जमीन / संपत्ति का बैनामा एक लिखित कानूनी दस्तावेज होता है, जो विक्रेता (seller) द्वारा क्रेता (buyer) के पक्ष में संपत्ति के स्वामित्व एवं अधिकारी के हस्तांतरण का विश्लेषण करता है.
यह क्रेता तथा विक्रेता दोनो के लिए कानूनी रूप से इस बात को स्पष्ट करता है कि अमुक जमीन या संपत्ति किस व्यक्ति द्वारा किस व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित की गयी है.
बैनामा यह भी स्पष्ट करता है कि उस संपत्ति का प्रकार कैसा है, वह कहां पर स्थित है, उस संपत्ति की पैमाइश क्या है, संपत्ति का मूल्य क्या है, आदि. कुल मिला कर बैनामे में एक संपत्ति का पूर्ण विवरण दर्शाया गया होता है.
संपत्ति की बिक्री तब कानूनी रूप लेता है जब क्रेता व विक्रेता दोनों संतुष्ट होकर विक्रय-विलेख (sale deed) को रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री करा देते है।
जमीन का बैनामा होने की प्रक्रिया
Step 1: क्रेता और विक्रेता जब जमीन के हस्तांतरण के लिए सहमत होते है तब विक्रय-विलेख तैयार किया जाता है.
Step 2: विक्रय-विलेख का निष्पादन क्रेता, विक्रेता तथा दो गवाहों के माध्यम से होता है।
Step 2: विक्रय-विलेख सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रार के सामने पंजीकृत होता है, जहाँ पर रजिस्ट्रार के समक्ष संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण पत्र तथा पहचान पत्र के साथ विक्रय-विलेख को दिखाया जाता है।
Step 3: रजिस्ट्रार समस्त दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद जब पूर्ण रूप से संतुष्ट हो जाता है तो वह विक्रय-विलेख को रजिस्टर कर देता है तथा जिसकी मूल प्रति क्रेता को दे दी जाती है.
Step 4: अंतिम प्रक्रिया में क्रेता संपत्ति पर कब्जे के साथ-साथ उस पर अपने अधिकारों का उपयोग शामिल होता है।
संपत्ति की रजिस्ट्री से जुडी अन्य आवश्यक बाते
आज कल जमीन के बैनामे के लिए क्रेता पहले ऑनलाइन आवेदन करता है, जहाँ पर उसे बैनामा होने की तिथि व समय स्लॉट द्वारा बुक करना होता है. उसके बाद निर्धारित तिथि पर क्रेता, विक्रेता तथा दो गवाहों के साथ उचित स्टाम्प पर विक्रय- विलेख लिखा जाता है.
इस बीच संपत्ति का मूल्य उस शहर के सरकारी सर्किल रेट के हिसाब से निर्धारित होता है तथा रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान भी किया जाना होता है. इसके उपरान्त निर्धारित समय पर रजिस्ट्रार के समक्ष बैनामा रजिस्टर होता है.
इस प्रकार जमीन का बैनामा पूर्ण हो जाता है और संपत्ति के हस्तांतरण के साथ- साथ अधिकारों का भी हस्तान्तरण हो जाता है. प्राप्त हुआ प्रमाण पत्र विक्रय-विलेख कहलाता है।
बैनामा कितने वर्ष के लिए मान्य होता है?
आम तौर पर लोगों के मन मे यह प्रश्न भी होता है कि अगर कोई बैनामा कराया गया है, तो वह कितने वर्षो के लिए मान्य होगा? इस प्रश्न का उत्तर यह है कि बैनामा तब तक मान्य होगा जब तक क्रेता उस जमीन का हस्तांतरण किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में न कर दे.
साथ ही अगर कोई पक्ष बैनामे से सहमत नहीं है तो सम्बन्धित सिविल न्यायालय में वह बैनामे को तीन वर्ष के अंदर अंदर चैलेंज कर सकता है. तीन वर्ष के भीतर ही ऐसा करना अनिवार्य होता है.
इस सब बातो के अतिरिक्त, हम यह कह सकते है कि जब तक क्रेता क्रय की गई संपत्ति को किसी अन्य के पक्ष में हस्तांतरित न कर दे, बैनामा तब तक मान्य होगा या सक्षम न्यायालय द्वारा जब तक उस बैनामे को कैंसिल न कर दिया जाए, तब तक के लिए मान्य होता है।





