महाराष्ट्र में किराये के लिए क्या हैं स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन के कानून, जानिए


महाराष्ट्र में रेंट अग्रीमेंट्स पर दी जाने वाली स्टैंप ड्यूटी क्या है? और किस नियम के तहत एेसे दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन होता है। आज हम आपको इसी बारे में बता रहे हैं।
किसी संपत्ति को किराये पर देते या लेते हुए कई तरह की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। लीव और लाइसेंस के अग्रीमेंट का स्टैंप्ड और रजिस्टर्ड होना जरूरी है। चूंकि स्टैंप ड्यूटी राज्य का विषय है, इसलिए हर राज्य में स्टैंप ड्यूटी की दरें अलग-अलग हैं। यहां हम महाराष्ट्र राज्य में स्टैंप ड्यूटी और लीव एवं लाइसेंस के लेनदेन के रजिस्ट्रेशन कानून के बारे में बता रहे हैं।

स्टैंप ड्यूटी प्रावधान:

भारतीय स्टैंप अधिनियम, 1899 के तहत स्टैंप ड्यूटी के मूल ढांचे को निर्धारित किया गया है, जिसमें राज्य अपनी जरूरत के अनुसार बदलाव कर सकते हैं। इसी के तहत महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे स्टैंप एक्ट, 1958 पास किया था। लीव और लाइसेंस अग्रीमेंट्स पर स्टैंप ड्यूटी का भुगतान बॉम्बे स्टैंप एक्ट, 1958 के आर्टिकल 36ए के तहत आता है। अवधि के कुल किराए की 0.25 प्रतिशत की फ्लैट स्टैंप ड्यूटी रेट के साथ लीव एंड लाइसेंस अग्रीमेंट्स को स्टैंप्ड कराने की जरूरत है। अगर किसी नॉन रिफंडेबल डिपॉजिट को मकान मालिक को भुगतान किया जाता है तो उसी दर पर स्टैंप ड्यूटी का भुगतान ऐसे नॉन रिफंडेबल डिपॉजिट पर भी किया जाएगा।
स्टैंप ड्यूटी न देने के लिए लोग नाममात्र किराये के साथ अकसर ब्याजमुक्त डिपॉजिट के तौर पर अच्छी खासी राशि का भुगतान करते हैं। इस खामी को अब उन मामलों में दूर कर लिया गया है, जहां रिफंडेबल डिपॉजिट मकानमालिक जमा करता है। 10% का मौलिक वार्षिक ब्याज ऐसी ब्याज-मुक्त जमा राशि पर लगाया जाता है और आपको उसी दर पर स्टैंप ड्यूटी का भुगतान करना पड़ता है, वह भी लाइसेंस समझौते की अवधि के हर वर्ष में। लीव एंड लाइसेंस अग्रीमेंट्स के लिए स्टैंप ड्यूटी का रेट रिहायशी और कमर्शियल परिसर के लिए एक समान है। 60 महीने से ज्यादा की अवधि के लिए लीव एंड लाइसेंस अग्रीमेंट का निष्पादन किया जा सकता है।

रेंट अग्रीमेंट पर चुकाए जाने वाली स्टैंप ड्यूटी कैलकुलेट करने का फॉर्म्युला:

मासिक रेंट x महीनों की संख्या= A
अवधि के लिए अडवांस टैक्स/नॉन रिफंडेबल डिपॉजिट=B
10 प्रतिशत x रिफंडेबल डिपॉजिट x अग्रीमेंट के वर्ष=C
स्टैंप ड्यूटी से संबंधित कुल राशि=D =A+B+C
स्टैंप ड्यूटी=E=0.25% x D
उदाहरण के तौर पर अगर आप 24 महीने के लिए 5 लाख के डिपॉजिट और 25 हजार मासिक किराये के साथ लीव एंड लाइसेंस अग्रीमेंट करते हैं तो आपको 1750 रुपये (दो साल के लिए छह लाख रुपये के किराए और दो साल तक एक लाख रुपये के ब्याज पर 0.25%) स्टैंप ड्यूटी चुकानी होगी।

रेंटल अग्रीमेंट्स में रजिस्ट्रेशन के प्रावधान:

पूरे भारत में लागू होने वाले इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट के सेक्शन 17 के मुताबिक हर साल अचल संपत्ति की लीज के हर एक समझौते या एक साल से अधिक किसी भी अवधि के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसलिए जब तक राज्य के नियम इजाजत नहीं देते, 12 महीने या उससे ज्यादा की अवधि के लीव और लाइसेंस अग्रीमेंट रजिस्टर्ड होने चाहिए।
हालांकि महाराष्ट्र के लिए कानून को ज्यादा सख्त बनाया गया है और महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम, 1999 की धारा 55 के प्रावधानों के अनुसार किरायेदारी से जुड़ा हर समझौता या लीव एवं लाइसेंस अग्रीमेंट लिखित में होना चाहिए और उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, चाहे किरायेदारी की अवधि कोई भी हो।
रेंट अग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करना मकानमालिक का काम है और एेसा न करने पर उसे तीन महीने कैद और पांच हजार रुपये का जुर्माना झेलना पड़ सकता है। अगर लीव एंड लाइसेंस अग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन नहीं होता और मकानमालिक व किरायेदार के बीच कोई विवाद पैदा होता है तो किरायेदार द्वारा दी गई दलीलों के मुताबिक समझौते के नियम व शर्तों को सही माना जाएगा, जब तक यह गलत साबित नहीं होता।
महाराष्ट्र में किरायेदारी अग्रीमेंट की रजिस्ट्रेशन फीस इस बात पर निर्भर करती है कि प्रॉपर्टी कहां स्थित है। अगर प्रॉपर्टी किसी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के इलाके में स्थित है तो रजिस्ट्रेशन फीस 1000 रुपये होगी और ग्रामीण इलाकों के लिए यह 500 रुपये है। इसके उलट किसी समझौते की गैर-मौजूदगी में स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की लागत किरायेदार को चुकानी होगी।
अग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन के लिए किरायेदार, मकानमालिक और गवाहों के कुछ दस्तावेज जैसे पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, आईडी प्रूफ की फोटोकॉपी (पैन कार्ड), इलेक्ट्रिसिटी बिल या प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट इंडेक्ट II व संपत्ति की टैक्स रसीद की जरूरत पड़ेगी।
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