • उसी मटीरियल से छतों में बदलाव।
  •  बिना लोड बढ़ाए मौजूदा वाटर प्रूफिंग ट्रीटमेंट की रिप्लेसमेंट।

मरम्मत में जो चीज शामिल नहीं होगी:

  • स्ट्रक्चर के मौजूदा हॉरिजोंटल या वर्टिकल डाइमेंशंस में बदलाव।
  • ढांचे को संभालने वाली दीवारों को हटाया या बदलाव नहीं किया जाएगा।
  •  प्लिंथ, नींव या फर्श को कम करना।
  • मेजानाइन फर्श या लॉफ्ट का जोड़ या विस्तार।
  • विभिन्न मटीरियल्स के साथ छत की रिपेयरिंग
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