घर खरीद रहे हैं तो कारपेट एरिया, बिल्ट-अप एरिया और सुपर बिल्ट-अप एरिया के बारे में जरूर जान लीजिए

हर रिहायशी परिसर में एरिया या स्क्वेयर फुटेज को कैलकुलेट करने के तीन तरीके होते हैं। ये सब सुनने में अलग न लगे, लेकिन कारपेट एरिया और बिल्ट-अप एरिया में बहुत बड़ा फर्क है।
यह बात मानने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए कि जो शब्द और शर्तें एजेंट्स और रियलटर्स हमें बताते हैं, वह अकसर हमारी समझ में नहीं आते। घर खरीदते वक्त कारपेट एरिया, बिल्ट-अप एरिया और सुपर बिल्ट अप एरिया जैसे शब्द आपको भ्रम में डाल देते हैं। हर रिहायशी परिसर में एरिया या स्क्वेयर फुटेज को कैलकुलेट करने के तीन तरीके होते हैं। ये सब सुनने में अलग न लगे, लेकिन कारपेट एरिया और बिल्ट-अप एरिया में बहुत बड़ा फर्क है।
अगर आपको इन शब्दों का मतलब नहीं मालूम तो हो सकता है कि बिल्डर आपको बेवकूफ भी बना दे। हालांकि इन्हें समझना कोई पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल नहीं है। बस आप इनके बारे में थोड़ा सा पढ़कर इन शब्दों को आसानी से समझ सकते हैं। आज हम आपको इन्हीं शब्दों से रूबरू करा रहे हैं।

कारपेट एरिया:

यह वह एरिया होता है, जो कारपेट से कवर किया जाता है या यूं कहें कि अंदरूनी दीवारों की मोटाई को छोड़कर अपार्टमेंट का क्षेत्रफल होता है। कारपेट एरिया में लॉबी, लिफ्ट, सीढ़ियों या खेलने वाले इलाके का एरिया शामिल नहीं होता। कारपेट एरिया असल में वह एरिया होता है, जो आप घर में रहने के दौरान इस्तेमाल करते हैं। तो जब भी आप घर ढूंढने जाएं तो कारपेट एरिया देखकर ही फैसला करें, क्योंकि नंबर से ही आपको स्पेस का सही अंदाजा होगा। कारपेट एरिया को जानकर आप किचन, बाथरूम, लिविंग रूम इत्यादि में इस्तेमाल होने वाले एरिया को अच्छी तरह समझ जाएंगे। इन दिनों कई बिल्डर्स पहले कारपेट एरिया का जिक्र भी नहीं करते और बिल्ट-अप एरिया या सुपर बिल्ट-अप एरिया पर चार्ज करते हैं। आमतौर पर कारपेट एरिया बिल्ट-अप एरिया का 70 प्रतिशत होता है।

बिल्ट-अप एरिया:

कारपेट एरिया और वॉल एरिया जोड़ने के बाद बिल्ट-अप एरिया बनता है। वॉल एरिया का मतलब सरफेस एरिया नहीं होता, बल्कि यह फ्लैट की अंदरूनी दीवारों की मोटाई है। जो एरिया दीवारों का होता है, वह बिल्ट-अप एरिया का लगभग 20 प्रतिशत है और यह पूरा नजरिया ही बदल देता है। बिल्ट-अप एरिया में अन्य क्षेत्रों जैसे बालकनी, फूलों की क्यारियां आदि शामिल हैं। इसे प्रशासन ने अनिवार्य किया हुआ है और बिल्ट-अप एरिया में यह 10 प्रतिशत का इजाफा करते हैं। इसलिए जब आप इसके बारे में सोचते हैं तो इस्तेमाल होने वाला एरिया बिल्ट-अप एरिया का 70 प्रतिशत होता है। उदाहरण के तौर पर अगर बिल्ट-अप एरिया 1200 स्क्वेयर फुट है तो इसका मतलब है कि करीब 30 प्रतिशत (360 स्क्वेयर फुट) का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा और असली एरिया जो आपको यूज करने के लिए मिलेगा, वह 840 स्क्वेयर फुट होगा।

सुपरबिल्ट-अप एरिया

सुपर बिल्ट-अप एरिया की कैलकुलेशन बिल्ट-अप एरिया और कॉमन एरिया जैसे कॉरिडोर, लिफ्ट लॉबी, लिफ्ट इत्यादि को जोड़कर की जाती है। कुछ मामलों में बिल्डर्स कॉमन एरिया में पूल, गार्डस और क्लब हाउस जैसी सुविधाएं भी शामिल कर देते हैं। एक डिेवेलपर/बिल्डर आप पर सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर चार्ज लगाता है, इसलिए इसे ‘सेलेबल’ (बिकने योग्य) एरिया भी कहा जाता है।

आइए इस केस पर विचार करते हैं। रेट 2000 प्रति स्क्वेयर फुट है और सुपर बिल्ट-अप एरिया 1200 स्क्वेयर फुट है। बेस कीमत 24 लाख रुपये है। जब एक फ्लोर पर एक से ज्यादा अपार्टमेंट होते हैं तो सुपर बिल्ट-अप एरिया दूसरी तरह कैलकुलेट किया जाता है।
-अपार्टमेंट 1 का एरिया 1000 स्क्वेयर फुट है।
-अपार्टमेंट 2 का एरिया 2000 स्क्वेयर फुट है।
-कुल कॉमन एरिया 1500 स्क्वेयर फुट है, जिसमें से अपार्टमेंट 1 का कॉमन एरिया 500 स्क्वेयर फुट है, जबकि अपार्टमेंट 2 के कॉमन एरिया का हिस्सा 1000 स्क्वेयर फुट है। इसके बाद अपार्टमेंट 1 का सुपर बिल्ट-अप एरिया 1500 स्क्वेयर फुट और अपार्टमेंट 2 का 3000 स्क्वेयर फुट है। इस उदाहरण में सुपर बिल्ट-अप एरिया अपार्टमेंट के अनुपात में बांटा गया है। (इस मामले में 1:2)

बिल्डर्स और डिवेलपर्स आमतौर पर सुपर बिल्ट-अप या ‘बिकने योग्य’ क्षेत्र के आधार पर अपार्टमेंट की कीमत वसूल करते हैं। साथ ही कारपेट एरिया और बिल्ट-अप एरिया का फर्क व अन्य शब्द किसी भी शख्स को भ्रम में डाल देते हैं। असल में इस्तेमाल होने वाला एरिया सुपर बिल्ट-अप एरिया से काफी कम होता है। कई बिल्डर्स आपसे कीमत लेने के दौरान कारपेट एरिया को भी ध्यान में रखते हैं, लेकिन एेसा दुर्लभ मामलों में होता है। 90 प्रतिशत बिल्डर्स बेस कॉस्ट की कैलकुलेशन सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर करते हैं। जितनी ज्यादा सुविधाएं होंगी, उतना ही ज्यादा सुपर बिल्ट-अप एरिया होगा।
रियल एस्टेट काफी उलझनों भरा है और आप उसके नियम और कार्यशैली नहीं बदल सकते। लेकिन जब आपको अलग-अलग स्क्वेयर फुटेज के बारे में जानकारी हो तो आप एक समझदारी भरा फैसला ले सकते हैं। यह लगता मुश्किल है, लेकिन आसान है।
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