गिफ्ट में मिली संपत्ति पर जानिए कितना चुकाना होगा टैक्स और स्टैंप ड्यूटी


घर को गिफ्ट में देने पर कोई मौद्रिक लेनदेन नहीं होता, लेकिन इसमें रजिस्टर्ड होना और कुछ मामलों में टैक्स चुकाया जाना जरूरी है।

गिफ्ट डीड केवल तभी कानूनी रूप से वैध हो सकती है, जब गिफ्ट डीड स्टैंप ड्यूटी और गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क भुगतान करके इसे विधिवत पंजीकृत किया गया हो। यह गाइड गिफ्ट डीड स्टैंप ड्यूटी और गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क के विभिन्न पहलुओं को समझने में आपकी सहायता करेगी।

 

गिफ्ट डीड स्टैंप ड्यूटी

गिफ्ट देना एक ऐसा कार्य है, जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से अपने स्वामित्व वाली संपत्ति में कुछ या सभी अधिकारों को बिना किसी विचार के किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करता है। इस तथ्य को देखते हुए कि दाता संपत्ति के स्वामित्व में परिवर्तन से कोई भी फायदा नहीं कमा रहा है, यह अजीब लग सकता है कि उससे किसी अन्य व्यक्ति को अपनी संपत्ति गिफ्ट के तौर पर देने के लिए भुगतान करने की अपेक्षा की जाती है। भले ही यह एक सामान्य लेन-देन की तरह नहीं है, एक घर को उपहार में देने पर आयकर और स्टैंप शुल्क देना पड़ता है। भारत में गिफ्ट डीड स्टैंप ड्यूटी विभिन्न राज्यों में अलग-अलग होती है और संपत्ति के मूल्य के 2% से 7% के बीच हो सकती है।

 

गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क

संपत्ति के आदान-प्रदान से संबंधित अधिकतर कार्यों की तरह, इसको कानूनन अनिवार्य बनाने के लिए गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क भी लागू होता है। जबकि कुछ राज्य संपत्ति की लागत का 1% गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क के रूप में लेते हैं, अन्य एक मानक शुल्क लेते हैं।

 

कौन सी संपत्ति उपहार में दी जा सकती है?

किसी संपत्ति को भारतीय कानूनों के अंतर्गत उपहार बनने के लिए निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना होगा:

  • संपत्ति चल या अचल संपत्ति होनी चाहिए।
  • संपत्ति हस्तांतरणीय होनी चाहिए।
  • संपत्ति भविष्य की संपत्ति नहीं होनी चाहिए।
  • संपत्ति मूर्त (स्पर्श करने योग्य) होनी चाहिए।

 

गिफ्ट देने की कानूनी जरूरतें

ट्रांसफर अॉफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत घर गिफ्ट के तौर पर देने के लिए एक रजिस्टर्ड डॉक्युमेंट तैयार कराना पड़ता है, जिस पर उस शख्स के दस्तखत होते हैं, जो प्रॉपर्टी गिफ्ट में दे रहा है। इसके अलावा दस्तावेज को दो गवाहों से भी अटेस्ट कराना पड़ता है।
इसका मतलब है कि कोई शख्स ऐसे ही प्रॉपर्टी को गिफ्ट में देने का फैसला नहीं कर सकता. इसके लिए उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. जैसा कि सेल डीड के मामले में होता है, गिफ्ट डीड को सब रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्टर कराना पड़ता है.
इसके बाद रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करता है कि जब गिफ्ट डीड/दस्तावेज रजिस्ट्रेशन के लिए लाई जाती है तो उस पर स्टैंप ड्यूटी चुकाई गई है या नहीं। स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्जेज के तौर पर जो राशि चुकाई जाती है वह नियमित बिक्री के मामले में समान होती है। लेकिन अगर गिफ्ट डीड कुछ खास रिश्तेदारों के बीच होती है तो कुछ राज्य स्टैंप ड्यूटी में छूट देते हैं। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में किसी के पति या पत्नी, बच्चों, नाती-पोतों या मरने वाले बेटे की पत्नी को रिहायशी या कृषि संपत्ति के तोहफे पर चुकाई जाने वाली स्टैंप ड्यूटी की सीमा 200 रुपये है, चाहे संपत्ति का मूल्य कुछ भी हो.

 

गिफ्ट तुरंत लागू हो जाता है

जो लोग अपनी प्रॉपर्टी को बतौर गिफ्ट दे रहे हैं, उन्हें यह बात पता होनी चाहिए कि जैसे ही गिफ्ट डीड रजिस्टर्ड होगी, मालिक का उस संपत्ति से स्वामित्व खत्म हो जाएगा. यह कहा जाता है कि गिफ्ट डीड के प्रावधान, जैसे बिक्री या त्याग तुरंत प्रभाव में आ जाते हैं. यह वसीयत के मामले में सच नहीं है, इसके प्रावधान तभी लागू होते हैं, जब वसीयत बनाने वाला मर जाता है.
लेकिन, ध्यान दें कि गिफ्ट डीड तभी लागू होगी, जब जरूरी स्टैंप ड्यूटी चुका दी जाएगी.

गिफ्ट डीड पर इनकम टैक्स

आयकर नियमों के मुताबिक एक साल में किसी शख्स को जो गिफ्ट्स मिलते हैं, उन पर पूरी तरह छूट है। लेकिन एक साल में इन गिफ्ट्स की वैल्यू 50 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर एक साथ मिले गिफ्ट्स की कीमत 50 हजार रुपये से ज्यादा है तो इस पर कोई छूट नहीं मिलेगी और इनकम टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि अगर दो करीबी रिश्तेदारों के बीच गिफ्ट्स दिए जाते हैं तो आयकर नियम राहत देते हैं। नतीजन किसी संपत्ति को बतौर गिफ्ट (चल या अचल) किसी खास रिश्तेदार को दिया जाता है तो इसे हासिल करने वाले पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इन खास रिश्तेदारों में माता-पिता, पत्नी/पति, भाई-बहन, पति या पत्नी के भाई-बहन, किसी महिला-पुरुष या पति-पत्नी के वशंज आते हैं। इसके अलावा ऊपर लिखे सभी लोगों के पति-पत्नी भी इस सूची में शामिल हैं।
अगर आपको किसी रिश्तेदार से संपत्ति बतौर गिफ्ट मिली है तो पहली बार आपको उसे बेचते वक्त टैक्स चुकाना होगा। इसकी लागत उसी रूप में ली जाएगी, जिसका प्रॉपर्टी के पिछले मालिकों ने भुगतान किया था। मुनाफे को शॉर्ट टर्म माना जाए या लॉन्ग टर्म, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या आपके होल्डिंग पीरियड की कुल अवधि के साथ-साथ पिछले मालिक जिसने असल में भुगतान किया था, वह 36 महीने से ज्यादा है या नहीं।
अगर कैलकुलेशन करते वक्त अवधि 36 महीने से कम है तो प्रॉपर्टी बेचकर मिले मुनाफे को शॉर्ट टर्म माना जाएगा और यह आपकी नियमित आय में जुड़ेगा। साथ ही लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा। लेकिन अगर होल्डिंग पीरियड 36 महीने से ज्यादा है तो आप प्रॉपर्टी के मूल्य पर सूचीकरण के फायदे के साथ-साथ रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) और नेशनल हाइवे अथॉरिटी अॉफ इंडिया (एनएचएआई) के आवासीय घर और कैपिटल गेन्स बॉन्ड में निवेश करके 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के भुगतान से छूट का विकल्प पा सकते हैं।

क्या आप अपनी गिफ्ट दी हुई प्रॉपर्टी को वापस ले सकते हैं?

आप अपना दिया हुआ गिफ्ट वापस ले सकते हैं लेकिन इस पहलू को रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड में लिखवाना जरूरी है. ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के सेक्शन 126 के तहत सौदा रद्द करना तब तक संभव नहीं होगा, जब तक कि डोनर रजिस्टर्ड कॉन्ट्रैक्ट में इसका जिक्र नहीं करता है कि गिफ्ट वापस लेने का अधिकार उसके पास है.

इसका मतलब यह है कि गिफ्ट डीड का मसौदा तैयार करते समय, प्रॉपर्टी गिफ्ट करने वाले को साफ तौर पर इस बात का जिक्र करना होगा कि गिफ्ट डीड लागू होने के बाद भी, प्रॉपर्टी गिफ्ट करने वाले के पास गिफ्ट डीड को रद्द करने और डीड से गिफ्ट वापस लेने का अधिकार होगा, जब भी वह ऐसा करना चाहे.

 

गिफ्ट डीड रद्द करने की शर्तें

गिफ्ट डीड को रद्द करने के लिए निम्नलिखित चरण हैं:

  1. गिफ्ट डीड को रद्द करने की परिस्थितियों के बारे में दाता और प्राप्तकर्ता के बीच एक क्लॉज़ या समझ होना महत्वपूर्ण है। यह कोई विफलता या विशेष घटना हो सकती है।
  2. उपहार प्राप्त करते समय गिफ्ट डीड को रद्द करने की शर्त प्राप्तकर्ता द्वारा स्वीकार की जानी चाहिए और यह केवल दाता की मर्जी पर आधारित नहीं होनी चाहिए।
  3. कोई भी उपहार जो किसी धोखाधड़ी पर आधारित नहीं था, उसे एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता है। ऐसे मामलों में, दाता और प्राप्तकर्ता को इसे रद्द करने के लिए अदालत में जाना होगा।

यह भी देखें: कारपेट एरिया के बारे में सब कुछ 

 

गिफ्ट डीड के बारे में इन बातों का रखें ध्यान

रिश्तेदारों के अलावा अन्य लोगों से गिफ्ट: भारतीय कानूनों के तहत, गैर-रिश्तेदारों के बीच गिफ्ट को कानूनी नहीं माना जाता है. यह धारणा इस आधार पर आधारित है कि मालिक किसी ऐसे व्यक्ति से विमर्श करेगा जो उन्हें नहीं जानता. ऐसे मामलों में, डीड को सेल डीड की तरह रजिस्टर कराना होगा.

गिफ्ट को वापस लेना: गिफ्ट डीड को वापस लेने के लिए, डोनर को यह साबित करना होगा कि उसे धोखा दिया गया था या डीड को निष्पादित करने के लिए मजबूर किया गया था. गिफ्ट में दी गई संपत्ति को वापस लेने का कोई और तरीका नहीं है.

शादी में मिले गिफ्ट्स: वसीयत या विरासत के जरिए शादी पर रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट्स पर टैक्स नहीं लगाया जाता है.

गिफ्ट वैलिडिटी: एक गिफ्ट डीड तभी वैध है, जब सही तरीके से उसका निष्पादन किया गया है और ट्रांसफर करने वाला संपत्ति का कानूनी मालिक है. गिफ्ट डीड के वैध होने की एक और शर्त यह है कि अदालतों के किसी भी आदेश से इस तरह के ट्रांसफर नहीं रुके हों.

गिफ्ट डीड पर टैक्स देयता: शादी, विरासत या किसी स्थानीय निकाय द्वारा अगर कोई शख्स गिफ्ट डीड हासिल करता है तो उसे टैक्स नहीं चुकाना होगा. यही बात फाउंडेशन, ट्रस्ट, एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, मेडिकल इंस्टिट्यूशन्स इत्यादि पर लागू होती है.

 

गिफ्ट डीड को एग्जीक्यूट करने के कुछ टिप्स

  1. अगर आप किसी को चल संपत्ति दे रहे हैं तो गिफ्ट डीड को एग्जीक्यूट करना जरूरी नहीं है.
  2. गिफ्ट डीड में, यह बात जरूर डाल दें कि आपका गिफ्ट लेने वाले के प्रति स्नेह और लगाव है इसलिए आप प्रॉपर्टी ट्रांसफर कर रहे हैं.
  3. बेहतर यह भी होगा कि आप यह बात जरूर डाल दें कि किस वजह से आप गिफ्ट डीड में गिफ्ट को दे रहे हैं. इसका कारण सामान्य कल्याण या व्यक्ति हो सकता है.
  4. गिफ्ट डीड के रजिस्ट्रेशन के वक्त आपको इस बात का भी सबूत दिखाना होगा कि गिफ्ट लेने वाले ने उसे स्वीकार कर लिया है.
  5. गिफ्ट डीड को एग्जीक्यूट करने से पहले अपने परिवार के सदस्यों की राय जरूर ले लें. उनके ध्यान में यह बात लानी जरूरी है ताकि आगे कानूनी झंझट ना हों.

यह भी देखें: भारत में संपत्ति पंजीकरण कानूनों के बारे में सब कुछ

 

गिफ्ट डीड से जुड़े भ्रम

आप अपनी प्रॉपर्टी को पसंद के मुताबिक गिफ्ट में दे सकते हैं:  आप ऐसी ही प्रॉपर्टी को गिफ्ट में दे सकते हैं, जो आपने खुद बनाई हो और जिसके आप मालिक हों. किसी भी प्रकार की साझा प्रॉपर्टी को गिफ्ट में नहीं दिया जा सकता. यह पैतृक संपत्ति के मामले में सच है.

चूंकि यह गिफ्ट है  इसलिए इस पर टैक्स नहीं लगेगा: ज्यादा महंगे गिफ्ट्स पर उसे पाने वाले को टैक्स देना होगा. चूंकि सारी प्रॉपर्टीज काफी महंगे गिफ्ट्स होते हैं लिहाजा स्टैंप ड्यूटी की उलझनें पैदा होंगी.

कोई भी प्रॉपर्टी गिफ्ट कर सकता है: कोई भी शख्स जो मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ है वह प्रॉपर्टी गिफ्ट कर सकता है. वरना गिफ्ट डीड को रद्द माना जाएगा.

यह भी देखें: प्रॉपर्टी के म्युटेशन के बारे में सब कुछ

 

गिफ्ट डीड पर स्टैंप शुल्क की गणना कैसे करें?

चूंकि संपत्ति के मूल्य का कुछ प्रतिशत गिफ्ट डीड पर स्टैंप शुल्क के रूप में भुगतान करना होता है, गणना उस प्रतिशत पर आधारित होगी जो किसी राज्य में गिफ्ट डीड पंजीकरण पर लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, यूपी में उपहार के प्राप्तकर्ता को स्टैंप शुल्क के रूप में उपहार के मूल्य का 2% भुगतान करना पड़ता है। मान लीजिए कि उपहार में दी जा रही संपत्ति का मूल्य 1 करोड़ रुपये है, तो इसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति को गिफ्ट डीड पर स्टैंप शुल्क के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या होती है गिफ्ट डीड?

गिफ्ट डीड एक दस्तावेज होता है, जो एक से दूसरे शख्स को बतौर गिफ्ट प्रॉपर्टी ट्रांसफर करता है. गिफ्ट डीड सिर्फ तब वैध होती है, जब यह परिवार के किसी सदस्य/दोस्त द्वारा दूसरे के बदले में कोई विचार किए बिना हो. रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के सेक्शन 17 के मुताबिक, गिफ्ट डीड को रजिस्टर कराना अनिवार्य है.

प्रॉपर्टी के लिए गिफ्ट डीड कैसे बनाएं?

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के मुताबिक, गिफ्ट के तहत आवासीय संपत्ति का ट्रांसफर एक दस्तावेज/इंस्ट्रूमेंट के तहत होना चाहिए. इस पर प्रॉपर्टी को गिफ्ट करने वाले शख्स की ओर से दस्तखत या कम से कम दो गवाहों द्वारा रजिस्टर्ड किया जाना चाहिए.

क्या आप गिफ्ट डीड को चुनौती दे सकते हैं?

एक गिफ्ट डीड को उसकी वैधता के कानून और उसकी अवैधता के प्रमाण के तहत उसकी वैधता के आधार पर अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

एक वकील गिफ्ट डीड में कैसे मदद कर सकता है?

वकील गिफ्ट डीड के कानूनी दस्तावेज और संचालन के लिए जिम्मेदार होता है। गिफ्ट डीड एक कानूनी दस्तावेज है जिसे केवल एक वकील के मार्गदर्शन में कार्यान्वित किया जा सकता है। इस प्रकार, वकील गिफ्ट डीड का ड्राफ्ट तैयार करने और पंजीकरण में मदद करता है और यह भी सुनिश्चित करता है कि इस प्रक्रिया में सभी कानूनी आवश्यकताओं को पूरा किया जाए।

(लेखक टैक्स और इन्वेस्टमेंट के एक्सपर्ट हैं और उन्हें 35 वर्ष का अनुभव है)

 

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