उत्तराखंड में दूसरा घर खरीदने के क्या हैं फायदे और नुकसान


उत्तराखंड की पहाड़ियों में किराये की अच्छी इनकम हासिल करने के लिए सभी सेगमेंट्स में सेकंड होम प्रॉपर्टीज अॉफर की जा रही हैं। आइए आपको बताते हैं कि राज्य में खरीददारों को निवेश करते वक्त क्या ध्यान में रखना चाहिए।
दूसरा घर खरीदने की चाहत रखने वाले खरीददार अब हिल स्टेशंस में निवेश कर रहे हैं, जहां शानदार लोकेशन, हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री और होम स्टे जैसे कॉन्सेप्ट में बूम देखने को मिल रहा है। एेसा ही एक राज्य है उत्तराखंड, जिसके देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे शहरों में निवेशक और खरीददार निवेश करना चाहते हैं। अन्य शहर हैं नैनीताल, रुद्रपुर और चमोली। इन इलाकों में भी घर खरीददार दूसरा घर बनाने के ख्वाब देख रहे हैं।
फायदेनुकसान
राज्य के नियामक सभी खरीद को मानते हैं।खास इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं।
प्रस्तावित खरीददारों के लिए विभिन्न विकल्पअंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टीज की कम डिमांड
प्रॉपर्टी रेट्स में स्थिर अभिमूल्यन
फ्री होल्ड संपत्तियां भी उपलब्ध
लीजहोल्ड मॉडल हो रहा पॉपुलर

लेकिन उत्तराखंड में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले मार्केट को गहराई से समझना बेहद जरूरी है। खरीदने से पहले इन बातों को ध्यान में जरूर रखें।

उत्तराखंड में सेकंड होम लेने के फायदे:

1.ग्राहकों के हक में राज्य नियामक:

दूसरे राज्यों के लोग भी उत्तराखंड में निवेश कर सकते हैं। दूसरे राज्यों के लोगों पर खरीददारी प्रतिबंध को उत्तराखंड सरकार ने हटा लिया गया है। अगर कोई शहर की म्युनिसिपल सीमाओं के तहत प्रॉपर्टी या प्लॉट खरीद रहा है तो उसमें भी कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि नियमों के मुताबिक एक शख्स शहर के बाहर केवल 250 स्क्वेयर मीटर कृषि भूमि खरीद सकता है। इसका मतलब है कि एक ही परिवार के दो से तीन लोग संयुक्त या अलग-अलग 250 स्क्वेयर मीटर का भूखंड खरीद सकते हैं। लेकिन अगर कृषि भूमि शहर की सीमाओं के अंदर है तो राज्य के लैंड सीलिंग एक्ट का पालन करना होगा।

2. प्रस्तावित ग्राहकों के लिए विभिन्न विकल्प:

प्रॉपर्टी हर श्रेणी जैसे विला, अपार्टमेंट, प्लॉट और कृषि भूमि में उपलब्ध है। राजधानी देहरादून के कई महंगे इलाकों और पर्यटन क्षेत्र मसूरी में 2 बेडरूम अपार्टमेंट्स 6000-6500 प्रति स्क्वेयर फुट, प्लॉट्स 30 हजार से 35 हजार प्रति स्क्वेयर फुट की दर पर उपलब्ध हैं। विला या प्लॉट 50 लाख से लेकर 10-12 करोड़ तक उपलब्ध हैं। मसूरी के रियल एस्टेट ब्रोकर प्रणव साहनी ने कहा, पूरे क्षेत्र को सभी तरह के ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए रिहायशी कम वेकेशन डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किया जा रहा है। नई उम्र के ग्राहक जो अपनी हाई इनकम से नया घर खरीद सकते हैं, वे इस क्षेत्र की ओर आकर्षक हो रहे हैं।

3. प्रॉपर्टी रेट्स में बढ़ोतरी:

सिर्फ जमीन को छोड़कर विकासशील और स्थापित इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। सहस्त्रधारा रोड पर निवेश करने वाले दिल्ली के केके गौर कहते हैं, ”पिछले दो से तीन वर्षों में मैंने प्रॉपर्टी में तीन गुना बढ़ोतरी देखी है”। इलाके के ब्रोकर्स के मुताबिक पिछले दो वर्षों में हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म इंडस्ट्री में बढ़ोतरी के कारण मसूरी में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है।

4. फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टीज:

साहनी के मुताबिक राज्य में बिकने वाले सभी प्लॉट्स को फ्रीहोल्ड संपत्ति के तौर पर बेचा जाता है, जिससे म्यूटेशन एवं प्रॉपर्टी का ट्रांसफर पेपरवर्क से जरिेए आसान है। नए खरीददारों के लिए इस वजह से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रेशन आसान हो जाता है।

5. लीजहोल्ड मॉडल हो रहा पॉपुलर:

मार्केट में कई हॉस्पिटैलिटी कंपनियां आ रही हैं, जिसके कारण कमरों के किरायों में भी इजाफा हो रहा है। लिहाजा दूसरा घर खरीदने वाले ग्राहक और निवेशक इन जगहों को किराये की इनकम के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। एक ब्रोकर गोविंद नेगी ने कहा, होमस्टे जैसा कॉन्सेप्ट अब मसूरी ही नहीं अन्य शहरों में भी पॉपुलर हो रहा है।

उत्तरांचल में प्रॉपर्टी खरीदने के नुकसान

1. अहम क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की ऊंची कीमत:

-उत्तराखंड की पहाड़ियों में जितनी अहम संपत्तियां हैं, वे काफी महंगी हैं। इतना ही नहीं निर्माणाधीन और रेडी टू मूव इन अपार्टमेंट्स में काफी फर्क है। विभिन्न इलाकों की कीमतों में भी फर्क है। आमतौर पर मसूरी में एक रात होम स्टे में गुजारने का किराया 3000 रुपये है, जबकि अन्य दूरस्थ जगहों पर यह 1000 रुपये प्रति रात में उपलब्ध है।

2. इतनी ज्यादा प्रॉपर्टीज भी नहीं:

उत्तराखंड में रेडी टू मूव इन और पुरानी संपत्तियों की काफी डिमांड है। लेकिन पुराने के मुकाबले नई निर्माणाधीन संपत्तियों की बिक्री काफी कम है।

खरीददारों को क्या करना चाहिए:

धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अपकमिंग प्रोजेक्ट्स का लालच देकर खरीददारों का पैसा ठग लिया जाता है। बेइमानी करने वाली कई कंपनियों पर प्रवर्तन निेदेशालय ने शिकंजा कसा है। लिहाजा ग्राहकों को निर्माणाधीन संपत्तियों में निवेश से पहले काफी सतर्क रहना चाहिए। इसलिेए पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स या रीसेल संपत्तियों में ही निवेश करना समझदारी है। निवेश तभी करें जब आप उस जगह नियमित रूप से जाते रहते हों या उस क्षेत्र में आपका बिजनेस हो। उत्तराखंड में एेसी संपत्ति जो अच्छा किराया दे सके, में निवेश करना समझदारी है।

उत्तराखंड में निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

– उत्तराखंड में, नाली में भूमि को मापा जाता है. एक नाली 2,160 वर्ग फुट के बराबर है.

-एक निवेशक एक पैन कार्ड पर केवल 1.25 नाली (2,700 वर्ग फुट) आवासीय भूमि खरीद सकता है.

-उत्तराखंड में बहुत सी जमीनें, जो बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, आधिकारिक तौर पर नहीं मापी गई हैं. इसलिए निवेशकों को घोटालेबाजों से सावधान रहना चाहिए. आपको सरकारी अधिकारी की उपस्थिति में भूखंड को मापना चाहिए ताकि सुनिश्चित करें कि भूमि के माप के दौरान पड़ोसी भूखंड के मालिक भी साइट पर मौजूद रहें.

-जिन प्लॉट्स में से हिमालयन व्यू दिखता है, उनकी कीमतें ज्यादा होती हैं और उन्हें खास तवज्जो भी दी जाती है, अगर आप कॉटेज या हॉलिडे होम प्लान कर रहे हैं तो.

– उत्तराखंड में पानी की भारी किल्लत है. चूंकि एक घर के निर्माण में बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है, इसलिए आपको यह जांचने की जरूरत है कि क्या क्षेत्र में सरकारी पानी का कनेक्शन उपलब्ध है. स्थानीय लोग आमतौर पर प्राकृतिक जल संसाधनों पर निर्भर होते हैं, जो मौसमी होते हैं. विभिन्न स्थानों पर, राज्य सरकार ने बोरवेल पर प्रतिबंध लगा दिया है. राज्य में कई ऐसे स्थान हैं जहां अभी भी नियमित रूप से स्थानीय पानी की सप्लाई नहीं होती है. जमीन खरीदने से पहले इसे जांच लें.

पूछे जाने वाले सवाल

क्या उत्तराखंड में RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स हैं?

जी हां. उत्तराखंड में RERA द्वारा मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स हैं. लेकिन निवेश करने से पहले प्रोजेक्ट डेवेलपर या एजेंट की डिटेल्स पोर्टल पर चेक करना ना भूलें.

अगर मैं पहाड़ों में दूसरे घर के तौर पर निवेश करना चाहता हूं तो मुझे क्या चेक करना चाहिए?

राज्य के नियामकों को लेकर बहुत स्पष्ट रहें. क्षेत्र में प्रॉपर्टी की कीमतों के बारे में पता लगाएं. जिन डेवेलपर्स की हिस्ट्री अच्छी है, उन्हीं के साथ डील करें.

उत्तराखंड में RERA का ऑफिस कहां है?

राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स तहसील के पास, डिस्पेंसरी रोड, देहरादून - उत्तराखंड, 248001 फोन नंबर: 0135 - 2719500 ईमेल आईडी: uhudauk@gmail.com, info@uhuda.org.in

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