वासु श्रीवास्तव ईस्ट उत्तर प्रदेश के लॉ स्टूडेंट हैं, जो हाल ही में हायर स्टडीज के लिए दिल्ली के द्वारका इलाके के दो-बेडरूम अपार्टमेंट में शिफ्ट हुए हैं। वह यहां अपने कॉलेज के एक दोस्त के साथ रहते हैं। दो महीने बाद उन्हें अपार्टमेंट के प्लम्बिंग और इलेक्ट्रिकल वायरिंग को लेकर परेशानी महसूस होने लगी।
जब श्रीवास्तव ने यह बात मकानमालिक को बताई तो उसने सीधे-सीधे कोई भी मदद करने से इनकार करते हुए उनसे प्लम्बिंग और वायरिंग रिपेयर कराने को कहा। श्रीवास्तव ने समझौते में लिखे क्लॉज ठीक से नहीं पढ़े थे।
रेंट अग्रीमेंट बनाते वक्त क्या करें क्या न करें:
रेंट अग्रीमेंट किरायेदार और मकानमालिक के बीच होने वाला एक समझौता है, जिसका उपयोग और दुरुपयोग किया जा सकता है। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों को देखने वाले दिल्ली के एक वकील श्याम सुंदर कहते हैं, ”रेंट अग्रीमेंट किरायेदार और मकानमालिक के बीच अच्छे रिश्ते बनाता है। लेकिन इसे सभी जरूरी प्रावधानों और कानूनों से बनाया जाना चाहिए”।
भारत में रेंट अग्रीमेंट्स नोटराइज्ड स्टैंप पेपर पर बनाए जाते हैं। हालांकि यह कानूनी दस्तावेज होता है, लेकिन किसी भी पक्ष द्वारा इसका उल्लंघन करने की संभावना रहती है। इसलिए लीज अग्रीमेंट स्थानीय सब-रजिस्ट्रार अॉफिस में पंजीकृत कराया जाना चाहिए। रजिस्ट्रेशन न होने पर कोई भी पक्ष इसका दुरुपयोग कर सकता है। इसके अलावा रेंट अग्रीमेंट में अच्छे क्लॉज और प्रावधान होने चाहिए ताकि दोनों पार्टियों के हितों की रक्षा हो सके।
किरायेदारों के लिए जरूरी क्लॉज:
आपके रहने की अवधि, फ्रिक्वेंसी व भुगतान करने की तारीख, लीज रिन्यू करने का वक्त और रिपेयर व मेंटेनेंस से जुड़े प्रावधान अग्रीमेंट में साफ तौर पर लिखे होने चाहिए। इसके साथ ही किरायेदार और मकानमालिक के कर्तव्य भी परिभाषित होने चाहिए। दिल्ली के वकील एकांक मेहरा ने कहा, ”रिपेयर और मेंटेनेंस के बाद ही प्रॉपर्टी किराये पर लें। फ्लैट में आने से पहले सभी वायरिंग और प्लम्बिंग को चेक कर लें। इससे किरायेदार खुद को भविष्य में होने वाली तकलीफों से बचा सकता है”।
इसके अलावा सोसाइटी के इलेक्ट्रिसिटी और डिवेलपमेंट चार्जेज का बकाया भी मालूम कर लेना चाहिए। उदाहरण के तौर पर टीनू शर्मा एक एग्जीक्युटिव हैं जो गुड़गांव में काम करते हैं। वह किराये के एक घर में रहते हैं और उन्हें सोसाइटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की ओर से दो साल का डिवेलपमेंट चार्जेज नहीं चुकाने का एक नोटिस मिलता है। आमतौर पर डिवेलपमेंट चार्जेज किरायेदारों को चुकाना पड़ता है। शर्मा ने मौजूदा और बकाया राशि चुकाने के बाद किराये से राशि काट ली। रेंट अग्रीमेंट में यह भी लिखा होना चाहिए कि कितनी राशि बतौर बुकिंग अमाउंट (सिक्योरिटी डिपॉजिट) एडवांस में जमा करानी है। मध्यस्थता खंड का जिक्र भी उतना ही जरूरी है। अगर आपका मकानमालिक फर्निशड फ्लैट दे रहा है तो घर के सामानों की लिस्ट बनाना आपका काम है। वह इसलिए कि जब आप मकान खाली करें तो किसी भी तरह के रिपेयरिंग या नुकसान की भरपाई हो सके।
मकानमालिकों के लिए अहम क्लॉज:
एक मकानमालिक की सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि किरायेदार उस पर अवैध तरीके से कब्जा न कर ले। इस वजह से रेंट अग्रीमेंट को पंजीकृत कराया जाना चाहिए। दो गवाहों की मौजूदगी में अग्रीमेंट साइन कराया जाना चाहिए। मेट्रो शहरों में लचर कानून-व्यवस्था के कारण पुलिस किरायेदारों का वेरिफिकेशन कराने को कहती है। मकानमालिक किरायेदार की कंपनी से उसका एम्प्लॉयमेंट लेटर भी मांग सकता है। लेकिन इसका मतलब किसी के चरित्र पर सवाल उठाना नहीं है। अगर किराएदार विदेशी नागरिक है या किसी दूसरे शहर का रहने वाला है तो मकानमालिक को उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराना चाहिए।
मकानमालिक और किरायेदार कैसे बनवाएं रेंट अग्रीमेंट:
आमतौर पर जो वकील रेंट अग्रीमेंट बनाते हैं, उनके पास टेम्पलेट तैयार होता है। लेकिन मकानमालिक और किरायेदार आपसी सहमति से उसमें बदलाव करवा सकते हैं। मनमुताबिक टेम्पलेट के लिए आप प्रस्तावित किरायेदारी अधिनियम 2015 का इस्तेमाल कर सकते हैं।





