हिन्दू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. माँ दुर्गा की आराधना व उपासना का यह पर्व साल में चार बार आता है: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि होती है. लेकिन शारदीय नवरात्रि का महत्व सबसे खास होता है.
शारदीय नवरात्र कब होता है?
शारदीय नवरात्र की शुरूआज अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरूआत होती है, तथा शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक रहता है. नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है.
शारदीय नवरात्रि कैसे मनाई जाती है?

आश्विन माह में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि का पर्व काफी धूम धाम से मनाया जाता है. हमारे देश में अलग-अलग नवरात्रि मनाई जाती है इसमें माँ दुर्गा की प्रतिमाये विराजित की जाती है. साथ ही कई स्थानों पर गरवा और रामलीला का आयोजन भी किया जाता है, जो नौ दिन तक लगातार होता है।
शारदीय नवरात्रि 2023 में कब है?
शारदीय नवरात्रि 2023 में 15 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जिसकी तिथि है आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से. प्रतिपदा तिथि के दिन ही घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है और इस दिन से ही नौ दिनो तक अखण्ड ज्योति जलाई जाती है।
इस साल शारदीय नवरात्रि रविवार 15 अक्टूबर 2023 से शुरू हो रही है तथा मंगलवार 23 अक्टूबर 2023 को नवरात्रि समाप्त होगी. वहीँ 24 अक्टूबर को विजयदशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाएगा।
आश्विन माह प्रतिपदा शुभ मुहूर्त
आश्विन माह प्रतिप्रदा 14 अक्टूबर 2023 की रात्रि 11 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी और ये 15 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक होगी. इसलिए उदया तिथि के अनुसार शारदीय नवरात्रि और व्रत की शुरूआत 15 अक्टूबर से होगी।
घटस्थापना या कलश स्थापना मुहूर्त

हिन्दू पंचाग के अनुसार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 15 अक्टूर को 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक है. ऐसे में कलश स्थापना के लिए यह शुभ मुहूर्त 48 मिनट की रहेगा।
शारदीय नवरात्रि 2023 दुर्गा अष्टमी और महानवमी कब है?
शारदीय नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी 22 अक्टूबर तथा महानवमी 23 अक्टूबर को पड़ेगी. साथ ही, 24 अक्टूबर को विजयदशमी या दशहरा का पर्व भी मनाया जायेगा।
नवरात्रि के 9 दिन पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के पहले दिन ही 9 दिन के व्रत का संकल्प लें. इसके लिए सीधे हाथ में जल लेकर चावल, फूल, सुपारी और सिक्का रखें. किसी ब्राहमण पंडित को बुलाएं और पूरे विधि-विधान से पूजा करवाएं. मंत्रोच्चारण के साथ ही अपनी कामना की पूर्ति के लिये मन में संकल्प लें और माता जी के चरणो में जो हाथ में जल लिया था अर्पित करें तथा माँ से आर्शीवाद लें।
शारदीय नवरात्रि पूजा सामग्री
- जौ बोने के लिए मिट्टी का एक पात्र
- लौंग
- इलाइची
- कपूर
- रोली
- गाय का गोबर
- मिट्टी
- रेत
- चावल
- अशोक या आम के पंच पल्लव
- सुपारी
- नारियल
- कलावा
- चुनरी
- सिन्दूर
- चंदन
- हल्दी
- गंगाजल
- फल
- फूल
- फूलो की माला
- दीया
- घी
- माता के लिए श्रृंगार पिटारी
- दूर्वा
- सिक्का
- कलश को ढकने के लिए पात्र
कैसी हो माँ की चुनरी?

माँ दुर्गा को लाल रंग खास पसन्द है इसलिए लाल रंग का ही आसन लें.
किस धातु का हो कलश?

कलश स्थापना के लिए कलश आप चाहे मिट्टी का लें या फूल का भी ले सकते हैं.
कलश स्थापना विधि
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घंटस्थापना के साथ ही माँ आदिशाक्ति को समर्पित यह पावन त्यौहार शुरू हो जाता है. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. आइये जानें कलश स्थापना के नियम और कलश स्थापना विधि कलश स्थापना कैसे करें।
Step 1: नवरात्रि के पहले दिन यानि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर लें. उसके बाद मन्दिर की साफ-सफाई करने के बाद, सबसे पहले गणेश जी का नाम लें.
Step 2: कलश स्थापना मन्दिर के उत्तर पूर्व दिशा में करनी चाहिए. सबसे पहले जिस जगह कलश रखना हो उस जगह को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें।
Step 3: फिर लकड़ी की चौकीपर लाल कपड़े का आसन बिछायें. उसके ऊपर स्वास्तिक बनाकर चैकी स्थापित करें। उसके बाद कलश में जल व गंगाजल भरकर उसे भी स्थापित करें।
Step 4: उसके बाद कलश पर पत्र पल्लव या अशोक की पत्तिया रखें.
Step 5: उसके बाद कलश में एक सुपारी एक सिक्का, दूर्वा, हल्दी, दूध दही, शहद, डालें. साथ ही लौग-इलाइची भी डालें.
Step 6: कलश स्थापित करते समय उसके नीचे थोड़ा सा गाय का गोबर रखें।
Step 7: फिर कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र में लपेट कर रखें. साथ ही नारियल पर कलावा भी लपेटें।
Step 8: फिर चावल से अष्टदल बनाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा रखें।
Step 9: माता को लाल चुनरी ओढ़ाएं.
Step 10: साथ ही कलश स्थापना के साथ अखण्ड दीपक की भी स्थापना की जाती है, जो पूरे नौ दिन जलता रहता है।
Step 11: कलश स्थापना एव अखण्ड ज्योति की स्थापना के साथ ही माँ शैलपुत्री की पूजा और ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें और फूल और चावल माँ के चरणो में अर्पित करें।
Step 12: माँ शैल पुत्री की पूजा विधि-विधान से सम्पन्न करें।
Step 13: माँ के लिए जो भोग बनाये वो देशी घी से बने होने चाहिए.
विशेष मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः
मंगल कामना के साथ इस मंत्र का जाप करें और माँ की आरती करें.
दुर्गा मंत्र

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
कलश स्थापना कब नहीं करनी चाहिए?
ऐसा माना जाता है कि रात के समय और अमावस्या के दिन कलश स्थापित करने की मनाही है. अगर किसी कारणवश आप ठीक समय पर कलश स्थापित न करे पावे, तो अभिजीत मुहूर्त में या सुबह के समय कलश स्थापित करें।
शारदीय नवरात्र की महत्वपूर्ण तिथियाँ
| शारदीय नवरात्रि पहला दिन
15 अक्टूबर 2023 |
शैलपुत्री की पूजा
|
| शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन
16 अक्टूबर 2023 |
ब्रह्मचारिणी की पूजा
|
| शारदीय नवरात्रि तीसरा दिन
17 अक्टूबर 2023 |
चंद्रघंटा की पूजा |
| शारदीय नवरात्रि चौथा दिन
18 अक्टूबर 2023 |
कूष्माण्डा की पूजा
|
| शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन
19 अक्टूबर 2023 |
स्कंदमाता की पूजा
|
| शारदीय नवरात्रि छठा दिन
20 अक्टूबर 2023 |
कात्यायनी की पूजा |
| शारदीय नवरात्रि सातवां दिन
21 अक्टूबर 2023 |
कालरात्रि की पूजा |
| शारदीय नवरात्रि आठवा दिन
22 अक्टूबर 2023 |
महागौरी की पूजा
|
| शारदीय नवरात्रि नौवा दिन
23 अक्टूबर 2023 |
महागौरी की पूजा |
| शारदीय नवरात्रि दसवां दिन
24 अक्टूबर 2023 |
विजय दशमी या दशहरा का पर्व |





