रियल एस्टेट बेसिक्स: क्या होता है ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट?


कोई भी प्रॉपर्टी खरीदते वक्त ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट एक अहम दस्तावेज है, जिसे हासिल करना बहुत जरूरी होता है. आज हम आपको बताएंगे कि ये होता क्या है और रियल एस्टेट में निवेश करते वक्त आपको इसकी जरूरत क्यों पड़ती है.

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा जारी किया जाता है. यह प्रमाणित करता है कि बिल्डिंग रहने लायक है और उसे स्थानीय कानूनों और मंजूर किए गए प्लान के तहत ही बनाया गया है.

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की अहमियत क्या है?

नए प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद स्थानीय सरकारी एजेंसियां या योजना प्राधिकरण ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी करते हैं. यह सर्टिफिकेट इस बात का सबूत है कि प्रोजेक्ट बन चुका है और उसे बनाने के दौरान सभी नियामक, नियमों और बिल्डिंग कोड्स का पालन किया गया है. यह बिल्डर की जिम्मेदारी है कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद वह ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट हासिल करे. यह सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण है बिल्डिंग रहने लायक है. वहीं बिजली, सैनिटाइजेशन और पानी का कनेक्शन लेने के दौरान भी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है.

घर के मालिकों के लिए

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट को अपने पास मौजूद संपत्ति की कानूनी स्थिति को मजबूत करना जरूरी है. प्रॉपर्टी के वैध ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की गैर-मौजूदगी में स्थानीय निकाय संस्था को यह अधिकार है कि वह कानूनी एक्शन ले क्योंकि ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट न होने की सूरत में प्रोजेक्ट को अवैध ढांचा ठहरा दिया जाएगा. अगर आपको होम लोन अप्लाई करना है या फिर आप कोई रीसेल संपत्ति खरीद रहे हैं तो भी आपको ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ेगी. अगर प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं, तब भी आपको वैध ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ेगी.

कैसे हासिल कर सकते हैं ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट?

आदर्श रूप से, डेवेलपर को प्रोजेक्ट पूरा होने के 30 दिनों के भीतर ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर देना चाहिए. बतौर प्रॉपर्टी मालिक, आप लोकल कॉरपोरेशन या म्युनिसिपालिटी के दफ्तर में जाकर भी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सकते हैं. अगर मंजूरी के लिए प्रोजेक्ट ने सारे मानदंडों को पूरा किया है तो आपको एप्लिकेशन भरने के 30 दिनों के भीतर ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की कॉपी मिल जाएगी. ये हैं वो दस्तावेज, जिन्हें आपको एप्लिकेशन के साथ सब्मिट कराना होता है:

-प्रोजेक्ट के शुरू होने का सर्टिफिकेट

-प्रोजेक्ट के पूरे होने का सर्टिफिकेट

-फायर और पॉल्यूशन की एनओसी

-लेटेस्ट प्रॉपर्टी टैक्स सर्टिफिकेट

-इमारत के लिए मंजूर की गई योजना की कॉपी

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट और कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बीच फर्क

यह सुनिश्चित करने के बाद कि इसमें रहने योग्य होने के लिए सभी जरूरतें हैं तो अधिकारी किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं. जब प्रोजेक्ट खरीदारों के पोजेशन लायक हो जाता है तो कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है. वहीं ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट इस बात का सबूत होता है कि निर्माण के मानकों के हिसाब से ही प्रोजेक्ट बनाया गया है. किसी प्रोजेक्ट के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही बिल्डर प्रोजेक्ट के लिए विभिन्न सुविधाओं के लिए अप्लाई कर सकता है.

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेटकंप्लीशन सर्टिफिकेट
इसे स्थानीय अधिकारी जारी करते हैं, जिसमें लिखा होता है कि बिल्डिंग बनाने के दौरान सारे कंस्ट्रक्शन मानकों और इमारत के उपनियमों का पालन किया गया है.जब यह सुनिश्चित हो जाता है कि बिल्डिंग रहने लायक है, तब कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है.
ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद ही बिल्डर बिजली, पानी और सैनिटाइजेशन कनेक्शन के लिए अप्लाई करते हैं..कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद पोजेशन मिल जाता है.

बतौर प्रॉपर्टी मालिक आपके अधिकार

अगर बिल्डर ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट देने से इनकार करता है या फिर उसने प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी इसे लिया नहीं है तो आप बिल्डर के खिलाफ कानूनी एक्शन ले सकते हैं. कानूनी नोटिस जारी कर आप या तो ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की मांग कर सकते हैं या फिर केस को कंज्यूमर कोर्ट भी ले जा सकते हैं.
रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवेलपमेंट) एक्ट (RERA) जैसे नियामक के कारण उम्मीद की जाती है कि वे डेवेलपर्स की ओर से धोखाधड़ी या लापरवाही के मामलों को कम करेंगे. हालांकि, बतौर प्रॉपर्टी मालिक आपको सावधान रहना चाहिए और सुनिश्चित करें कि ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज हों और आपके प्रॉपर्टी पर अधिकार सुरक्षित रहें.

क्या होता है टेंपरेरी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट?

अस्थायी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट रद्द हो सकता है. अस्थायी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट किसी भी अथॉरिटी की किसी नियमावली में शुमार नहीं है. हालांकि ‘आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र’ है, जो यह साबित करता है कि जैसे-जैसे टावर पूरे होते जाएं बिल्डर सुविधा प्रदान कर सकता है. खरीदारों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि मंजूरी योजना की उम्र पांच साल है, जिसे जुर्माना के साथ दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है. एक बार अस्थायी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के साथ खरीदार द्वारा पोजेशन लेने के बाद उसे काम पूरा होने के बाद बिल्डर से परमानेंट ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मांग लेना चाहिए.

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट का स्टेटस कैसे चेक करें?

प्रोजेक्ट का स्टेटस संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है, अगर प्रोजेक्ट इस कानून के तहत रजिस्टर्ड है तो. RERA के तहत यह अनिवार्य है कि बिल्डर्स को नियमित तौर पर प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी पोर्टल पर देनी होगी. अगर यह अपडेट नहीं होती या वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है तो स्थानीय अथॉरिटी या निकाय संस्थाओं से भी इसकी पुष्टि की जा सकती है.

पूछे जाने वाले सवाल

कब प्रोजेक्ट को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलता है?

कंप्लीशन सर्टिफिकेट स्थानीय अधिकारी तब जारी करते हैं, जब प्रोजेक्ट के लिए सारे जरूरी दस्तावेज होते हैं ताकि लोग उसमें रह सकें.

क्या पानी के कनेक्शन के लिए बिल्डर्स को ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट दिखाना होगा?

पानी, बिजली और सैनिटाइजेशन कनेक्शन लेने के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की जरूरत होती है.

कब प्रोजेक्ट को मिलता है ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट?

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण होता है कि उन्हें मंजूर किए गए प्लान और स्थानीय कानूनों के मुताबिक ही बनाया गया है.

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