अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और मकान किराया भत्ता (एचआरए) आपकी सैलरी पैकेज का एक हिस्सा है, तो आपको खर्चे के सबूत के तौर पर रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) जमा करनी होगी जिसके बाद आप भारत में आयकर (आईटी) कानून के तहत किरायेदारों को टैक्स में मिलने वाली छूट का दावा कर पाएँगे। इस लेख में रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) के अलग-अलग घटकों पर विस्तार से चर्चा की गई है, जिसे हाउस रेंट रिसिप्ट (मकान किराया रसीद) भी कहते हैं। हम रेंट रिसिप्ट का पीडीएफ या हाउस रेंट रिसिप्ट का पीडीएफ तैयार करने के तरीके पर भी चर्चा करेंगे।
रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) क्या है?
आप अपने मकान मालिक को हर महीने जो किराया देते हैं, उसके सबूत को रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) कहा जाता है। आपको हर महीने किराया देने के बाद अपने मकान मालिक से रेंट रिसिप्ट मांगना होगा, जो बेहद जरूरी है।
यह भी देखें: लीज बनाम रेंट से जुड़ी सारी बातें जानिए
रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद): आपके लिए क्यों जरूरी है?
आमतौर पर वेतन पाने वाले कर्मचारियों के सैलरी पैकेज में हाउस रेंट अलाउंस शामिल होता है, और इसमें मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए आपको अपनी कंपनी में किराए के भुगतान का सबूत जमा करना होगा। यहीं पर रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) की अहमियत सामने आती है। रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) इस बात का दस्तावेजी सबूत हैं कि आपने किराये के मकान में रहने के लिए अपने वेतन से एक निश्चित राशि खर्च की है। फिर आपके रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) को ध्यान में रखते हुए इस बात का हिसाब लगाया जाएगा कि आपको कितना टैक्स चुकाना है। आपका टीडीएस भी इस तरह से एडजस्ट किया जाएगा कि आपको एचआरए पर टैक्स नहीं देना होगा।
यह भी देखें: रेंटल इनकम पर टैक्स के बारे में पूरी जानकारी
रेंट रिसिप्ट और एचआरए कैलकुलेशन
अगर आपके सैलरी पैकेज में एचआरए भी शामिल है, तो आपको नौकरी देने वाली कंपनी हर वित्तीय वर्ष में आपसे रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) मांगेगी, ताकि इस बात का हिसाब लगाया सके कि आपको कितना टैक्स चुकाना है, और आपकी ओर से टैक्स में कटौती का दावा किया जा सके। आपको नौकरी देने वाली कंपनी हर वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले आपको रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) जमा करने के लिए कहेगी। भले ही आप अपने मकान के किराए का भुगतान क्रेडिट कार्ड या किसी दूसरे ऑनलाइन मनी ट्रांसफर चैनल के जरिए कर रहे हों, एचआरए में मिलने वाली छूट का दावा करने के लिए आपको अपने मकान मालिक से रेंट रिसिप्ट लेना ही पड़ेगा और इसे आपको अपनी कंपनी में जमा करना होगा।
अगर किरायेदार हर महीने 3,000 रुपये से अधिक किराया देता है, तो उसे एचआरए में मिलने वाली छूट का दावा करने के लिए अपनी कंपनी में रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) जमा करना ही होगा। अगर महीने का किराया इससे कम है, तो उस मामले में रेंट रिसिप्ट जमा करने की जरूरत नहीं है। यहाँ इस बात का ज़िक्र करना भी जरूरी है कि एचआरए में मिलने वाली छूट का दावा करने के लिए आपको रेंट एग्रीमेंट जमा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कर कानून में इसके बारे में विशेष रूप से कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, अगर मकान मालिक और किरायेदार के बीच रेंट एग्रीमेंट नहीं हुआ है और उस पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं, तो उस स्थिति में किरायेदारी मान्य नहीं होगी।
यह भी देखें: रेंट एग्रीमेंट के बारे में आपके लिए जानने योग्य सारी बातें
एचआरए क्या है?हर साल कर्मचारियों को मकान के लिए किराए के भुगतान पर टैक्स में मिलने वाली छूट को एचआरए कहते हैं। एचआरए क्लेम के लिए, आपकी सैलरी के घटक में सिर्फ मूल वेतन और महंगाई भत्ता (डीए) ही शामिल होगा। एचआरए क्लेम की सीमा क्या हैआयकर (आईटी) अधिनियम, 1962 के नियम 2A के तहत, कर्मचारी को नौकरी देने वाली कंपनी से प्राप्त न्यूनतम एचआरए, या महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन का 50% (दूसरी जगहों पर 40%) या वास्तविक किराए के भुगतान में मूल वेतन का 10% घटाने के बाद शेष राशि का एचआरए के रूप में दावा किया जा सकता है। एचआरए कैलकुलेशन का उदाहरणमान लीजिए कि आपका मूल वेतन प्रति माह 30,000 रुपये है और आप मुंबई में हर महीने 10,000 रुपये का किराया देते हैं। आपको नौकरी देने वाली कंपनी आपको हर महीने 15,000 रुपये का एचआरए देती है। तो आपका टैक्स बेनिफिट इस प्रकार होगा: * एचआरए = 15,000 रुपये * वास्तविक किराए के भुगतान में मूल वेतन का 10% घटाने के बाद शेष राशि = 10,000 – 3,000 रुपये = 7,000 रुपये * मूल वेतन का 50% = 15,000 रुपये इस प्रकार, एचआरए 7,000 रुपये होगा और शेष 8,000 रुपये पर टैक्स देना होगा। यह भी देखें: एचआरए कैलकुलेशन और एचआरए में छूट से जुड़ी सारी जानकारी। यह भी पढ़ें कि अगर एचआरए आपकी सैलरी का हिस्सा नहीं है तो 80GG के तहत टैक्स में छूट का दावा कैसे करें। |
यह भी देखें:कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी पर इनकम टैक्स के बारे में पूरी जानकारी
एचआरए का दावा कौन कर सकता है?
अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और एचआरए आपकी सैलरी में शामिल है, तो आप टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं। अगर सैलरी पाने वाले कर्मचारियों किराए के मकान में रह रहे हैं, तो वे आईटी अधिनियम की धारा 10 (13A) के तहत टैक्स बचाने के लिए एचआरए में छूट का फायदा उठा सकते हैं। खुद का रोजगार करने वाले लोगों को आईटी अधिनियम की धारा 80GG के तहत एचआरए में छूट का फायदा दिया जाए है।
यह भी देखें: मकान के किराये पर इनकम टैक्स में छूट
एक वैध रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) के मुख्य घटक
रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) में निम्नलिखित जानकारी होनी चाहिए, तभी इसे वैध माना जाएगा:
- किरायेदार का नाम
- मकान मालिक का नाम
- मकान का पता
- किराये की रकम
- किराये की अवधि
- किराये के भुगतान का माध्यम (नकद, चेक, ऑनलाइन भुगतान)
- मकान मालिक के हस्ताक्षर
- किरायेदार के हस्ताक्षर
- रेवेन्यू स्टाम्प, अगर प्रति रसीद 5,000 रुपये से अधिक का नकद भुगतान किया गया हो।
- अगर आप सालाना 1 लाख रुपये या हर महीने 8,300 रुपये से अधिक किराये का भुगतान करते हैं, तो उस स्थिति में मकान मालिक के पैन-कार्ड का विवरण।
रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) की अवधि
आपको नौकरी देने वाली कंपनी द्वारा आपसे तीन महीने के बैच में किराये की रसीद जमा करने के लिए कहा जाएगा।
किराये की रसीद का फॉर्मेट (प्रारूप)
किराये की रसीद का बेसिक टेम्प्लेट नीचे दिया गया है।

किराये की रसीद ऑनलाइन तैयार करने के साधन
आज हाउसिंग एज़ प्लेटफॉर्म जैसे कई वर्चुअल सर्विस प्रोवाइडर मौजूद हैं जो बिना किसी शुल्क के आपको रेंट रिसिप्ट ऑनलाइन तैयार करने में मदद करते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ ऐसे पोर्टल पर जाकर आवश्यक जानकारी दर्ज करनी पड़ती है, जिसके बाद आप ऑनलाइन रेंट रिसिप्ट निःशुल्क तैयार कर सकते हैं। अगले हिस्से में हम आपको ऑनलाइन रेंट रिसिप्ट तैयार करने के प्रत्येक चरण के बारे में बताएँगे।
निःशुल्क ऑनलाइन रेंट रिसिप्ट तैयार करने के चरण
अलग-अलग प्लेटफार्मों पर उपलब्ध ऑनलाइन रेंट रिसिप्ट जनरेटर की मदद से, किरायेदार मुफ़्त में ऑनलाइन रेंट रिसिप्ट तैयार कर सकते हैं जिसके लिए नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करें:
चरण 1: अपनी इच्छा से किसी भी प्लेटफॉर्म पर जाएँ। रेंट रिसिप्ट जनरेटर टैब पर क्लिक करें। पहले पेज पर आपको किरायेदार का नाम और किराये की रकम दर्ज करने के लिए कहा जाएगा। आगे बढ़ने के लिए ‘कन्टिन्यू’ बटन दबाएँ।
चरण 2: इसके बाद मकान मालिक का नाम, किराये पर ली गई प्रॉपर्टी का पूरा पता और मकान मालिक के पैन-कार्ड की जानकारी (वैकल्पिक) दर्ज करें। आगे बढ़ने के लिए ‘कन्टिन्यू’ बटन दबाएँ।
चरण 3: इसके बाद वह समय-सीमा दर्ज करें, जिसके लिए रसीदें तैयार की जानी हैं। आगे बढ़ने के लिए ‘कन्टिन्यू’ बटन दबाएँ।
रेंट रिसिप्ट का पीडीएफ
चरण 4: अगले पेज पर आपको रेंट रिसिप्ट का प्रीव्यू दिखाया जाएगा। जब आप आश्वस्त हो जाएँ कि प्रीव्यू में दिखाई गई सभी जानकारी बिल्कुल सही है, तब आप अंतिम स्क्रीन पर रेंट रिसिप्ट की कॉपी प्राप्त करने के लिए ‘प्रिंट’ बटन दबा सकते हैं। आप अपने डिवाइस पर रेंट रिसिप्ट का पीडीएफ डाउनलोड भी कर सकते हैं।
हाउस रेंट रिसिप्ट और एचआरए बेनिफिट्स: गौर करने योग्य महत्वपूर्ण बातें
मालिकाना हक: आप जिस मकान के लिए किराये का भुगतान कर रहे हैं और एचआरए का दावा कर रहे हैं, आपको उस मकान का मालिक, चाहे अकेले या किसी के साथ, नहीं होना चाहिए। इसी वजह से अपने माता-पिता के घरों में रहने वाले लोगों को एचआरए बेनिफिट्स का दावा करने की अनुमति दी जाती है, जब तक वे अपने माता-पिता को किराये का भुगतान करते हैं और वह उनके वेतन से होने वाले खर्च में दिखाई देता है।
सम्मिलित अवधि: आप किस सीमा तक छूट का दावा कर सकते हैं, उसका हिसाब लगाने के लिए आपने जिस अवधि में किराए का भुगतान किया है आपके उसी अवधि के वेतन पर विचार किया जाएगा। अगर उस अवधि के दौरान भुगतान किया गया वेतन के 10% से अधिक नहीं है, तो एचआरए टैक्स बेनिफिट्स का दावा बिल्कुल नहीं किया जा सकता है।
रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) की अवधि: हर महीने किराये की रसीद जमा करना अनिवार्य नहीं है। आप तीन महीने में, छह महीने में या सालाना किराये की रसीद जमा कर सकते हैं। हालांकि, जिन महीनों के लिए आप एचआरए का दावा कर रहे हैं, उन सभी महीनों की रसीदें आपको अपनी कंपनी के पास जमा करनी होंगी।
किराये के भुगतान का तरीका: आप नकद पैसों के भुगतान सहित किसी भी तरीके से किराये का भुगतान कर सकते हैं, क्योंकि अभी तक किराये के भुगतान के बारे में कोई विशेष निर्देश नहीं दिया गया है। आपको केवल अपने मकान मालिक से रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) लेकर उसे अपनी कंपनी में सॉफ्ट कॉपी के रूप में अथवा दस्तावेज़ के रूप में जमा करना है, जो आपकी कंपनी द्वारा पालन की जाने वाली नीति पर निर्भर है।
यह भी देखें: क्या मैं किसी दूसरे शहर के लिए एचआरए का दावा कर सकता हूँ?
रेवेन्यू स्टाम्प के साथ रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद)
रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) पर रेवेन्यू स्टाम्प लगाना: अगर किरायेदार ने प्रति रसीद 5,000 रुपये से अधिक का भुगतान किया है, तो उसे किराये की हर रसीद पर रेवेन्यू स्टाम्प लगाना होगा। अगर भुगतान चेक के जरिए किया गया हो, तो उस स्थिति में इसकी जरूरत नहीं पड़ती है।
मकान मालिक के पैन-कार्ड का विवरण: मकान मालिक के पैन-कार्ड के विवरण अलावा, आपको अपना रिटर्न दाखिल करते समय अपने मकान मालिक के पैन कार्ड की एक कॉपी जमा करने की जरूरत भी पड़ सकती है। जब मकान का सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक हो और हर महीने का किराया 8,300 रुपये से अधिक हो, तो उस स्थिति में यह अनिवार्य हो जाता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आप एचआरए का दावा नहीं कर पाएंगे और फिर उसी के अनुरूप आपका टैक्स काटा जाएगा।
किसी के साथ मिलकर रहना: अगर आप एक मकान में किसी दूसरे किरायेदार के साथ रह रहे हैं, जो किराये के खर्च का भुगतान कर रहा हो, तो आपको पूरी राशि के लिए नहीं बल्कि सिर्फ अपने हिस्से के किराये की रकम तक ही एचआरए में छूट का फायदा मिलेगा।
सॉफ्ट कॉपी या हार्ड कॉपी: हालांकि नौकरी देने वाली कुछ कंपनियां रेंट रिसिप्ट की सॉफ्ट कॉपी भी स्वीकार करती हैं, लेकिन कुछ कंपनियां असली रेंट रिसिप्ट जमा कराने पर जोर दे सकती हैं।
गलत जानकारी: रेंट रिसिप्ट में किसी भी तरह की गलत जानकारी देने पर इसे अमान्य माना जाएगा।
डायरेक्ट एचआरए क्लेम: अगर आपको नौकरी देने वाली कंपनी आपकी ओर से एचआरए में छूट का दावा नहीं करती है, तो उस स्थिति में आईटी रिटर्न दाखिल करते समय आप सीधे आईटी विभाग से एचआरए में छूट का दावा कर सकते हैं।
यह भी देखें: ड्राफ्ट मॉडल टेनेंसी एक्ट 2019 में आपके लिए जानने योग्य सारी बातें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
एचआरए का दावा करने के लिए मुझे कौन से सबूत देने होंगे?
एचआरए का दावा करने के लिए रेंट रिसिप्ट (किराया रसीद) सबूत की तरह काम करता है, जिसमें किरायेदार/मकान मालिक की जानकारी, प्रॉपर्टी का पता, किराये की रकम, भुगतान के लिए निर्धारित तिथि, दोनों पक्षों के हस्ताक्षर तथा लेनदेन के माध्यम सहित अन्य विवरण शामिल होते हैं।
क्या मुझे अपनी कंपनी से एचआरए का दावा करने के लिए हर महीने किराये की रसीद देनी होगी?
आप तीन महीने में, छह महीने में या सालाना किराये की रसीद जमा कर सकते हैं।
अगर मेरे मकान मालिक के पास पैन-कार्ड नहीं हो, तो क्या होगा?
अगर आपके मकान मालिक के पास पैन-कार्ड नहीं है और वह हर साल किराये के रूप में 1 लाख रुपये से अधिक रकम प्राप्त करता है, तो उसे पूरी तरह भरे हुए फॉर्म 60 के साथ एक लिखित घोषणा प्रस्तुत करनी होगी। फिर किरायेदार एचआरए में छूट का दावा करने के लिए इन दस्तावेजों को अपनी कंपनी के पास जमा कर सकता है।





