क्या होता है खसरा नंबर? जानें यह किस काम आता है


यह एक ईरानी शब्द है. खसरा नंबर किसी प्लॉट या सर्वे का नंबर होता है, जो गांवों में जमीन के एक टुकड़े को दिया जाता है. शहरी इलाकों में, जमीन के टुकड़ों को प्लॉट नंबर्स या सर्वे नंबर दिए जाते हैं, जो ग्रामीण इलाकों के खसरा नंबर के बराबर होता है.

क्या होता है खाता नंबर और क्या यह खेवट के समान होता है?

जब आप भारत में जमीन के रिकॉर्ड्स का अध्ययन करेंगे तो ऐसे शब्द आपके सामने आएंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में जमीन के रिकॉर्ड्स को सबसे पहले मुगलों ने संयोजित किया था ताकि टैक्स लगाकर राजस्व हासिल किया जा सके. इसी तरह, जमीन के रिकॉर्ड्स में काफी ईरानी और अरबी मूल के शब्द हैं. हालांकि जमीन के रिकॉर्ड्स में तब से लेकर अब तक काफी सुधार किए गए हैं, अब ये शब्दावली कानूनी सिस्टम और राजस्व का अहम हिस्सा हैं.

नीचे हम आपको बता रहे हैं कि खसरा क्या होता है. यह शब्द आपके सामने बार-बार आएगा, जब आप भारत में ऑनलाइन या ऑफलाइन जमीन के रिकॉर्ड्स का अध्ययन करेंगे. साथ ही हम आपको बताएंगे कि कैसे यह शब्द खाता नंबर और खतौनी  से अलग है और कैसे खसरा नंबर से आप जमीन के रिकॉर्ड्स का पता लगा सकते हैं.

खसरा नंबर: इसका मतलब क्या है?

शहरी इलाकों में भूमि के हर टुकड़े को प्लॉट नंबर दिए जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में भी इसी तरह के नंबर कृषि भूमि को दिए जाते हैं. प्रशासन गांवों का नक्शा लेते हैं और उस गांव के हर भूमि के टुकड़े को खसरा नंबर देते हैं.

ऐसे समय पर, इस घटना का उल्लेख करना उचित है, हालांकि दो शब्दों के लिए अंग्रेजी की वर्तनी बिल्कुल समान है. यहां खसरा का मतलब, हिंदी शब्दावली में खसरा नाम की बीमारी से नहीं है, जो एक अत्यधिक संक्रामक वायरस से होती है.

यूजर्स को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर वे अंग्रेजी में राज्य भू राजस्व विभागों के आधिकारिक पोर्टल को ट्रांसलेट करने की कोशिश करेंगे तो गूगल ट्रांसलेट खेसरा शब्द को चेचक ही बताएगा. यह आम गलती है और यूजर्स को इससे भ्रमित नहीं होना चाहिए.

खसरा नंबर: इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?

मार्च 2020 में, कोर्ट के आदेश के बाद 300 पुलिसकर्मी हरियाणा के फतेहाबाद इलाके में एक जगह पर प्रॉपर्टी को खाली कराने पहुंचे. लेकिन उन्हें काम पूरा किए बिना ही परिसर से लौटना पड़ा. क्योंकि खसरा नंबर में कोई समस्या थी. यह घटना दिखाती है कि खसरा नंबर कितना जरूरी है, जो भारत में प्लॉट और भूमि के टुकड़ों को पहचान के लिए दिया जाता है.

यह भी एक कारण है कि क्यों यह भारत में भूमि मालिकों के लिए अहम है ताकि वे अपनी अचल संपत्तियों पर नजर रख सकें, जो उनके भूमि धारण पैटर्न के संबंध में प्रतिबिंबित कर सकते हैं. चूंकि अब अधिकतर राज्य ऑनलाइन सूचना मुहैया कराते हैं इसलिए आपके लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड्स चेक करना आसान हो गया है.

खसरा नंबर और खाता नंबर में फर्क क्या है?

खसरा नंबर उन कई विवरणों में से एक है, जिसे अधिकारों के रिकॉर्ड के तहत भारतीय राज्यों में बनाए रखा जाता है, जिसे लोकप्रिय रूप से जमाबंदी या फर्द के नाम से जाना जाता है. खसरा नंबर के अलावा, RoR में मालिक, बंधक, पट्टे, फसल विवरण और कृषक की जानकारी का भी विवरण होता है.

यह एक ईरानी शब्द है. खसरा नंबर किसी प्लॉट या सर्वे का नंबर होता है, जो गांवों में जमीन के एक टुकड़े को दिया जाता है. शहरी इलाकों में, जमीन के टुकड़ों को प्लॉट नंबर्स या सर्वे नंबर दिए जाते हैं, जो ग्रामीण इलाकों के खसरा नंबर के बराबर होता है. भूमि के टुकड़े के कई मालिक हो सकते हैं.

खसरा सभी इलाकों और उनके क्षेत्रों, माप, मालिकों और कृषकों के विवरण, फसलों और मिट्टी के प्रकार आदि से संबंधित हर विवरण मुहैया कराता है. खसरा मूल रूप से शजरा नामक एक अन्य दस्तावेज का हिस्सा है, जिसमें एक पूरे गांव का नक्शा होता है.

बाराबंकी के अमरेश शुला, जो उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग में बतौर लेखपाल काम करते हैं, कहते हैं, “सारी भौगौलिक जानकारी के अलावा, खसरा नंबर भूमि के टुकड़े का आकार जैसे विवरण देता है, चाहे वो उपजाऊ हो, भूमि पर कौन सी फसल उग रही है, जमीन की गुणवत्ता और कितने पेड़ उस भूमि पर उगे हैं, इसकी जानकारी देता है. ”

खसरा नंबर का इस्तेमाल कर, आप जान सकते हैं कि भूमि का मालिकाना हक किस किस के पास रहा है और जमीन का पैटर्न भी. यह पिछले 50 साल तक का हो सकता है.

खसरा नंबर कौन देता है?

अधिकतर राज्यों में जहां यह शब्द मशहूर है, लेखपाल स्थानीय राजस्व दस्तावेजों को तैयार करता है. गांव का पटवारी भूमि राजस्व के दस्तावेज अपडेट रखने में लेखपाल की मदद करता है.

खरीदारों को यहां यह ध्यान देना चाहिए कि खसरा नंबर, जो कि शारजा टाइटल के दस्तावेज का हिस्सा है, वह हमेशा प्लॉट नंबर के लिए समान नहीं होता. अगर भूमि के टुकड़े को बांटा जाता है, बेचा जाता है या फिर गिफ्ट में दिया जाता है और लेनदेन के बाद म्यूटेशन होता है तो उसी हिसाब से खसरा नंबर बदल जाएगा.

मान लीजिए किसी प्लॉट का खसरा नंबर 50 है, और इसे बाद में दो भागों में बांटा जाता है. उस स्थिति में, दो प्लॉट्स में खसरा संख्या 50/1 और 50/2 होगी.

क्या होता है खाता नंबर?

दूसरी ओर, खाता नंबर एक परिवार को आवंटित किया जाता है, जो सभी सदस्यों के भूमि धारण को दर्शाता है. खाता नंबर को खेवट नंबर भी कहा जाता है. खाता नंबर आपको मालिकों और उनके कुल भूमिधारण के बारे में बताता है.

उदाहरण के तौर पर प्रकाश, सौरभ और राहुल भाई हैं और उनका भूमि का टुकड़ा गांव में खसरा नंबर 20, 22 और 24 में आता है. उनका खाता या खेवट नंबर एक जैसा ही होगा.

जिस राज्य के लिए आप जमीन का रिकॉर्ड देख रहे हैं, उसके आधार पर आपको दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए खाता नंबर या खतौनी नंबर या दोनों का उपयोग करना होगा.

कौन से राज्यों में खसरा शब्द इस्तेमाल होता है?

उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. जमीन से जुड़े रिकॉर्ड्स की अहम जानकारी हासिल करने के लिए खसरा नंबर का इस्तेमाल किया जाता है. वो राज्य जहां खबर नंबर के रूप में जमीन को पहचान आवंटित की जाती है, वे हैं- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड आदि.

खेवट नंबर क्या होता है?

खेवट नंबर, जिसे खाता नंबर भी कहा जाता है, वह भूमि मालिकों को दिया जाता है, जिनका भूमि के टुकड़े पर संयुक्त रूप से मालिकाना हक होता है.

मालिकाना हक बदलने के बाद खेवट नंबर में बदलाव होते हैं.

उदाहरण के तौर पर एक गांव में 5 खेवट हैं. श्याम, राम और महेश खेवट 3 में संयुक्त मालिक हैं. लेकिन तीनों अपनी जमीन लखन को बेचना चाहते हैं, जिसका उसी गांव में खेवट नंबर 2 है.  म्यूटेशन के बाद, लखन का नाम नए जमाबंदी रिकॉर्ड्स में खेवट नंबर 2 और नंबर 3 में भी दिखाई देगा.

क्या होता है खतौनी नंबर?

यह एक तरह का अकाउंट नंबर होता है. खतौनी एक परिवार के में भूमि-धारण पैटर्न पर जानकारी मुहैया कराता है. खतौनी एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें जमीन, उसके खसरा नंबर, उसके मालिकों की संख्या, उसके कुल क्षेत्र आदि के बारे में जानकारी दी जाती है. खतौनी में एक जमीन के मालिक के स्वामित्व वाले सभी खसरों का विवरण भी होता है. दूसरे शब्दों में, खतौनी एक परिवार के स्वामित्व वाले सभी खसरों का रिकॉर्ड है.

खतौनी नंबर हासिल करने के लिए, आपको गांव की तहसील या फिर जनसुविधा केंद्र में जाना होगा. आप सूचना हासिल करने के लिए राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं क्योंकि अधिकतर राज्य इसे ऑनलाइन भी मुहैया कराते हैं. अधिकतर बार यह जानकारी संबंधित राज्य की भूलेख वेबसाइट्स पर उपलब्ध होती है.

बटाई क्या होता है?

लखनऊ के वकील प्रभांशु मिश्रा कहते हैं, “ऐतिहासिक रूप से, अधिकतर जमीन मालिक खेती के मकसद के लिए ऐसे लोगों पर निर्भर थे, जिनकी कोई जमीन नहीं थी. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच एक अरेंजमेंट तय हुआ, जहां मालिक खेती के लिए अपनी भूमि और स्रोत मुहैया कराएगा, जबकि बाकी सारा काम किसान करेंगे. बाद में फसल एक समान दोनों पक्षों में बांट दी जाएगी. हिंदी पट्टी में इस अरेंजमेंट को बटाई सिस्टम कहते हैं.

उदाहरण के तौर पर, राम कुमार, दीन दयाल वरण और रघुनाथ प्रसाद किसान हैं, जो गांव में खसरा नंबर 26, 30 और 35 में भूमि के एक खास टुकड़े पर खेती करते हैं. इन तीनों का खतौनी नंबर एक जैसा ही होगा.

खाता, खसरा और खतौनी नंबर क्या जानकारी मुहैया कराते हैं?

-गांव में कितनी कृषि भूमि है.
-कितने लोग गांव में एक विशेष भूमि के टुकड़े के मालिक हैं.
-क्या इस विशेष जमीन के टुकड़े पर खेती मालिकों द्वारा की जा रही है.
-यदि नहीं, तो कितने लोग इस विशेष भूमि के टुकड़े पर खेती कर रहे हैं.
-गांव में एक परिवार के पास कितनी जमीन है.
-भूमि में इन भू-मालिकों का हिस्सा क्या है.

क्या है?

खाता नंबर : मालिक के विवरण के साथ-साथ उसके पास कितनी जमीन है.

खसरा नंबर: प्लॉट की जानकारी.

खतौनी नंबर: एक परिवार के पास कितनी भूमि है, उसकी जानकारी इसमें लिखी होती है.

खसरा नंबर/ खाता नंबर/ खतौनी नंबर कैसे खोजें?

चूंकि अब अधिकतर राज्यों ने जमीन के रिकॉर्ड्स को डिजिटल कर दिया है तो यूजर्स संबंधित राज्य की राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा तहसीलदार दफ्तर से भी आपको इसकी कॉपी मिल जाएगी.

उन राज्यों की सूची जहां आप खसरा नंबर/ खाता संख्या/खतौनी संख्या विवरण ऑनलाइन पा सकते हैं

आंध्र प्रदेश: मीभूमि

असम: धरित्री

बिहार: बिहारभूमि

छत्तीसगढ़: भुइयां

दिल्ली: भूलेख

गोवा: भूलेख

गुजरात: ई-धरा

हरियाणा: जमाबंदी

हिमाचल प्रदेश: भूलेख

झारखंड: झारभूमि

कर्नाटक: सर्वेक्षण, निपटान और भूमि रिकॉर्ड

मणिपुर: लौचा पथाप

मध्य प्रदेश: भूलेख

महाराष्ट्र: महाभूमि

ओडिशा: भूलेख

पंजाब: जमाबंदी

तेलंगाना: Know your Land Status

ई-सर्विसराजस्थान: अपना खाता

उत्तर प्रदेश: भूलेख

उत्तराखंड: भूलेख

पश्चिम बंगाल: बंगालभूमि

खाता, खसरा, खतौनी के उदाहरण

यहां हरियाणा के एक गांव से जमाबंदी नकल है जो ऊपर बताई गई संख्याओं की व्याख्या करता है.

khasra naksha

What is Khasra number?

बिहार में ऑनलाइन खसरा, खतौनी नंबर कैसे चेक कर सकते हैं?

बिहार भूमि की वेबसाइट पर जाकर जमीन मालिक खसरा और खतौनी के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स हासिल कर सकते हैं. इसके लिए यहां क्लिक करें.

राजस्थान में ऑनलाइन खसरा, खतौनी नंबर कैसे चेक कर सकते हैं?

अपना खाता वेबसाइट पर जाकर जमीन मालिक खसरा और खतौनी के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स हासिल कर सकते हैं. इसके लिए यहां क्लिक करें.

मध्य प्रदेश में खसरा, खतौनी नंबर ऑनलाइन कैसे हासिल करें?

MPभूलेख वेबसाइट पर जाकर जमीन मालिक खसरा और खतौनी के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स हासिल कर सकते हैं. इसके लिए यहां क्लिक करें.

उत्तराखंड में ऑनलाइन खसरा, खतौनी नंबर कैसे हासिल करें?

यूकेभूलेख वेबसाइट पर जाकर जमीन मालिक खसरा और खतौनी के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स हासिल कर सकते हैं. इसके लिए यहां क्लिक करें.

यूपी में खसरा, खतौनी नंबर ऑनलाइन कैसे हासिल करें?

यूपीभूलेख वेबसाइट पर जाकर जमीन मालिक खसरा और खतौनी के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स हासिल कर सकते हैं. इसके लिए यहां क्लिक करें.

सवाल-जवाब

क्या खसरा नंबर खाता नंबर से अलग होता है?

खसरा नंबर जमीन का सर्वे नंबर होता है जबकि खाता नंबर में मालिकों की जानकारी होती है.

मैं अपनी जमीन के लिए खसरा नंबर कैसे हासिल कर सकता हूं?

आप अपने राज्य की आधिकारिक भूमि राजस्व विभाग की वेबसाइट पर लॉग इन करके खसरा नंबर का पता लगा सकते हैं.

क्या मैं दिल्ली में खसरा नंबर की जानकारी ऑनलाइन हासिल कर सकता हूं?

आप राज्य की भूलेख वेबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर सकते हैं.

आंध्र प्रदेश में खसरा नंबर की जानकारी कैसे चेक कर सकते हैं.

आपको मीभूमि वेबसाइट पर जाना होगा. यहां आपको सारी जानकारियां मिल जाएंगी.

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