क्या भारत में कोरोना वायरस का कहर प्रॉपर्टी की कीमतों पर भी बरपेगा?

जो लोग यह सोच रहे हैं कि कोरोना वायरस के कारण प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आएगी, उन्हें निराश होना पड़ सकता है. क्योंकि कोरोना वायरस खत्म होने के बाद प्रॉपर्टी की वैल्यू कई कारणों से ऊपर जाने वाली हैं.

मांग की कमी के कारण भारत में रियल एस्टेट मार्केट में कीमतों में इजाफा नहीं हो रहा है और अब कोरोना वायरस के कहर के कारण पूरा देश लॉकडाउन कर दिया गया है, जिससे प्रॉपर्टी मार्केट में इजाफे का कोई भी चांस खत्म हो गया है.  प्रॉपटाइगर डॉट कॉम के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत के 9 बड़े रिहायशी मार्केट्स में पिछले आधे दशक में बहुत कम कीमतों में इजाफा हुआ है.

भारत के नौ प्रमुख आवासीय बाजारों में संपत्ति की कीमतें

 

सिटी दिसंबर 2019 psf के रूप में औसत संपत्ति मूल्य दिसंबर 2015 के औसत मूल्य में शुद्ध% परिवर्तन सीएजीआर
अहमदाबादरु 2,9743%0.6%
बेंगलुरुरु 5,19411%2.1%
चेन्नईरु 5,2214%0.8%
गुरुग्रामरु 5,236-7%-1.4%
हैदराबादरु 5,31840%7%
कोलकातारु 4,0354%0.7%
मुंबई9,44615%2.8%
नोएडारु 3,922-3%-0.8%
पुणे4,8742%0.5%

स्रोत: प्रॉपटाइगर डेटा लैब्स

हालांकि अगर आप प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट की उम्मीद लगाए बैठे हैं, चाहे वह लंबी अवधि में हो या मध्य में तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी. अगर कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद प्रॉपर्टी की कीमतों में इजाफा हुआ तो वह कई कारणों पर आधारित होगा.

क्यों कोविड-19 के बाद भारत में प्रॉपर्टी की कीमतें नहीं गिरेंगी?

 

आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में बताया गया है कि बिल्डरों को अपनी इन्वेंट्री के बोझ को कम करने के लिए एक उपाय के रूप में कीमतों को कम करने की अनुमति देनी चाहिए. हालांकि, कई मुद्दों पर खेल जारी हैं, जो एक निकट भविष्य में इसे असंभव बना रहे हैं.

*प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है क्योंकि बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का जो सामान भारत चीन से इंपोर्ट करता है, उस पर महामारी के कारण चोट पहुंचेगी.

*केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया प्रोग्राम को लंबी अवधि में इस मुश्किल स्थिति की वजह से बढ़ावा मिल सकता है.

*सरकार ऐसे कदम ला सकती है, जिससे लोग रियल एस्टेट में ज्यादा से ज्यादा निवेश करेंगे.

*इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए आरबीआई रेपो रेट की दरें कम कर सकती है, जिससे लोगों के लिए घर खरीदना आसान हो जाएगा.

बेहद मुश्किल दौर में हैं बिल्डर्स

शीर्ष 9 प्रॉपर्टी बाजारों में बिल्डर्स के पास बिना बिके इतने फ्लैट्स हैं कि उनकी कीमत 6.1 लाख करोड़ रुपये है. चूंकि अब खरीदार न्यूट्रल या गैर-प्रतिबद्ध हो गए हैं इसलिए भारी संख्या में बिल्डर्स के लिए प्रॉफिट बनाने का कोई चांस नहीं है. कैश के संसाधन भी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के संकट के कारण धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं.

वहीं देश के कई बड़े बिल्डर भी बकाया राशि न चुकाने के कारण दिवालिया अदालतों के चक्कर काट रहे हैं. अगर मांग में गिरावट का दौर लंबे समय तक जारी रहा तो कई बिल्डरों को यही दिन देखने पड़ेंगे.

वहीं सरकार ने लंबित पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का फंड बनाने का फैसला किया है. लेकिन अर्थव्यवस्था में गिरावट से उसकी सीमा रियल एस्टेट पर जोर और राहत देने को लेकर सीमित हो जाएगी. ऐसे मुश्किल दौर में, बिल्डरों के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचा है कि वे फ्लैट्स बेचकर ही पैसा कमाएं. ऐसे में कीमतों में गिरावट करीब-करीब नामुमकिन है. इसी दौरान, प्रोजेक्ट लॉन्च की संख्या में भी कई फैक्टर्स के कारण गिरावट आएगी.

मटीरियल सप्लाई करने की लागत बढ़ेगी

प्रोजेक्ट में देरी होगी क्योंकि बिल्डिंग बनाने के लिए जो माल भारत चीन से आयात करता है, वो कोरोना वायरस के कारण प्रभावित होगा. इसका असर उन प्रीमियम लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट पर पड़ेगा, जो फर्निशिंग और फिक्चर्स के लिए पूरी तरह चीन से सप्लाई पर निर्भर हैं. समय के अंतराल से न सिर्फ हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में देरी होगी बल्कि इससे प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ जाएगी क्योंकि बिल्डरों को इमारत की जरूरतें पूरी करने के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना होगा.

नरेंद्र मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया को इस मुश्किल स्थिति में लंबी अवधि या मध्यावधि में बढ़ावा मिल सकता है. लेकिन मौजूदा हालातों में जो बिल्डरों को चोट पहुंचेगी, वह असहनीय होगी. ऐसी स्थिति में कीमतें गिराने पर बात की ही नहीं जा सकती. लेकिन सरकार ऐसे कदम उठा सकती है ताकि लोगों के लिए प्रॉपर्टी खरीदने को और आकर्षक बनाया जा सके. रियल एस्टेट देश में दूसरा सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाला सेक्टर है और इसे राहत देने के लिए बिना बिके फ्लैट्स पर टैक्स को माफ किया जा सकता है.

ब्याज दरें गिर सकती हैं और घर खरीदना आसान हो सकता है

आरबीआई रेपो रेट की दरें घटा सकता है ताकि लोगों के लिए घर खरीदना और भी आसान हो जाए. होम लोन की ब्याज दर 8 प्रतिशत पर है. कोविड-19 से रोजगार पर पड़ने वाला प्रभाव साफ होने के बाद इसमें और कटौती भी हो सकती है ताकि लोगों के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करें.

चूंकि सरकार ने पहले ही सेक्शन 80ईईए के तहत मार्च 2021 तक फायदों का विस्तार कर दिया है इसलिए पहली बार घर खरीदने वालों को बढ़ावा देने के लिए इसे और बढ़ाया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों में नौकरियां जाने को लेकर भी घबराहट है और वह तब भी रहेगी, जब यह संकट खत्म हो जाएगा और हालात सामान्य हो जाएंगे. तब तक सरकार को समर्थन जारी रखना होगा.

सवाल और जवाब

क्या कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण प्रॉपर्टी की कीमतें गिरेंगी?

बहुत तेजी से इजाफा तो दिखाई नहीं देता. स्लोडाउन की वजह से प्रॉपर्टी की कीमतें उसी स्तर पर रहने वाली हैं.

कोविड-19 का हाउसिंग मार्केट पर क्या असर पड़ेगा?

कोरोना वायरस आपदा के कारण घरों की डिमांड पर कम अवधि में असर पड़ेगा.

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