निर्माणाधीन संपत्तियों पर कम जीएसटी दरें: जानिए क्या है सच्चाई और प्रचार में फर्क


निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए जीएसटी दरों में कमी से आम आदमी को राहत जरूर मिलेगी. आज हम बता रहे हैं कि घरों की आखिरी कीमतों पर दरों में कटौती का क्या असर पड़ेगा.
24 फरवरी 2019 को हुई जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में निर्माणाधीन संपत्तियों पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को 12 प्रतिशत (इनपुट टैक्स क्रेडिट) से घटाकर गैर किफायती आवास पर 5 प्रतिशत कर दिया गया. जबकि किफायती आवास पर इसे 8 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया.
फिर भी घर खरीददार इस बात से संतुष्ट नहीं हैं कि यह घरों को और किफायती बनाएगा या नहीं. मुंबई के एक घर खरीददार अश्विनी मोरे ने कहा, जीएसटी दरों में गिरावट असल में कोई कटौती नहीं है और यह दिखाता है कि औसत घर खरीददारों पर कोई फोकस नहीं है. मोरे कहते हैं, ”मिडिल क्लास खरीददार के सामने चुनौती हैसियत की होती है. लगता है कि सरकार, बिल्डर्स और मीडिया यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि जीएसटी की दरें घटने से सबके लिए घर खरीदना आसान हो गया है. लेकिन मार्केट की हकीकत कुछ और ही है.”
*सर्विस टैक्स (प्रोजेक्ट की लागत का 25 प्रतिशत) की जगह आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी को लागू किया गया था. यह मौजूदा सर्विस टैक्स से काफी ज्यादा था.
*कुछ मामलों में आईटीसी के फायदे ग्राहकों को नहीं दिए गए.
*आईटीसी के हटने से बिल्डर्स अब इनपुट की लागत खरीददारों को दे पाएंगे.
*इनपुट पर भुगतान किया गया टैक्स खरीददारों को वहन करना होगा. इससे 5000 रुपये प्रति स्क्वेयर फुट वाले घरों की कीमत वाली प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ेगी, जहां बिल्डर्स का प्रॉफिट मार्जिन कम होता है.
नए जीएसटी नियम इनपुट टैक्स क्रेडिट पर संशय खत्म करेंगे: CREDAI के नागपुर मेट्रो रीजन के प्रेजिडेंट अनिल नायर ने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट को दूर करने से बिल्डरों के लिए लागत में मामूली इजाफा होगा. उन्होंने कहा, “हालांकि इससे आईटीसी का फायदा पहुंचाने को लेकर ग्राहकों और डिवेलपर्स के बीच विवाद भी दूर होगा. आईटीसी को कैलकुलेट करना मुश्किल है क्योंकि कंस्ट्रक्शन एक लगातार चलते रहने वाली प्रक्रिया है और पेमेंट भी विभिन्न स्टेज में होती है.
हवेलिया ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल हवेलिया ने कहा, ”जीएसटी की दरें घटने से मार्केट में कोई राय नहीं बन पाएगी. हालांकि यह कह देना कि जीएसटी घटना से घर ज्यादा किफायती हो जाएंगे तो यह दूर की कौड़ी है.” हवेलिया ने आगे कहा, ”ये कुछ वक्त के लिए उठाए गए कदम हैं ताकि घर खरीददारों की भावनाओं को बढ़ावा दिया जा सके. लेकिन यह ग्राहकों के संशय को जरूर दूर करेगा कि क्या बिल्डर वाकई आईटीसी का फायदा उन्हें दे रहा है या नहीं. मुझे शक है कि इससे मांग में इजाफा होगा. आखिरकार, घर खरीदने की प्रक्रिया में अब इनपुट पर टैक्स पैकेज का हिस्सा हैं.”

क्या जीएसटी की दरों में कटौती से प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ेंगी?

लोढ़ा ग्रुप में चीफ सेल्स ऑफिसर प्रशांत बिंदल ने जीएसटी काउंसिल के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पिछली दरों ने लोगों को अपनी मर्जी का घर खरीदने से निराश कर दिया था. इनपुट टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता से बिल्डरों को कुछ हद तक कीमतों में कटौती में मदद मिली थी. अब इनपुट क्रेडिट टैक्स के न होने से बिल्डरों को कंस्ट्रक्शन की लागत महंगी पड़ेगी, जिसका असर ग्राहकों पर पड़ेगा. नतीजन, 1 अप्रैल 2019 से जीएसटी की नई दरें लागू होने पर प्रॉपर्टी की कीमत 5-6 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी. इसलिए मार्च रियल एस्टेट में निवेश करने वाले घर खरीददारों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा.
वहीं के रहेजा कॉर्प के रेजिडेंशियल बिजनेस के सीओओ ओम आहूजा को लगता है कि जीएसटी की दरों में कटौती से पूरे रियल एस्टेट मार्केट को राहत मिलेगी. उन्होंने आगे बताया, ”इससे पलभर के लिए सकारात्मक भावनाओं में नई जान आ जाएगी. अंडर कंस्ट्रक्शन सेगमेंट को इससे काफी फायदा होगा. अपार्टमेंट्स की कीमतें कम होंगी क्योंकि बिल्डर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं मिलेगा.”
जीएसटी दरों में कटौती की असलियत बनाम भावनाएं: घर खरीददार इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जीएसटी काउंसिल का यह अल्पकालीन कदम है, ताकि मार्केट की भावनाएं बदली जा सके. कुछ लोग इसे चुनाव से पहले सेंटीमेंट बूस्टर भी कह रहे हैं.
उनका कहना है कि क्या सरकार घरों की आसमान छूती कीमतों और जीएसटी के अतिरिक्त बोझ के बारे में गंभीर थी. जीएसटी के साथ स्टैंप ड्यूटी को मर्ज करने की कोशिश की जानी चाहिए थी क्योंकि इससे कुछ अहम शहरों के घरों की बढ़ती कीमतें गिर सकती थीं. हालांकि इसका मतलब यह होगा कि सरकारी खजाने को राजस्व नुकसान झेलना होगा, जो भावनाओं को मैनेज करने की तुलना में कहीं बड़ी चुनौती होगी.
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